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नंदाष्टमी पर चंद राज वंशज तांत्रिक विधि से करते हैं मां की पूजा

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 05 Sep 2019 11:42 PM IST
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On Nandashtami, a few descendants worship the mother by tantric method
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अल्मोड़ा। नंदाष्टमी के अवसर पर अल्मोड़ा में नंदादेवी की पूजा तारा शक्ति के रूप में होती है। यह पूजा तांत्रिक विधि से होती है और चंद शासकों के वंशज ही इस पूजा को कराते हैं। चंद शासकों के वंशज नैनीताल के पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा और उनके परिवारजन नंदाष्टमी के मौके पर परंपरा के मुताबिक तांत्रिक पूजा करवाते हैं। शुक्रवार को नंदाष्टमी पर होने वाली इस विशेष पूजा के लिए चंद राज वंशज केसी सिंह बाबा अल्मोड़ा पहुंच चुके हैं।
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बता दें कि ज्योतिष, तंत्र और मंत्र तीनों विधाओं से उत्तराखंड का जनजीवन और संस्कृति बहुत प्रभावित रही है। जानकारों के मुताबिक कत्यूरी और चंद राजा तंत्र विद्या में पारंगत माने जाते थे। कत्यूरी और चंद शासनकाल में देवी को युद्ध देवी के रूप में पूजने की परंपरा काफी प्रचलित रही है। स्व. राजा आनंद सिंह तंत्र विद्या में काफी पारंगत माने जाते थे। जानकारी के मुताबिक उनके निधन के बाद नंदादेवी की पूजा पद्धति में काफी परिवर्तन आ चुका है लेकिन आज भी चंद शासकों के वंशज नैनीताल के पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा और उनके परिवारजन नंदाष्टमी के मौके पर परंपरा के मुताबिक तांत्रिक पूजा करवाते हैं। यह पूजा तारा यंत्र के सामने होती है। बताया जाता है कि यह यंत्र राज परिवार के पास ही है और राज परिवार इसे अपने साथ ही लेकर आता है।
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लेखक और पुराविद कौशल सक्सेना के मुताबिक तारा की उपासना मुख्यत: तांत्रिक पद्धति से होती है। इसे आगमोक्त पद्धति कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि बौद्ध धर्म में तारा के माध्यम से ही शक्ति का प्रवेश हुआ। तिब्बत में उन्हें तारा धारणी का नाम दिया गया है। यह माना जाता है कि नंदा-सुनंदा की चोटी का स्वरूप नंदादेवी की चोटी के स्वरूप से आया।
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मां नंदा के नाम से हैं कई चोटियां और नदियां
अल्मोड़ा। समूचे उत्तराखंड को एक सूत्र में पिरोने मां नंदा की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। नंदादेवी की पूजा समूचे उत्तराखंड में होती है। उन्हें उत्तराखंड की देवी मां का दर्जा प्राप्त है। पुराणों में हिमालय की पुत्री को नंदा बताया गया है। जिनका विवाह शिव से होता है। देवी भागवत में नंदा को शैलपुत्री के रूप में नौ दुर्गाओं में एक बताया गया है। जबकि भविष्य पुराण में उन्हें सीधे तौर पर दुर्गा कहा गया है। नंदादेवी के नाम से हिमालय की अनेक चोटियां हैं। इनमें नंदादेवी, नंदाकोट, नंदाघुंटी, नंदाखाट आदि चोटियां हैं। इसके अलावा नंदाकिनी, नंद केसरी आदि नदियों के नाम भी नंदा देवी के नाम से हैं। उन्हें पर्वत राज हिमालय की पुत्री तथा उमा, गौरी और पार्वती के रूप में माना जाता है।
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