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अमर उजाला अभियान शिक्षा : बिना परीक्षा पास हो गए विद्यार्थी, अब भविष्य के इम्तिहान को लेकर चिंता
Thu, 24 Mar 2022 11:43 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
Published by: हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 24 Mar 2022 11:43 PM IST
सार
शिक्षकों का मानना है कि पहले ही कोरोना के कारण बच्चों की पढ़ाई लंबे समय से प्रभावित होते आ रही है। अब कक्षाओं में लौटने पर विद्यार्थियों का पढ़ाई से मन उठता जा रहा है। कई विद्यार्थी तो पढ़ाई में काफी कमजोर होते जा रहे हैं।
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कमलेश तिवारी,
- फोटो : ALMORA
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विस्तार
कोरोना काल में करीब दो साल तक चली वर्चुअल पढ़ाई के बाद अब अल्मोड़ा में छात्र-छात्राएं कक्षाओं में लौटे हैं। अभी भी बच्चों का पढ़ाई पर ठीक से मन नहीं लग रहा है। कोरोना महामारी के कारण विभिन्न कक्षाओं के बच्चों को बिना परीक्षा लिए ही पास कर दिया गया है। इस कारण विद्यार्थियों को आगे जाकर बहुत नुकसान झेलना पड़ेगा। अभिभावक भी इस परेशानी को महसूस कर रहे हैं।
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शिक्षकों का मानना है कि पहले ही कोरोना के कारण बच्चों की पढ़ाई लंबे समय से प्रभावित होते आ रही है। अब कक्षाओं में लौटने पर विद्यार्थियों का पढ़ाई से मन उठता जा रहा है। कई विद्यार्थी तो पढ़ाई में काफी कमजोर होते जा रहे हैं। विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रोन्नत करने को लेकर लचीला रवैया के दुष्परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं। अगर परीक्षा ही नहीं होगी तो बच्चे तैयारी नहीं करेंगे। बिना परीक्षा दिए पास हुए विद्यार्थियों का भविष्य आगे चलकर धुंधला रहेगा।
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बच्चों की एक तो पढ़ाई का नियम छूट जाएगा जो आगे चलकर सही होना बहुत मुश्किल है। विद्यार्थी परीक्षाओं की ठीक से तैयारी नहीं करेंगे। कक्षा शिक्षण और स्कूल स्तरीय गतिविधियों से दूर रहने के कारण विद्यार्थियों की प्रतियोगिता स्तर पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियां भी बच्चे ठीक ढंग से नहीं कर पाएंगे।
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होली एंजिल पब्लिक स्कूल अल्मोड़ा के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज चौधरी बताया कि बच्चों को हर विषय पर सवाल बैंक देते हैं जिससे बच्चों को समझने में आसानी होती है।
12वीं के बच्चों को पूरा पाठ्यक्रम कराते हैं ताकि आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी बच्चे तैयार हो सके। कोरोनाकाल में बच्चे स्कूल से कई दिन दूर रहे। इससे कहीं न कहीं अभिभावक भी इस बात को लेकर परेशान हैं कि आगे वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कैसे कर पाएंगे। शिक्षाविदों का मानना है कि घर पर अच्छे से पढ़ाई नहीं हो पाने के कारण और केवल प्रोन्नत होने से विद्यार्थियों में विषयों की गूढ़ता के प्रति उत्साह समाप्त सा हो गया है। जिसका सीधा असर उनकी प्रतियोगी परीक्षाओं पर भी पड़ा है और आगे भी पड़ेगा।
बच्चों की बात
बोर्ड परीक्षा के लिए तैयारियां अच्छी हैं। कठिन विषयों को ज्यादा समय देती हूं ताकि कोई कमी न रह जाए। ऑफलाइन क्लासें लगने से कठिन टॉपिक भी आसानी से समझ में आए हैं। परीक्षा को लेकर मन में कोई घबराहट नहीं है। इस बार बोर्ड परीक्षाएं होनी चाहिए ताकि हम भविष्य में किसी भी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अपने को सक्षम समझें।
परीक्षा हर हाल में होनी चाहिए
परीक्षा को लेकर पूरी तरह से तैयार हूं। सारे विषयों की अच्छे से तैयारी की है। कोरोना ने पढ़ाई प्रभावित की लेकिन ऑफलाइन पढ़ाई से राहत मिली। सरकार परीक्षा लेगी तो वह अपनी मेहनत से पास हो सकती है। परीक्षा अनिवार्य होनी चाहिए इससे पढ़ाई का रुटीन भी बना रहेगा और विद्यार्थी पढ़ाई में भी कमजोर नहीं होंगे।
अभिभावकों की बात
कोरोना काल के कारण पहले ही बच्चों की पढ़ाई काफी खराब हुई है। ऐसे में अगर बच्चों को बिना परीक्षा के ही पास कर दिया जाएगा तो आगे चलकर बच्चों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए वह कमजोर हो जाएंगे। हाईस्कूल और इंटर बोर्ड की परीक्षाएं सरकार को जरूर करानी चाहिए।
परीक्षा से मन में उत्साह रहता है
परीक्षा दिए बिना पास होने वाले विद्यार्थियों की राह आगे आसान नहीं होगी। उनकी पढ़ाई काफी कमजोर हो जाएगी। बच्चों का प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ेगा। यदि परीक्षा होगी तो बच्चों के मन में एक उत्साह रहेगा। वह पूर्ववत की तरह अपनी तैयारी जारी रखेंगे। अन्यथा आगे चलकर उन्हें समस्याओं से ही जूझना पड़ेगा। - कमलेश तिवारी, अभिभावक अल्मोड़ा
शिक्षकों की बात
दो साल से बच्चों की पढ़ाई नियमित रूप से नहीं हो पाई है। उन्हें ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से पढ़ाया जा रहा है। शिक्षक लगातार बच्चों के संपर्क में रहे हैं। स्कूल खुलने के बाद दोगुनी मेहनत के साथ शिक्षण कार्य कर रहे हैं। कक्षा शिक्षण और स्कूल स्तरीय गतिविधियों से दूर रहने के कारण बच्चों की प्रतियोगिता स्तर पर प्रभाव पड़ेगा। परीक्षा के प्रति बच्चे काफी उत्साहित हैं क्योंकि उन्हें लंबे समय के बाद परीक्षा देने का मौका मिल रहा है। - सुनीता बोरा, शिक्षिका जीआईसी हवालबाग
सकारात्मक प्रतियोगी माहौल बंद हो गया था
विद्यार्थियों को पिछले साल के अंकों और प्रदर्शन के आधार पर आगे की कक्षाओं में प्रोन्नत किया गया था लेकिन इसका बच्चों की प्रतियोगिता स्तर पर काफी प्रभाव पड़ा। बच्चों के मध्य जो एक सकारात्मक प्रतियोगी माहौल विद्यालयी शिक्षा की दिनचर्या के दौरान होता था वह अचानक से बंद हो गया। प्रतियोगी माहौल होने से बच्चों के मध्य शिक्षणेत्तर गतिविधियों के तहत होने वाली सीखने-सिखाने की प्रक्रिया चलती है लेकिन लचीला रवैया होने से यह बाधित हो जाती है। - कमलेश जोशी, शिक्षक जीआईसी हवालबाग
परीक्षा को उत्सव की तरह लेने की दी जा रही सलाह
कोरोना महामारी के कारण विद्यार्थियों का दो साल का समय ऑनलाइन पढ़ाई में बीता है। अब ऑफलाइन पढ़ाई शुरू हुई है। गृह परीक्षाएं सुचारु रूप से संपन्न हो रही हैं। स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी करा रहे हैं। उन्हें टिप्स दे रहे हैं। कोरोना की मार झेल रहे सरकारी और निजी स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों को अतिरिक्त पढ़ाई करा रहे हैं। कोरोना के कारण करीब 30 प्रतिशत पाठों की पढ़ाई नहीं हो पाई है। इन परिस्थितियों से विद्यार्थियों को उबारने के लिए स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा के लिए टिप्स दे रहे हैं। राजकीय इंटर कॉलेज मंडलसेरा में परीक्षा एक उत्सव कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को टिप्स दिए गए। प्रधानाचार्य डॉ. केवलानंद कांडपाल ने कहा कि बोर्ड परीक्षा को लेकर अतिरिक्त तनाव लेना सही नहीं है। अभिभावकों को भी बोर्ड परीक्षार्थियों पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालना चाहिए।