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टोल टैक्स वसूली के निजीकरण का होगा विरोध
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)
Updated Wed, 11 Mar 2015 11:34 PM IST
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छावनी परिषद में टोल टैक्स वसूली प्रक्रिया को फिर से निजी हाथों में देने की चर्चा है। इससे नाराज चालकों का कहना है कि निजी माध्यम से मनमाना टैक्स वसूलने की आशंका है। यूनियन शिष्टमंडल ने बुधवार को सभासदों के साथ यहां कैंट बोर्ड के सीईओ से मुलाकात कर सार्थक कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने स्थानीय टैक्सी वाहन चालकों से दिन में केवल एक बार टोल वसूलने की गुहार भी लगाई।
टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष शंकर ठाकुर ने कहा कि 2002 में छावनी परिषद ने टोल टैक्स वसूलने की प्रक्रिया का निजीकरण किया था, तब ठेकेदार ने कई बैरियरों पर पैदल चलने वालों से भी टोल वसूला था। वाहन चालकों से मनमाने रेट वसूले जा रहे थे। विरोध के बाद छावनी परिषद ने इस प्रक्रिया को अपने हाथों में ले लिया, लेकिन अब फिर से यह व्यवस्था निजी हाथों में देने की बातें चल रही हैं, जिस कारण स्थानीय टैक्सी वाहन चालक आशंकित हैं। पदाधिकारियों ने कहा कि छावनी परिषद स्थानीय वाहन चालकों से नगर में प्रवेश के लिए बार बार टोल टैक्स वसूल रही है। नगर में प्रवेश करने पर टाटा सूमो वाहन से एक बार में 30 रुपए, अल्टो वाहनों से 20 रुपए टोल वसूला जाता है। यदि दिन में तीन चक्कर भी लगे तो हर बार टोल देना पड़ रहा है। जिससे चालकों के सम्मुख भारी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि फरवरी माह में कैंट ने दिन में केवल एक बार टोल लेने की प्रक्रिया अपनाई, लेकिन अब फिर से पुरानी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शिष्टमंडल में सचिव देवेंद्र तिवारी, नरेंद्र सिंह, आनंद सिंह आदि शामिल थे।
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