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Almora News: कुमाऊं के तीन जिलों में रेस्क्यू सेंटर न होने से अल्मोड़ा पहुंचाए जा रहे हैं तेंदुए

Sun, 28 Dec 2025 10:18 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा Updated Sun, 28 Dec 2025 10:18 PM IST
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Leopards are being transported to Almora due to the absence of rescue centers in three Kumaon districts.
अल्मोड़ा। कुमाऊं मंडल में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं लेकिन इसके अनुरूप बुनियादी सुविधाओं का विकास नहीं हो पाया है। कुमाऊं के तीन जिलों में रेस्क्यू सेंटर न होने से पकड़े गए तेंदुओं को अल्मोड़ा के रेस्क्यू सेंटर में भेजा जा रहा है जिससे वहां क्षमता से अधिक तेंदुए रखे गए हैं।
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अल्मोड़ा स्थित रेस्क्यू सेंटर में केवल 10 तेंदुओं को रखने की क्षमता है। वर्तमान में यहां 14 तेंदुए हैं। क्षमता से अधिक तेंदुओं को रखे जाने से न सिर्फ वन विभाग पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है बल्कि सुरक्षा और देखभाल को लेकर भी चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। कुमाऊं के पांच जिलों अल्मोड़ा, नैनीताल, बागेश्वर , चंपावत और पिथौरागढ़ में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। गांवों के आसपास तेंदुओं की सक्रियता के चलते ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। कई मामलों में वन विभाग को तेंदुओं को पकड़कर रेस्क्यू सेंटर भेजना पड़ रहा है।वर्तमान में अल्मोड़ा के अलावा केवल नैनीताल के रानीबाग और कार्बेट के ढेला में ही रेस्क्यू सेंटर हैं।
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प्रत्येक जिले में होने चाहिए रेस्क्यू सेंटर

वन्यजीव विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को देखते हुए कुमाऊं के प्रत्येक जिले में रेस्क्यू सेंटर होने चाहिए ताकि तेंदुओं के रखरखाव के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा भी की जा सके।
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बढ़ता जा रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष



वर्ष 2025 में अब तक (दिसंबर अंत तक) उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष की कई घटनाएं हुई हैं जिसमें 32 मौतें और 236 घायल हुए हैं। वर्ष 2024 में वन्य जीवों के 596 हमले, 2023 में 391 हमले हुए। इनमें तेंदुआ, बाघ और हाथियों के हमले प्रमुख हैं। ये घटनाएं सिर्फ जंगलों तक सीमित न रहकर रिहायशी इलाकों तक फैली हैं। बढ़ती घटनाओं के बीच जंगली जानवर अब जंगलों के बजाय स्कूलों, खेतों और सड़कों के पास भी देखे जा रहे हैं। अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत और नैनीताल जैसे पहाड़ी जिलों में यह संघर्ष खासकर ज्यादा है, जहां ग्रामीण, खासकर महिलाएं और बच्चे, शिकार बन रहे हैं।






कुमाऊं में अल्मोड़ा, नैनीताल और कार्बेट के ढिकाला रेंज के अलावा कहीं रेस्क्यू सेंटर नहीं हैं। पहाड़ी जिलों में पकड़े गए तेंदुओं को अल्मोड़ा पहुंचाया जा रहा हैं। वर्तमान में यहां क्षमता से अधिक तेंदुए हैं। - प्रदीप कुमार धौलाखंडी, डीएफओ सिविल सोयम वन प्रभाग अल्मोड़ा
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