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पालिका परिषद के बावजूद चिलियानौला में अदद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक नही
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चिलियानौला का विहंगम दृश्य। फोटो साभार प्रदीप मावड़ी।
- फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। नगर से सटा चिलियानौला कस्बा अब नगर का रूप ले चुका है। 2018 में इसे नगर पालिका परिषद भी बना दिया गया है। सुविधाओं के नाम पर यहां एक अदद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) तक नहीं है। इंटर की पढ़ाई के लिए लोगों को छह से सात किमी की दौड़ या तो खिरखेत अथवा रानीखेत लगानी पड़ती है।
रानीखेत नगर छावनी परिषद के अधीन है। छावनी के जटिल नियम कानूनों के चलते यहां भवन निर्माण, भूमि की उपलब्धता और सुधारीकरण जैसे कार्य नहीं हो पाते। इसी कारण अधिकांश नौकरी पेशा और अन्य लोगों ने चिलियानौला में जमीन खरीदी और यहां भवन निर्माण कर लिया। इस कारण तेजी से इस कस्बे की आबादी बढ़ी और 2016 में यहां नगर पालिका परिषद की घोषणा कर दी गई। 2016 में नगर पालिका अस्तित्व में आ गई। यहां सात वार्ड बनाए गए हैं लेकिन पर्याप्त सुविधाएं अब तक लोगों को नहीं मिल पाई हैं। यह क्षेत्र पर्यटन के लिए मुफीद है, यहां विश्व विख्यात हैड़ाखान आश्रम है। जहां साल भर देशी विदेशी सैलानी आते हैं। चिलियानौला से खनियां के लिए स्वीकृत रोपवे आज तक अस्तित्व में नहीं आ सका है। इस कस्बे में अदद स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं है। यह क्षेत्र 12 किमी दूर ताड़ीखेत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा हुआ है। लोग पांच किमी दूर रानीखेत जाने को विवश हैं। यही हाल शिक्षा व्यवस्था का है। पालिका में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल तो हैं लेकिन इंटर की पढ़ाई के लिए बच्चों को पांच से छह किमी दूर या तो खिरखेत जाना पड़ता है या फिर रानीखेत का रुख करना पड़ता है। पूर्व प्रधान कवींद्र सिंह कुवार्बी ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो यहां खुलना ही चाहिए, साथ ही इंटर कालेज की मांग भी की गई थी, लेकिन आज तक वह पूरी नहीं हो पाई है।
-चिलियानौला क्षेत्र के विकास के लिए 2016 में कांग्रेस सरकार ने यहां नगर पालिका बनाई। प्रदेश सरकार से भी नए पालिका क्षेत्रों के विकास के लिए हमने कई बार सदन में मांग उठाई, लेकिन छोटी छोटी जरूरतों को भी भाजपा सरकार पूरी नहीं कर पाई है। पालिका का गठन कांग्रेस ने ही किया, अब सरकार आने पर हम ही इसे संवारेंगे। -करन माहरा, विधायक रानीखेत।
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रानीखेत नगर छावनी परिषद के अधीन है। छावनी के जटिल नियम कानूनों के चलते यहां भवन निर्माण, भूमि की उपलब्धता और सुधारीकरण जैसे कार्य नहीं हो पाते। इसी कारण अधिकांश नौकरी पेशा और अन्य लोगों ने चिलियानौला में जमीन खरीदी और यहां भवन निर्माण कर लिया। इस कारण तेजी से इस कस्बे की आबादी बढ़ी और 2016 में यहां नगर पालिका परिषद की घोषणा कर दी गई। 2016 में नगर पालिका अस्तित्व में आ गई। यहां सात वार्ड बनाए गए हैं लेकिन पर्याप्त सुविधाएं अब तक लोगों को नहीं मिल पाई हैं। यह क्षेत्र पर्यटन के लिए मुफीद है, यहां विश्व विख्यात हैड़ाखान आश्रम है। जहां साल भर देशी विदेशी सैलानी आते हैं। चिलियानौला से खनियां के लिए स्वीकृत रोपवे आज तक अस्तित्व में नहीं आ सका है। इस कस्बे में अदद स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं है। यह क्षेत्र 12 किमी दूर ताड़ीखेत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा हुआ है। लोग पांच किमी दूर रानीखेत जाने को विवश हैं। यही हाल शिक्षा व्यवस्था का है। पालिका में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल तो हैं लेकिन इंटर की पढ़ाई के लिए बच्चों को पांच से छह किमी दूर या तो खिरखेत जाना पड़ता है या फिर रानीखेत का रुख करना पड़ता है। पूर्व प्रधान कवींद्र सिंह कुवार्बी ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो यहां खुलना ही चाहिए, साथ ही इंटर कालेज की मांग भी की गई थी, लेकिन आज तक वह पूरी नहीं हो पाई है।
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-चिलियानौला क्षेत्र के विकास के लिए 2016 में कांग्रेस सरकार ने यहां नगर पालिका बनाई। प्रदेश सरकार से भी नए पालिका क्षेत्रों के विकास के लिए हमने कई बार सदन में मांग उठाई, लेकिन छोटी छोटी जरूरतों को भी भाजपा सरकार पूरी नहीं कर पाई है। पालिका का गठन कांग्रेस ने ही किया, अब सरकार आने पर हम ही इसे संवारेंगे। -करन माहरा, विधायक रानीखेत।
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