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देहरादून में खुलेगा नेशनल स्किल डेवलपमेंट सेंटर
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Sun, 12 Jun 2016 10:59 AM IST
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संबोधित करते जावड़ेकर।
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रकाश जावड़ेकर ने देहरादून में राष्ट्रीय स्तर का नेशनल फॉरेस्ट स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने की घोषणा की है। इस सेंटर में मुख्य रूप से उत्तराखंड के युवाओं को वनों से संबंधित कौशल निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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अल्मोड़ा में शनिवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के वनों में आग की घटनाएं रोकने के लिए विश्व बैंक के सहयोग से कारगर योजना बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर छह हजार किमी लंबी सड़कों को मंजूरी दे दी गई है। इससे कुमाऊं से चीन की सीमा के लिए बनाई जा रही सड़क के निर्माण में भी गति आएगी। हिमालयी राज्यों को ग्रीन बोनस देने के लिए नीति बनाई जा रही है, जिसका भविष्य में उत्तराखंड को भी लाभ मिलेगा।
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केंद्र सरकार के दो साल के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए जावड़ेकर ने कहा कि विकेंद्रीकरण के तहत 40 हेक्टेयर तक वन भूमि हस्तांतरण का अधिकार क्षेत्रीय कार्यालयों को दे दिया है। एक कार्यालय देहरादून में स्थापित है। अब 90 प्रतिशत फाइलों को दिल्ली भेजने की जरूरत ही नहीं पड़ती। सरकार के इस फैसले के बाद बरसों से लंबित 10 लाख करोड़ की विकास योजनाओं में काम शुरू हो गया है। उत्तराखंड सरकार ने 333 प्रस्ताव भेजे थे, जिनमें से 318 को मंजूरी दे दी गई है और केवल 15 प्रस्तावों पर कार्रवाई चल रही है। उन्होंने कहा कि देहरादून में राष्ट्रीय स्तर का नेशनल फॉरेस्ट स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित किया जाएगा।
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इसके तहत खास तौर पर उत्तराखंड के युवाओं को वनों से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा और उन्हें रोजगार से भी जोड़ा जाएगा। इससे पलायन रोकने में मदद मिलेगी। जावड़ेकर ने कहा कि केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में 1400 केवी की चार ट्रांसमिशन लाइनों को भी मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि बीते दिनों उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने के कारणों की जांच कराई गई है और 15 दिन के भीतर रिपोर्ट मिल जाएगी। इसमें मुख्य तौर पर आग को रोकने के उपायों के बारे में जानकारी मिल सकेगी। इस मौके पर सांसद अजय टम्टा, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष केदार जोशी, प्रदेश महामंत्री बिष्ट, जिलाध्यक्ष ललित लटवाल, कैलाश गुरुरानी, धर्मेंद्र बिष्ट आदि मौजूद थे।
इको सेंसेटिव जोन में शिथिलता के लिए उत्तराखंड से कोई प्रस्ताव नहीं मिला
अल्मोड़ा। केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने कहा कि इको सेंसेटिव जोन के अंतर्गत 10 किमी की परिधि में विकास कार्यों में आ रही दिक्कतों के समाधान के लिए देश के सभी राज्यों के 404 प्रस्तावों का निस्तारण कर दिया गया है, लेकिन दुर्भाग्य से उत्तराखंड सरकार ने एक भी प्रस्ताव नहीं भेजा, जबकि यहां 19 सेंसेटिव जोन हैं। उन्होंने बताया कि भागीरथी इको जोन के बारे में उन्हें मुख्यमंत्री हरीश रावत का पत्र मिला था, हालांकि केंद्र में रही कांग्रेस सरकार ने ही भागीरथी क्षेत्र को इको सेंसेटिव जोन घोषित किया था। इस क्षेत्र में खेती, बागवानी, घर बनाने आदि कार्यों में किसी तरह की रोक नहीं है।