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...तो बड़े भूस्खलन के बाद ही जागेगी सांस्कृतिक नगरी

अमर उजाला ब्यूरो  अल्मोड़ा। Updated Fri, 07 Sep 2018 11:38 PM IST
अल्मोड़ा का दृश्य।
अल्मोड़ा का दृश्य। - फोटो : अमर उजाला
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 नैनीताल में लोअर माल रोड सहित कुछ अन्य इलाकों में हुई भूस्खलन की घटनाओं ने अल्मोड़ावासियों को भी 2010 के भयानक भूस्खलन की याद  दिला दी है।  तब नगर और आसपास के इलाकों में भारी तबाही हुई थी। इन घटनाओं में अकेले अल्मोड़ा तहसील के 28 लोगों की जान चली गई थी। पिछले तीन दशकों में भूस्खलन की कई बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं। भू वैज्ञानिकों का मानना है कि मुख्य नगर में बरसात के पानी की निकासी के उचित प्रबंध नहीं होने से भूस्खलन की घटनाएं होती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नगर में ड्रेनेज सिस्टम नहीं बनाया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
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अल्मोड़ा उत्तराखंड का सबसे पुराना नगर है। यह नगर 1560 में बसना शुरू हुआ। 19वीं शताब्दी से पहले यहां काफी कम निर्माण हुआ था। तब गिने चुने भवन थे। बाद के वर्षों में बेतरतीब निर्माण से स्थिति बिगड़ी। प्रकृति से छेड़छाड़ के बाद से भूस्खलन की घटनाओं का दौर शुरू हुआ। 2010 में हुई अतिवृष्टि के बाद भूस्खलन आदि घटनाओं में जिले में कुल 36 लोगों की जान चली गई। जिसमें 28 तो अल्मोड़ा तहसील के ही थे। यह भी बता दें कि अल्मोड़ा में बारिश के पानी को बाहर करने के लिए आज तक ड्रेनेज सिस्टम नहीं बन सका है। विशेषज्ञों के मुताबिक ड्रेनेज सिस्टम नहीं होने से बारिश का पानी जमीन के भीतर घुसने लगता है और खास तौर पर जब अधिक बारिश होती है तो भूस्खलन की घटनाएं होती हैं।  
           
कुमाऊं विवि एसएसजे परिसर अल्मोड़ा में भूगोल के विभागाध्यक्ष और एनआरडीएमएस के निदेशक प्रो.जेएस रावत का कहना है कि अल्मोड़ा नगर में पानी की निकासी के लिए आज तक ड्रेनेज सिस्टम नहीं बन पाना गंभीर बात है। इससे नगर और आसपास के इलाकों में भूस्खलन का खतरा बना रहेगा। सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा को बचाना है तो नगर क्षेत्र में जल निकासी के ठोस प्रबंध करने होंगे। उन्होंने कहा कि नगर में भवनों के निर्माण के लिए उचित सही योजना बननी जरूरी है और भूगर्भ परीक्षण के बाद ही नियमों के अनुसार निर्माण होना चाहिए। हर साल मानसून शुरू होने से पहले नालों और कलवर्टों की सफाई पूरी तरह दुरुस्त करके संबंधित एजेंसियों से इसके लिए बकायदा प्रमाणपत्र लिया जाना चाहिए।             
       
वैज्ञानिकों की राय को भी नहीं माना गया               
अल्मोड़ा। 1993 में अल्मोड़ा की न्यू इंदिरा कालोनी इलाके में अनेक मकान ध्वस्त हो गए थे। भूगर्भ वैज्ञानिकों ने इस समूचे इलाके में भवन बनाने पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था लेकिन इसके बावजूद वहां दर्जनों भवन बना दिए गए और वहां लगातार निर्माण चल रहा है। इसका नतीजा यह हुआ कि सितंबर 2010 फिर से भारी तबाही हुई और करीब 100 से अधिक मकान ध्वस्त हो गए थे।              

कोट-             
नगर में पानी की निकासी के लिए ड्रेनेज सिस्टम बनना जरूरी है। इसके लिए प्रदेश के शहरी विकास विभाग से मार्गदर्शन लेकर विशेषज्ञों की राय से योजना तैयार की जाएगी। - नितिन भदौरिया जिलाधिकारी अल्मोड़ा

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