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नदी संरक्षण के नाम पर खानापूृरी
अमर उजाला ब्यूराे अल्माेड़ा
Updated Tue, 02 May 2017 10:28 PM IST
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इस तरह शूख रही गगास नदी।
- फोटो : अमर उजाला
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गगास नदी को बचाने के लिए विभागों के पास ठोस योजनाएं नहीं हैं। भूमि संरक्षण वन प्रभाग के गगास रेंज का नाम इस जीवनदायिनी नदी के नाम पर रखा गया है। नदी में मिलने वाले बड़े नालों को रिचार्ज करने के दावे किए जा रहे हैं। सिंचाई विभाग नदी में बड़ा बैराज बनाने की तैयारी में है।
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वर्तमान में इस नदी से रानीखेत, कामा, बग्वालीपोखर, कुमाऊं इंजीनियरिंग कालेज, चिलियानौला ग्राम समूह और खीरो घाटी पेयजल पंपिंग योजनाएं संचालित हैं की जा रही है। जल निगम के ईई एके कटारिया ने बताया कि इन योजनाओं के लिए प्रतिदिन छह मीलियन लीटर (0.6 एमलडी) पानी की जरूरत होती है। भूमि संरक्षण वन प्रभाग ने एक रेंज का नाम ही गगास रेंज रखा हुआ है।
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डीएफओ बीके सिंह का कहना है कि गगास के संवर्धन को लेकर फिलहाल कोई योजना नहीं है। जायका योजना के तहत नदी में गिरने वाले बड़े नालों को रिचार्ज कराया जा रहा है। इसके तहत ऐना, डडगलिया, धनखोली, दुगौड़ा, जाना, कनलगांव, विंता, मझोली, नौकोट, पागसा आदि नालों में चैक डैम बनाए जा रहे हैं। नमी बरकरार रखने के लिए चाल, खाल बनाए जा रहे हैं।
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219 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधा रोपण का कार्य भी किया गया है। ग्रामीण अक्सर नदी किनारे चौड़ी पत्ती के पेड़ लगाने तथा डैम बनाने का सुझाव भी देते रहे हैं। सिंचाई विभाग के ईई संजय शुक्ला का कहना है कि गगास नदी में बैराज निर्माण होना है। आईआईटी रुड़की इसका डीपीआर तैयार कर रहा है। उनका मानना है कि बड़ा बैराज बनने के बाद नदी के जल स्तर में बढ़ोत्तरी होगी तथा कई बंद स्रोत भी रिचार्ज होंगे।