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Almora News: सड़क न होने से धीरे-धीरे वीरान हो रहा है कालौटिया गांव
Sat, 28 Jun 2025 12:11 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Sat, 28 Jun 2025 12:11 AM IST
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कलौटिया गांव पहुंचने के लिए इस तरह बदहाल रास्ते पार करते हैं ग्रामीण। स्रोत: ग्रामीण
अल्मोड़ा। बुनियादी सुविधाओं के न होने से पहाड़ों से पलायन होना आम बात हो गई है। इस कारण गांवों से लगातार पलायन होता जा रहा है। द्वाराहाट विधानसभा के तल्ली मिरई गांव के कलौटिया तोक तक सड़क नहीं पहुंचने से लगातार पलायन होता जा रहा है। 10 साल पूर्व तक यहां की जनसंख्या 500 थी जो अब घटकर 40 से 50 हो गई है। इसका मुख्य कारण सड़क न होना है।
कलौटिया तोक के लोगों को बैंक, स्कूल, अस्पताल और बाजार पहुंचने के लिए ग्रामीणों को बदहाल रास्तों से पहले चार से पांच किमी की पैदल दूरी तय कर कोगाड़ बैंड तक पहुंचना पड़ता है। इसके बाद उन्हें यहां से वाहन पकड़कर चार किमी दूरी तय कर बाजार पहुंचना पड़ता है। लंबे समय से यहां के लोग सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए पीएमजीएसवाई की टीम ने सर्वे भी किया था, लेकिन गांव में मानकों के अनुसार जनसंख्या न होने के कारण गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई। जब गांव में कोई व्यक्ति बीमार होता है तो डोली से सड़क तक पहुंचाने के लिए उन्हें युवा तक नहीं मिलते।
दैनिक जरूरत के सामान को गांव तक पहुंचाने की चुनौती
कलौटिया तोक में रह रहे बुजुर्गों और अन्य लोगों के सामने रोजमर्रा के सामान को गांव तक पहुंचाने की चुनौती है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस रास्ते से वह सड़क की मांग कर रहे हैं, वहां से गांव की दूरी केवल दो से ढाई किलोमीटर है,। वर्तमान में वह जो वैकल्पिक रास्ता अपनाते हैं उसकी दूरी तीन से चार किमी है। संवाद
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मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए भी चलना पड़ता है पैदल
अल्मोड़ा। चुनाव के समय भी गांववालों को मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए तीन से चार किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है, जिससे कई बार वे अपने मताधिकार का प्रयोग तक नहीं कर पाते। ग्रामीण बताते हैं कि बीते सालों में कई बार ज्ञापन, शिकायतें और कागजी कार्यवाही की गईं लेकिन सड़क नहीं बन पाई। संवाद
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बोले ग्रामीण-
गांव के लिए सड़क न होने से पलायन करना लोगों की मजबूरी हो गई है। राज्य गठन के बाद गांव तक बुनियादी सुविधा पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि गांव तक सड़क नहीं पहुंचा पाए।
श्याम सिंह किरौला, ग्रामीण।
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एक ओर पलायन रोकने और बुनियादी सुविधाओं को पहुंचाने के तमाम दावे किए जाते हैं। सड़क सुविधा से वंचित कलौटिया तोक के ग्रामीणों का दर्द किसी को नहीं दिख रहा है।
- महेंद्र सिंह किरौला
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कलौटिया तोक के लोगों को बैंक, स्कूल, अस्पताल और बाजार पहुंचने के लिए ग्रामीणों को बदहाल रास्तों से पहले चार से पांच किमी की पैदल दूरी तय कर कोगाड़ बैंड तक पहुंचना पड़ता है। इसके बाद उन्हें यहां से वाहन पकड़कर चार किमी दूरी तय कर बाजार पहुंचना पड़ता है। लंबे समय से यहां के लोग सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए पीएमजीएसवाई की टीम ने सर्वे भी किया था, लेकिन गांव में मानकों के अनुसार जनसंख्या न होने के कारण गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई। जब गांव में कोई व्यक्ति बीमार होता है तो डोली से सड़क तक पहुंचाने के लिए उन्हें युवा तक नहीं मिलते।
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दैनिक जरूरत के सामान को गांव तक पहुंचाने की चुनौती
कलौटिया तोक में रह रहे बुजुर्गों और अन्य लोगों के सामने रोजमर्रा के सामान को गांव तक पहुंचाने की चुनौती है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस रास्ते से वह सड़क की मांग कर रहे हैं, वहां से गांव की दूरी केवल दो से ढाई किलोमीटर है,। वर्तमान में वह जो वैकल्पिक रास्ता अपनाते हैं उसकी दूरी तीन से चार किमी है। संवाद
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मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए भी चलना पड़ता है पैदल
अल्मोड़ा। चुनाव के समय भी गांववालों को मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए तीन से चार किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है, जिससे कई बार वे अपने मताधिकार का प्रयोग तक नहीं कर पाते। ग्रामीण बताते हैं कि बीते सालों में कई बार ज्ञापन, शिकायतें और कागजी कार्यवाही की गईं लेकिन सड़क नहीं बन पाई। संवाद
बोले ग्रामीण-
गांव के लिए सड़क न होने से पलायन करना लोगों की मजबूरी हो गई है। राज्य गठन के बाद गांव तक बुनियादी सुविधा पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि गांव तक सड़क नहीं पहुंचा पाए।
श्याम सिंह किरौला, ग्रामीण।
एक ओर पलायन रोकने और बुनियादी सुविधाओं को पहुंचाने के तमाम दावे किए जाते हैं। सड़क सुविधा से वंचित कलौटिया तोक के ग्रामीणों का दर्द किसी को नहीं दिख रहा है।
- महेंद्र सिंह किरौला