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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   Now the mountains are beginning to move in the case of cesarean baby

अब पहाड़ों में भी बढ़ने लगे हैं सीजेरियन बेबी के मामले

Tue, 20 Sep 2016 11:51 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला अल्मोड़ा।
ब्यूरो, अमर उजाला अल्मोड़ा। Updated Tue, 20 Sep 2016 11:51 PM IST
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 पहाड़ की कामकाजी महिलाओं की पहले सामान्यत: नॉर्मल डिलीवरी होती थी,  लेकिन जीवन शैली बदलने से अब पर्वतीय इलाकों में भी सीजेरियन बेबी के मामले बढ़ने लगे हैं। नेशनल हेल्थ मिशन की रिपोर्ट में सीजेरियन के मामले काफी चौंकाने वाले रहे हैं। जिसमें अल्मोड़ा जिले में आपरेशन से होने वाले बच्चों का प्रतिशत पिछले छह माह में छह प्रतिशत तक बढ़ा है। हालांकि यह बात भी मानी जाती है कि प्राइवेट नर्सिंग होम खुलने के बाद से भी सीजेरियन आपरेशनों को बढ़ावा मिला है, लेकिन पहाड़ में महिलाओं की बदलती लाइफ स्टाइल और उनके द्वारा पहले की तरह शारीरिक श्रम नहीं करना इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है।
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प्राइवेट अस्पतालों में सीजेरियन के मामले ज्यादा रहते हैं। खासकर मैदानी क्षेत्रों में ऐसे केस काफी देखने को मिलते हैं। क्योंकि अधिकांश मामलों में गर्भवती महिलाएं दर्द से बचने के लिए खुद आपरेशन करवाना पसंद करती हैं। कुछ मामलों में डाक्टर भी रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। मैदानी क्षेत्रों में महिलाएं शारीरिक श्रम उतना नहीं करतीं जितना पहाड़ों में महिलाओं को करना पड़ता है। इससे भी नॉर्मल डिलीवरी में फर्क पड़ता है।
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पर्वतीय क्षेत्रों में गरीब और  मध्यम वर्ग के परिवार ज्यादा होने के कारण अधिकतर गर्भवती महिलाएं सरकारी अस्पतालों को ही प्राथमिकता देती हैं और नॉर्मल डिलीवरी करवाती हैं, लेकिन बीते कुछ सालों से पहाड़ों में भी ट्रेंड बदलने लग गया है। दूरस्थ गांवों को छोड़ दिया जाए तो अब महिलाएं पहले जितना शारीरिक श्रम नहीं करतीं। लाइफ स्टाइल का इस तरह बदलना कहीं न कहीं महिलाओं में इम्यूनिटि सिस्टम को भी कमजोर कर रहा है। एनएचएम के कार्यक्रम प्रबंधक दीपक भट्ट और वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निशा पांडे का कहना है कि पिछले छह माह में सीजेरियन बच्चों का प्रतिशत बढ़ा है।
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एनएचएम की रिपोर्ट पर गौर करें तो 2014-15 में 360 मामले सीजेरियन के सामने आए हैं। यानी कि जिले में प्रसव के टारगेट 6061 के सापेक्ष यह छह प्रतिशत रहा। 2015-16 में हालांकि यह संख्या 292 रही, लेकिन 2016-17 के शुरुआती छह माह में ही यह आंकड़ा छह प्रतिशत की दर पर पहुंच गया। इन छह माह में 146 बच्चे सीजेरियन से पैदा हुए हैं। 


इन्सेट-
क्या-क्या कारण हैं सीजेरियन के
क्रिटिकल केस या फिर महिला का पूर्व में भी ऑपरेशन से बच्चा पैदा होना। 
गर्भ में पल रहे बच्चे का वजन अनुमानित से ज्यादा होना। 
गर्भवती महिला में डर का भाव पैदा होना या डॉक्टरों का रिस्क न लेना। 
बच्चे के लिए लोगों में धैर्य की कमी होना। 

क्या है नफा नुकसान
नार्मल डिलीवरी होने पर मां अपने बच्चे को तुरंत दुग्धपान करा सकती है जबकि सीजेरियन में दो से तीन दिन बाद ही यह संभव है।
सीजेरियन डिलीवरी में मां को तीन दिन बाद ही हल्का भोजन दिया जा सकता है लेकिन नॉर्मल डिलीवरी में मां पहले दिन से ही हल्का भोजन ले सकती है।
सीजेरियन डिलीवरी में मां को कम से कम आठ दिन तक अस्पताल रहना पड़ता, है जबकि नॉर्मल डिलीवरी में एक दो दिन बाद ही घर लौट सकते हैं।
 
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