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आखिर कब तक चुनावी मु्द्दा बनकर रह जाएंगी ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं
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ताड़ीखेत स्वास्थ्य केंद्र का भवन। संवाद
- फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। तमाम प्रयासों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर नहीं लौट पा रही हैं। रानीखेत उपमंडल के सबसे बड़े ब्लाक के रूप में शुमार ताड़ीखेत में ही दर्जन भर स्वास्थ्य केंद्र हैं। इन केंद्रों एक्सरे, अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था तो दूर विशेषज्ञ डॉक्टरों का ही अभाव बना हुआ है। जिस कारण दूर दराज के गरीब ग्रामीणों को बेवजह परेशान होना पड़ता है। सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसूता महिला को यदि परेशानी हो जाए तो उन्हें 25 किमी दूर पहले ताड़ीखेत फिर रानीखेत आना पड़ता है। ताड़ीखेत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। अब चुनाव नजदीक हैं ऐसे में पहाड़ की स्वास्थ्य सेवाओं को ही नेता मुद्दा बनाएंगे, यह सिलसिला पहले आम चुनाव से चला आ रहा है।
पहाड़ की स्वास्थ्य सेवाएं राज्य बनने के बाद से ही सुधर नहीं सकी हैं। हालांकि अब ग्रामीण क्षेत्रो के अस्पतालों में सामान्य डॉक्टर तो हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों का बेहद अभाव बना हुआ है। एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और खून की जांच के लिए ग्रामीणों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता है। हर चुनाव में यह मुद्दा बनाया जाता है, लेकिन सरकार बनते ही पहाड़ की स्वास्थ्य सेवाओं को भुला दिया जाता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव में दूरदराज के ग्रामीणों को या तो रानीखेत या फिर हल्द्वानी के निजी अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
रानीखेत उपमंडल के सबसे बड़े ब्लॉक के रूप में शुमार ताड़ीखेत विकासखंड में भी हालात जस के तस हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से अत्यधिक दूरी होने के कारण सबसे अधिक परेशानी प्रसूता महिलाओं को रहती है। यह लोग पहले गांव के स्वास्थ्य केंद्र में जाते हैं, वहां से ताड़ीखेत आते हैं, यदि नॉर्मल डिलीवरी तो ठीक, फिर रानीखेत भेज दिए जाते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर कई बार आंदोलन हो चुके हैं, इसके बावजूद व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है।
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-ताड़ीखेत ब्लॉक के अंदर चार पीएचसी, एक सीएचसी और चार स्टेट एलोपैथिक डिस्पेंसरी है। हालांकि सामान्य डॉक्टर हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। एक्सरे, अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था भी नहीं है। ताड़ीखेत ग्रामीणों का केंद्र है यहां तो एक्सरे और विशेषज्ञ डॉक्टरों की बेहद जरूरत है। हालांकि नार्मल डिलीवरी तो आराम से हो रही हैं। अब खून की जांच भी होने लगी हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह व्यवस्था नहीं है।
-डॉ. डीएस नबियाल, प्रभारी चिकित्साधिकारी, ताड़ीखेत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र।
-ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर विधानसभा में प्रश्न उठाने के बावजूद सरकार नहीं चेत रही। कोरोना संकट में विधायकों को आंदोलन करने पड़े। पन्याली, नौघर, भतरौंजखान, भिकियासैंण के अस्पतालों की बदहाली का मामला उठाया। भिकियासैंण में ऑक्सीजन प्लांट के लिए 50 लाख रुपये दिए थे, अभी तक कार्य पूरा नहीं हुआ है। भाजपा नेताओं को अपनी सरकार को नींद से उठाना चाहिए।
-करन माहरा, विधायक रानीखेत।
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पहाड़ की स्वास्थ्य सेवाएं राज्य बनने के बाद से ही सुधर नहीं सकी हैं। हालांकि अब ग्रामीण क्षेत्रो के अस्पतालों में सामान्य डॉक्टर तो हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों का बेहद अभाव बना हुआ है। एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और खून की जांच के लिए ग्रामीणों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता है। हर चुनाव में यह मुद्दा बनाया जाता है, लेकिन सरकार बनते ही पहाड़ की स्वास्थ्य सेवाओं को भुला दिया जाता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव में दूरदराज के ग्रामीणों को या तो रानीखेत या फिर हल्द्वानी के निजी अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
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रानीखेत उपमंडल के सबसे बड़े ब्लॉक के रूप में शुमार ताड़ीखेत विकासखंड में भी हालात जस के तस हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से अत्यधिक दूरी होने के कारण सबसे अधिक परेशानी प्रसूता महिलाओं को रहती है। यह लोग पहले गांव के स्वास्थ्य केंद्र में जाते हैं, वहां से ताड़ीखेत आते हैं, यदि नॉर्मल डिलीवरी तो ठीक, फिर रानीखेत भेज दिए जाते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर कई बार आंदोलन हो चुके हैं, इसके बावजूद व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है।
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-ताड़ीखेत ब्लॉक के अंदर चार पीएचसी, एक सीएचसी और चार स्टेट एलोपैथिक डिस्पेंसरी है। हालांकि सामान्य डॉक्टर हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। एक्सरे, अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था भी नहीं है। ताड़ीखेत ग्रामीणों का केंद्र है यहां तो एक्सरे और विशेषज्ञ डॉक्टरों की बेहद जरूरत है। हालांकि नार्मल डिलीवरी तो आराम से हो रही हैं। अब खून की जांच भी होने लगी हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह व्यवस्था नहीं है।
-डॉ. डीएस नबियाल, प्रभारी चिकित्साधिकारी, ताड़ीखेत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र।
-ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर विधानसभा में प्रश्न उठाने के बावजूद सरकार नहीं चेत रही। कोरोना संकट में विधायकों को आंदोलन करने पड़े। पन्याली, नौघर, भतरौंजखान, भिकियासैंण के अस्पतालों की बदहाली का मामला उठाया। भिकियासैंण में ऑक्सीजन प्लांट के लिए 50 लाख रुपये दिए थे, अभी तक कार्य पूरा नहीं हुआ है। भाजपा नेताओं को अपनी सरकार को नींद से उठाना चाहिए।
-करन माहरा, विधायक रानीखेत।