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पीतांबर बने कांग्रेस जिलाध्यक्ष
उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
Updated Thu, 16 Aug 2018 11:09 PM IST
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कुंजवाल के समर्थन में तमाम इलाकों से अल्मोड़ा पहुंचे कार्यकर्ता।
- फोटो : amar ujala
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पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और जागेश्वर के विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल के इस्तीफे की घोषणा के बाद आखिरकार कांग्रेस नेतृत्व ने हाल ही में कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनाए गए मोहन सिंह महरा को हटाकर उनकी जगह एक बार फिर पीतांबर पांडे को जिलाध्यक्ष बना दिया है। कुंजवाल ने बताया कि वह 11 अगस्त को ही अपना इस्तीफा प्रदेश प्रभारी को भेज चुके थे और बुधवार रात राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत और कुछ अन्य नेताओं से भी उनकी फोन पर वार्ता हुई। अब पीतांबर पांडे को दोबारा अल्मोड़ा जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है।
पांच अगस्त को अल्मोड़ा में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन सिंह महरा को कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनाने के ऐलान के साथ ही कुंजवाल की नाराजगी खुलकर सामने आ गई थी। कुंजवाल का कहना था कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में जिलाध्यक्ष बनाने में उनकी कोई सहमति नहीं ली गई। कुंजवाल ने इसके बाद 16 अगस्त को पार्टी छोड़ देने तक का ऐलान किया था।
दोपहर करीब दो बजे यहां शिखर के शाही हॉल में जमा हुए कार्यकर्ताओं के सामने कुंजवाल ने पार्टी से इस्तीफा वापस लेने का ऐलान किया। कुंजवाल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह की ओर से जारी पत्र प्रस्तुत किया और कहा कि अब मोहन सिंह महरा के स्थान पर फिर से पूर्व जिलाध्यक्ष पीतांबर पांडे को ही जिलाध्यक्ष बना दिया गया है।
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कुंजवाल ने कहा कि उनकी सहमति के बगैर ही उनके विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले मोहन सिंह महरा को जिलाध्यक्ष बनाकर आगे आने वाले चुनावों में आपस में लड़ाने का प्रयास किया गया। यह लोग उनकी राजनीतिक हत्या करना चाहते थे। इसका उन्होंने विरोध किया। साथ ही उन्होंने राज्य के अन्य जिलों और महानगर इकाइयों के गठन में भी जातीय संतुलन का ध्यान नहीं देने तथा महिलाओं को भी उचित प्रतिनिधित्व नहीं देने का आरोप लगाया। कुंजवाल ने यह भी कहा कि मोहन सिंह महरा से उनका कोई दुराग्रह नहीं है।
कुंजवाल ने खुलासा किया कि इन मुद्दों को लेकर उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह आदि से भी बात की लेकिन जब उनकी बात नहीं सुनी गई। इस पर उन्होंने 11 अगस्त को प्रदेश प्रभारी को उन्होंने पार्टी से अपना इस्तीफा भेज दिया। इसके बाद काजी निजामुुद्दीन सहित कई नेताओं और तमाम कार्यकर्ताओं ने उनसे वार्ता की। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भी उनसे वार्ता करने अल्मोड़ा पहुंचे। उन्होंने बताया कि बुधवार रात को कांग्रेस नेता अशोक गहलोत से उनकी लंबी बात हुई और गहलोत ने इस मामले का हल निकालने की बात कही।
इस मौके पर दोबारा अध्यक्ष बने पीतांबर पांडे का माल्यार्पण करके स्वागत किया गया। पूर्व दर्जा राज्य मंत्री बिट्टू कर्नाटक, राजेंद्र बाराकोटी, पूर्व विधायक ललित फस्र्वाण, दिनेश कुंजवाल, राजेश बिष्ट, त्रिलोचन जोशी, बीके भट्ट सहित काफी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे।
100 करोड़ और मुख्यमंत्री पद का मिला था ऑफर
कार्यकर्ताओं से मुखातिब कुंजवाल ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान जब नौ विधायकों की सदस्यता समाप्त की तो उस वक्त विधायकों की सदस्यता बचाने के लिए उन्हें 100 करोड़ रुपये का ऑफर मिला था। कुंजवाल बोले कि सरकार गिराने पर उन्हें बाद में मुख्यमंत्री बनाए जाने तक का लालच दिया गया।
प्रीतम सिंह और इंदिरा हृदयेश को भी लिया निशाने पर
कुंजवाल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश को भी निशाने पर लिया। कुंजवाल के मुताबिक इन दोनों नेताओं ने यह बयान दिया कि कुंजवाल पीतांबर पांडे को जिलाध्यक्ष पद से हटाना चाहते थे। उन्होंने ऐसी बात नहीं कही थी। दोनों नेताओं ने पार्टी के भीतर की बातों को सार्वजनिक किया जो कि अनुचित है।
कुंजवाल ने कहा कि पूर्व विधायक मनोज तिवारी भी बिट्टू कर्नाटक के अलावा किसी अन्य को जिलाध्यक्ष बनाने के पक्ष में थे। कुंजवाल ने कहा कि अब तक उनके करीबी रहे कई नेता और कार्यकर्ताओं ने इस प्रकरण के दौरान आग में घी डालने का काम किया। ऐसे लोगों को उन्होंने चिह्नित कर लिया है और भविष्य में उनसे इसका कारण जरूर पूछेंगे।
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पांच अगस्त को अल्मोड़ा में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन सिंह महरा को कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनाने के ऐलान के साथ ही कुंजवाल की नाराजगी खुलकर सामने आ गई थी। कुंजवाल का कहना था कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में जिलाध्यक्ष बनाने में उनकी कोई सहमति नहीं ली गई। कुंजवाल ने इसके बाद 16 अगस्त को पार्टी छोड़ देने तक का ऐलान किया था।
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दोपहर करीब दो बजे यहां शिखर के शाही हॉल में जमा हुए कार्यकर्ताओं के सामने कुंजवाल ने पार्टी से इस्तीफा वापस लेने का ऐलान किया। कुंजवाल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह की ओर से जारी पत्र प्रस्तुत किया और कहा कि अब मोहन सिंह महरा के स्थान पर फिर से पूर्व जिलाध्यक्ष पीतांबर पांडे को ही जिलाध्यक्ष बना दिया गया है।
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कुंजवाल ने कहा कि उनकी सहमति के बगैर ही उनके विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले मोहन सिंह महरा को जिलाध्यक्ष बनाकर आगे आने वाले चुनावों में आपस में लड़ाने का प्रयास किया गया। यह लोग उनकी राजनीतिक हत्या करना चाहते थे। इसका उन्होंने विरोध किया। साथ ही उन्होंने राज्य के अन्य जिलों और महानगर इकाइयों के गठन में भी जातीय संतुलन का ध्यान नहीं देने तथा महिलाओं को भी उचित प्रतिनिधित्व नहीं देने का आरोप लगाया। कुंजवाल ने यह भी कहा कि मोहन सिंह महरा से उनका कोई दुराग्रह नहीं है।
कुंजवाल ने खुलासा किया कि इन मुद्दों को लेकर उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह आदि से भी बात की लेकिन जब उनकी बात नहीं सुनी गई। इस पर उन्होंने 11 अगस्त को प्रदेश प्रभारी को उन्होंने पार्टी से अपना इस्तीफा भेज दिया। इसके बाद काजी निजामुुद्दीन सहित कई नेताओं और तमाम कार्यकर्ताओं ने उनसे वार्ता की। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भी उनसे वार्ता करने अल्मोड़ा पहुंचे। उन्होंने बताया कि बुधवार रात को कांग्रेस नेता अशोक गहलोत से उनकी लंबी बात हुई और गहलोत ने इस मामले का हल निकालने की बात कही।
इस मौके पर दोबारा अध्यक्ष बने पीतांबर पांडे का माल्यार्पण करके स्वागत किया गया। पूर्व दर्जा राज्य मंत्री बिट्टू कर्नाटक, राजेंद्र बाराकोटी, पूर्व विधायक ललित फस्र्वाण, दिनेश कुंजवाल, राजेश बिष्ट, त्रिलोचन जोशी, बीके भट्ट सहित काफी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे।
100 करोड़ और मुख्यमंत्री पद का मिला था ऑफर
कार्यकर्ताओं से मुखातिब कुंजवाल ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान जब नौ विधायकों की सदस्यता समाप्त की तो उस वक्त विधायकों की सदस्यता बचाने के लिए उन्हें 100 करोड़ रुपये का ऑफर मिला था। कुंजवाल बोले कि सरकार गिराने पर उन्हें बाद में मुख्यमंत्री बनाए जाने तक का लालच दिया गया।
प्रीतम सिंह और इंदिरा हृदयेश को भी लिया निशाने पर
कुंजवाल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश को भी निशाने पर लिया। कुंजवाल के मुताबिक इन दोनों नेताओं ने यह बयान दिया कि कुंजवाल पीतांबर पांडे को जिलाध्यक्ष पद से हटाना चाहते थे। उन्होंने ऐसी बात नहीं कही थी। दोनों नेताओं ने पार्टी के भीतर की बातों को सार्वजनिक किया जो कि अनुचित है।
कुंजवाल ने कहा कि पूर्व विधायक मनोज तिवारी भी बिट्टू कर्नाटक के अलावा किसी अन्य को जिलाध्यक्ष बनाने के पक्ष में थे। कुंजवाल ने कहा कि अब तक उनके करीबी रहे कई नेता और कार्यकर्ताओं ने इस प्रकरण के दौरान आग में घी डालने का काम किया। ऐसे लोगों को उन्होंने चिह्नित कर लिया है और भविष्य में उनसे इसका कारण जरूर पूछेंगे।