{"_id":"9974fc91801518ac2dc3c480b2c3454e","slug":"make-smart-ranikhet-cantonment-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रानीखेत को स्मार्ट छावनी बनाओ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रानीखेत को स्मार्ट छावनी बनाओ
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
Updated Mon, 11 Jan 2016 10:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुमाऊं की सबसे बड़ी रानीखेत छावनी को स्मार्ट छावनी बनाने की मांग मुखर होने लगी है। उपाध्यक्ष मोहन नेगी के नेतृत्व में सभासदों ने रक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर कहा है कि अंग्रेजों द्वारा बसाई गई रानीखेत छावनी आजादी के बाद से लगातार समस्याओं से जूझ रही है। कैंट के जटिल कानूनों के चलते दाखिल खारिज, लीज नवीनीकरण, भवन निर्माण के कार्य आसानी से नहीं हो पा रहे हैं।
विज्ञापन
रक्षा मंत्रालय ने शहरी विकास मंत्रालय की स्मार्ट सिटी के तर्ज पर स्मार्ट छावनी बसाने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में सभासदों ने रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को भेजे ज्ञापन में कहा है कि रानीखेत कैंट की स्थापना 1869 में हुई। अंग्रेज हुक्मरानों ने यहां के विकास के लिए तमाम योजनाएं चलाई, लेकिन आजादी के बाद छावनी के लोग कड़े कानूनों के चलते दोएम दर्जे का जीवन जी रहे हैं।
विज्ञापन
भवन निर्माण, दाखिल खारिज, लीज नवीनीकरण की अनुमति आसानी से नहीं मिल पाती है। जिस कारण लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। अंग्रेजों ने रानीखेत की खूबसूरत से खुश होकर यहां ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का निर्णय लिया था, लेकिन आजादी के बाद रानीखेत का विकास बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। यदि स्मार्ट छावनी बनती है तो नि:संदेह छावनी क्षेत्र के लोगों को इसका लाभ मिलेगा। ज्ञापन में सभासद संजय पंत, सुकृत शाह, भुवन लाल, अर्चना पाठक, विनोद कुमार, बिंदु रौतेला आदि के हस्ताक्षर मौजूद हैं।
विज्ञापन