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तो छावनी के वाशिंदों को मिल सकेगी अंग्रेजों के काले कानून से मुक्ति

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 11 Jul 2021 11:42 PM IST
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New Rules of Ranikhet Cant
रानीखेत (अल्मोड़ा)। रक्षा मंत्रालय ने छावनियों में लागू भूमि प्रबंधन अधिनियम 1937 में व्यापक संशोधन करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में नागरिकों से 23 जुलाई तक सुझाव और आपत्तियां भी मांगी गई हैं। हालांकि नागरिक पहले से ही अंग्रेजों द्वारा निर्मित छावनी अधिनियम और भूमि प्रबंधन अधिनियम में संशोधन कर इसे सरल बनाने की मांग करते रहे हैं।
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लोगों का कहना है कि अंग्रेजों ने अपने हितों के लिए लोगों से जमीन खरीदी और उन्हें ही यह भूमि लीज पर आवंटित कर दी। आजादी के बाद भी इस कानून से छुटकारा नहीं मिला और काले कानून के नीचे दबे रहने को विवश होना पड़ रहा है। नए कानून के ड्राफ्ट को लेकर भी लोगों में शंका है। कल शिव मंदिर में विभिन्न संगठनों और नागरिकों की बैठक भी बुलाई गई है।
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बता दें कि रानीखेत छावनी देश की 62 छावनियों में से बड़ी छावनी के रूप में शुमार है। छावनी क्षेत्र के अंतर्गत रहने वाले लोग लंबे समय से भूमि अधिनियम में संशोधन की मांग करते आ रहे हैं। नागरिकों का मानना है कि अंग्रेजों ने अपने हितों के लिए छावनी अधिनियम और भूमि प्रबंधन अधिनियम बनाए।
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सख्त लीज और भूमि कानून के प्रावधानों का खामियाजा नागरिक आज तक भुगत रहे हैं। स्वतंत्रता के 73 वर्ष बाद भी नागरिक 1937 में बनाए गए भू अधिनियम के नीचे दबे रहने को विवश है। छावनी परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष मोहन नेगी ने बताया कि इस बीच रक्षा मंत्रालय इन अधिनियमों में संशोधन की कवायद शुरू की है।
आम नागरिकों और विभिन्न संगठनों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं जो 23 जुलाई तक रक्षा मंत्रालय को भेजी जानी हैं लेकिन छावनी कानूनों के जानकार अधिनियम के नए प्रस्तावित ड्राफ्ट को भी शंका से देख रहे हैं। उनके अनुसार रक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा छावनी भूमि प्रबंधन कानून 1937 का नया प्रस्तावित ड्राफ्ट भी नागरिकों के लिए राहत से अधिक परेशानी का सबब बन सकता है।

इस नए प्रस्तावित ड्राफ्ट में नागरिकों को भूमि लीज पर देने का कानूनी प्रावधान तो रखा गया है लेकिन 10 वर्ष तक और इसके बाद भूमि किन नियम और शर्तों में होगी यह स्पष्ट नहीं है। इसी के मद्देनजर कल शिव मंदिर सभागार में स्थानीय नागरिकों और जन संगठनों की बैठक भी होगी। पूर्व उपाध्यक्ष मोहन नेगी और संजय पंत ने अधिक से अधिक लोगों से बैठक में भाग लेने की अपील की है।
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