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प्राधिकरण के विरोध में दिया धरना, सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
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अल्मोड़ा के गांधी पार्क में धरना देते सर्वदलीय समिति के लोग
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। जिला विकास प्राधिकरण (डीडीए) को खत्म करने की मांग के लिए सर्वदलीय संघर्ष समिति से जुड़े लोगों ने मंगलवार को चौघानपाटा स्थित गांधी पार्क में धरना दिया। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध जताया।
धरना स्थल पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि नवंबर 2017 में प्रदेश की भाजपा सरकार ने तुगलकी फरमान से पूरे पर्वतीय क्षेत्रों में प्राधिकरण लागू कर दिया था। स्थानीय जनता और समिति इसका लगातार विरोध कर रही है।
विरोध के बाद भी प्रदेश सरकार ने केवल प्राधिकरण को स्थगित किया है जो जनता के साथ धोखा है। प्राधिकरण को स्थगित करना भाजपा सरकार की षड्यंत्रकारी नीति है। जहां एक ओर प्राधिकरण स्थगित किया गया है वहीं दूसरी ओर मानचित्र स्वीकृत करने के लिए कोई शासनादेश जारी नहीं किया गया है।
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इस वजह से भवन निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत करवाने के लिए शपथपत्र देकर मानचित्र की स्वीकृति प्राधिकरण के तहत लेनी पड़ रही है जो कि औचित्यहीन है।
नगर पालिका अधिनियम 1916 में विभिन्न प्रावधानों के अनुसार नगर पालिका परिषद को अपने नगर की सीमा क्षेत्र में भवन मानचित्र स्वीकृत करने का अधिकार था। प्राधिकरण गठित होने के बाद से पालिका की आय कम हो गई है। प्राधिकरण को पहाड़ से तत्काल समाप्त करने का शासनादेश जारी किया जाए।
नगरीय क्षेत्र में मानचित्र स्वीकृत करने का अधिकार नगर निकायों को ही दिया जाए। समिति के प्रवक्ता राजीव कर्नाटक, दीपांशु पांडे, सभासद हेम तिवारी, महेश आर्या, नारायण दत्त पांडेय, आनंदी वर्मा, मदन सिंह बिरौड़िया, ललित मोहन पंत आदि धरने पर बैठे।
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धरना स्थल पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि नवंबर 2017 में प्रदेश की भाजपा सरकार ने तुगलकी फरमान से पूरे पर्वतीय क्षेत्रों में प्राधिकरण लागू कर दिया था। स्थानीय जनता और समिति इसका लगातार विरोध कर रही है।
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विरोध के बाद भी प्रदेश सरकार ने केवल प्राधिकरण को स्थगित किया है जो जनता के साथ धोखा है। प्राधिकरण को स्थगित करना भाजपा सरकार की षड्यंत्रकारी नीति है। जहां एक ओर प्राधिकरण स्थगित किया गया है वहीं दूसरी ओर मानचित्र स्वीकृत करने के लिए कोई शासनादेश जारी नहीं किया गया है।
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इस वजह से भवन निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत करवाने के लिए शपथपत्र देकर मानचित्र की स्वीकृति प्राधिकरण के तहत लेनी पड़ रही है जो कि औचित्यहीन है।
नगर पालिका अधिनियम 1916 में विभिन्न प्रावधानों के अनुसार नगर पालिका परिषद को अपने नगर की सीमा क्षेत्र में भवन मानचित्र स्वीकृत करने का अधिकार था। प्राधिकरण गठित होने के बाद से पालिका की आय कम हो गई है। प्राधिकरण को पहाड़ से तत्काल समाप्त करने का शासनादेश जारी किया जाए।
नगरीय क्षेत्र में मानचित्र स्वीकृत करने का अधिकार नगर निकायों को ही दिया जाए। समिति के प्रवक्ता राजीव कर्नाटक, दीपांशु पांडे, सभासद हेम तिवारी, महेश आर्या, नारायण दत्त पांडेय, आनंदी वर्मा, मदन सिंह बिरौड़िया, ललित मोहन पंत आदि धरने पर बैठे।