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मजदूरों को कोरोना संक्रमण की वजह से पेट भरने के पड़े लाले
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आज एक मई है और आज का यह दिन दुनिया भर के मजदूरों को समर्पित है। कोरोना संक्रमण के दौर में मजदूरों के हाल दयनीय स्थिति में पहुंच चुके हैं। न तो उन्हें ढंग से काम मिल पा रहा है और न ही उनका ठीक तरह से पेट भर पा रहा है। बड़ी मुश्किल से दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो पा रहा है।
अल्मोड़ा नगर और आसपास के इलाके में श्रमिक के तौर पर काम करने वालों में ज्यादातर तादाद बिहार और नेपाल के लोगों की रहती है। यहां भवन निर्माण, सामान ढोने, सड़क निर्माण आदि कामों में यही श्रमिक काम करते हैं। पिछले साल लॉकडाउन के बाद ज्यादातर लोग घर लौट गए थे फिर दीवाली के बाद जब हालात सही हुए तो काफी लोग वापस आ गए लेकिन इस साल होली के बाद फिर से वही हाल बनने लगे। ऐसे में इन्हें काम मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। श्रमिकों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
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साहब, वह सालों से अल्मोड़ा में काम कर रहे हैं। पहले रोजाना ही यहां पर काम मिलता था। कोरोना बीमारी बढ़ने के साथ ही काम मिलना कम हो गया है। अब तो पेट भरना भी मुश्किल हो गया है। भगवान इस संकट से जल्दी उबारे। - वीर बहादुर (नेपाल)
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कोरोना से हम मजदूरों की परेशानी बढ़ गई है। सोचा था चार पैसे कमाएंगे लेकिन कोरोना ने सब पर पानी फेर दिया है। हमारे साथ वाले कई लोग वापस घर चले गए हैं। मैं भी चली जाऊंगी क्योंकि दिन में दो बजे के बाद काम नहीं मिलता है। - सीता देवी (नेपाल)
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हमने सोचा कि बीमारी कम हो जाएगी और हालात सही हो जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब तो कभी-कभी ही काम मिल पा रहा है। यही हाल अन्य मजदूरों के भी हैं। कोरोना ने श्रमिक वर्ग को भूखे पेट सोने तक के लिए मजबूर कर दिया है। - राम बिलास (बिहार)
शीर्षक : वह सुबह जरूर आएगी
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आज नहीं तो कल वह सुबह जरूर आएगी
जब धूप तेरे हिस्से की तेरे आंगन पर मुस्कुराएगी
मुसकुराती आंखों में चमक तेरे हौसलों की नजर आएगी
और उम्मीद जहां भर की खिलते होठों पर मुस्कुराएगी।
तेरी उम्मीद, तेरी मेहनत एक दिन रंग जरूर लाएगी
इन मेहनतकश हाथों की चुभन बेकार नहीं जाएगी
लकीरें हाथों में बनीं अनगिन कहानी खुद तेरी बताएगी
और ये लाली हाथों की तेरी भविष्य तेरा बनाएगी।
होगा सूरज वही पर एक दिन सुबह नई आएगी
जब उस सुनने वाले तक तेरी भी आवाज पहुंच जाएगी
मेहनत तेरी तब तेरे भी काम आएगी
और अट्टालिका ऊंची खुद तेरे मेहनत का गीत सुनाएगी।
घोर झंझावातों में हिम्मत तेरी तुझे नया रास्ता दिखाएगी
मंजिल तेरी तेरे चेहरे पे खुशी बन झलक आएगी
सांझ अंधेरी बीतेगी एक किरण सुबह सुनहरी आएगी
और मेहनत तेरी तरक्की का एक नया गीत गुनगुनाएगी।
एक दिन दुनिया में वह बदलाव की घड़ी आएगी
जब बात बड़े ध्यान से मेहनतकश की सुनी जाएगी
महत्ता तब श्रम की दुनिया को समझ में आएगी
और जिंदगी श्रमिक की एक आयाम नया बनाएगी।
- (कवींद्र पंत) अल्मोड़ा उत्तराखंड
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अल्मोड़ा नगर और आसपास के इलाके में श्रमिक के तौर पर काम करने वालों में ज्यादातर तादाद बिहार और नेपाल के लोगों की रहती है। यहां भवन निर्माण, सामान ढोने, सड़क निर्माण आदि कामों में यही श्रमिक काम करते हैं। पिछले साल लॉकडाउन के बाद ज्यादातर लोग घर लौट गए थे फिर दीवाली के बाद जब हालात सही हुए तो काफी लोग वापस आ गए लेकिन इस साल होली के बाद फिर से वही हाल बनने लगे। ऐसे में इन्हें काम मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। श्रमिकों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
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साहब, वह सालों से अल्मोड़ा में काम कर रहे हैं। पहले रोजाना ही यहां पर काम मिलता था। कोरोना बीमारी बढ़ने के साथ ही काम मिलना कम हो गया है। अब तो पेट भरना भी मुश्किल हो गया है। भगवान इस संकट से जल्दी उबारे। - वीर बहादुर (नेपाल)
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कोरोना से हम मजदूरों की परेशानी बढ़ गई है। सोचा था चार पैसे कमाएंगे लेकिन कोरोना ने सब पर पानी फेर दिया है। हमारे साथ वाले कई लोग वापस घर चले गए हैं। मैं भी चली जाऊंगी क्योंकि दिन में दो बजे के बाद काम नहीं मिलता है। - सीता देवी (नेपाल)
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हमने सोचा कि बीमारी कम हो जाएगी और हालात सही हो जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब तो कभी-कभी ही काम मिल पा रहा है। यही हाल अन्य मजदूरों के भी हैं। कोरोना ने श्रमिक वर्ग को भूखे पेट सोने तक के लिए मजबूर कर दिया है। - राम बिलास (बिहार)
शीर्षक : वह सुबह जरूर आएगी
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आज नहीं तो कल वह सुबह जरूर आएगी
जब धूप तेरे हिस्से की तेरे आंगन पर मुस्कुराएगी
मुसकुराती आंखों में चमक तेरे हौसलों की नजर आएगी
और उम्मीद जहां भर की खिलते होठों पर मुस्कुराएगी।
तेरी उम्मीद, तेरी मेहनत एक दिन रंग जरूर लाएगी
इन मेहनतकश हाथों की चुभन बेकार नहीं जाएगी
लकीरें हाथों में बनीं अनगिन कहानी खुद तेरी बताएगी
और ये लाली हाथों की तेरी भविष्य तेरा बनाएगी।
होगा सूरज वही पर एक दिन सुबह नई आएगी
जब उस सुनने वाले तक तेरी भी आवाज पहुंच जाएगी
मेहनत तेरी तब तेरे भी काम आएगी
और अट्टालिका ऊंची खुद तेरे मेहनत का गीत सुनाएगी।
घोर झंझावातों में हिम्मत तेरी तुझे नया रास्ता दिखाएगी
मंजिल तेरी तेरे चेहरे पे खुशी बन झलक आएगी
सांझ अंधेरी बीतेगी एक किरण सुबह सुनहरी आएगी
और मेहनत तेरी तरक्की का एक नया गीत गुनगुनाएगी।
एक दिन दुनिया में वह बदलाव की घड़ी आएगी
जब बात बड़े ध्यान से मेहनतकश की सुनी जाएगी
महत्ता तब श्रम की दुनिया को समझ में आएगी
और जिंदगी श्रमिक की एक आयाम नया बनाएगी।
- (कवींद्र पंत) अल्मोड़ा उत्तराखंड