पानी, पर्यावरण और जंगल के साथ सामंजस्य बनाएं : जल पुरुष
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सदाबहानी रही गगास नदी के संवर्द्धन को लेकर अमर उजाला फाउंडेशन की पदयात्रा का पहला चरण सोमवार को शुरू हो गया है। पदयात्रा नदी के उद्गम स्थल कुकुछिना स्थित गर्ग मुनि आश्रम से शुरू हुई। जल पुरुष मैगसायसाय पुरस्कार से सम्मानित राजेंद्र सिंह ने भी पदयात्रा में भाग लिया। जीआईसी दूनागिरि और नायल गांव में उन्होंने बच्चों और ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। लोगों को उन्होंने पानी, पर्यावरण और जंगल के साथ सामंजस्य बैठाने को कहा। सूखती नदियों से उत्पन्न होने वाली लाल, हरी और नीली गर्मियों पर विस्तृत चर्चा की। कहा कि नदी बचाने के लिए पहले एक गधेरे से ही शुरुआत करनी होगी। मंगलवार को पदयात्रा बुड्ढा सुरना से शुरू होकर सुरना होते हुए नौलकोट को प्रस्थान करेगी।
मालूम हो कि गगास नदी का प्रवाह निरंतर कम हो रहा है। पिछले 12 सालों से यह नदी सदबहानी का रुतबा खो रही है। अमर उजाला फाउंडेशन ने जन सहयोग से नदी के संवर्द्धन के लिए मुहिम छेड़ी है। इसी के तहत क्षेत्र में दो चरणों की पदयात्रा के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। पहले चरण की पदयात्रा शुरूहो गई है, जो खोलियाबांज, चरी, रतखाल होते हुए नायल और फिर बुड्ढा सुरना गांव पहुंची। पहले दिन की 10 किलोमीटर की इस यात्रा में जल पुरुष के नाम से विख्यात राजेंद्र सिंह ने जगह-जगह पर ग्रामीणों को नदी बचाने के तरीके बताए।
नायल में उन्होंने ग्रामीणों से संवाद कायम कर नदी और पारंपरिक स्रोतों को बचाने के लिए संकल्प लेने को कहा। पदयात्रा लिनरी फॉल भी पहुंची। रात्रि विश्राम बुड्ढा सुरना गांव में होगा। यात्रा और संवाद कार्यक्रम में देवेंद्र सिंह, दुर्गा देवी, जीवंती देवी, भारती बिष्ट, मोहनी देवी, तारा देवी, तुलसी देवी, नंद राम, बबिता देवी, रतन सिंह, हर स्वरूप, भूपाल सिंह, सुरेश शर्मा, प्रताप सिंह जीआईसी बिंता के 19 एनसीसी कैडेट, दुधोली के सामाजिक कार्यकर्ता आनंद सिंह बिष्ट सहित अमर उजाला फाउंडेशन की टीम भी थी।