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पांच बच्चों ने जीरो बजट से अद्भुत जिम तैयार करके इसलाखाड़ी गांव को बना दिया खास
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अल्मोड़ा के ताकुला ब्लाक के इसला खाड़ी गांव में जिम में उपकरणों के साथ बच्चे।
- फोटो : ALMORA
सोमेश्वर (अल्मोड़ा)। इसलाखाड़ी गांव के कुछ गरीब बच्चों को जिम जाने का शौक है लेकिन इस पिछड़े गांव में जिम की सुविधा नहीं थी। तभी दसवीं में पढ़ने वाले गांव के 15 वर्षीय राहुल के दिमाग में खुद ही जिम बनाने का विचार आया और पांच बच्चों ने अपनी प्रतिभा और हुनर का इस्तेमाल कर गांव की एक खुली जगह पर अद्भुत जिम (व्यायामशाला) बनाकर सबको हैरत में डाल दिया। बच्चों ने इस जिम को तैयार करने में लकड़ी और कुछ घरेलू सामान का इस्तेमाल किया है। इसलिए उन्हें रुपयों की जरूरत नहीं पड़ी। बच्चों का यह जिम सोशल मीडिया पर भी चर्चाओं में है। जीरो बजट वाले इस जिम ने इसलाखाड़ी गांव को खास बना दिया है।
ताकुला के इसलाखाड़ी गांव के 15 वर्षीय राहुल कुमार को खेलों के साथ जिम का शौक है। उसने यू-ट्यूब पर जिम देखा था। राहुल ने अपने तीन-चार साथियों को भी जिम के बारे में बताया, पर उनके गांव में यह सुविधा मिले भी तो कैसे। राम विद्या मंदिर बसौली में दसवीं में पढ़ने वाले राहुल के दिमाग में गांव में ही जिम बनाने का विचार आया। उसने मोबाइल पर यू-ट्यूब में सर्च करके जिम के उपकरण बनाने की ठान ली। राहुल ने अपने साथियों की मदद से लॉकडाउन के दौरान 29 मार्च से गांव के पास खाली स्थान पर जिम बनाना शुरू किया। पांचों ने स्वयं के प्रयासों से लकड़ी से डंबल, रॉड, चक्के, बेंचप्रेस, बिम और पुली आदि उपकरण बनाए हैं। जिम बनाने वाले सभी बच्चे कम उम्र के हैं। राहुल का छोटा भाई मोहित कुमार शिशु मंदिर ताकुला में आठवीं और करन कुमार प्राथमिक स्कूल इसलाखाड़ी की पांचवीं कक्षा में पढ़ता है, जबकि पड़ोसी अक्षय कुमार और कृष्ण कुमार इंटर कॉलेज गणानाथ में पढ़ रहा है। इन बच्चों के पिता मजदूरी करते हैं। बच्चों ने बताया कि यह जीरो बजट का जिम है। इन बच्चों ने अपना यह हुनर दिखाकर इसलाखाड़ी गांव को खास बना दिया है। गांव के कई लोग इस जिम को देखने भी आ रहे हैं।
बच्चों ने इस तरह तैयार किए जिम के उपकरण
अल्मोड़ा। पांचों बच्चे दिन में जानवर चराने जंगल जाते हैं। वे जंगल से जिम के उपकरणों के लिए लकड़ी काटकर लाए। राहुल ने बताया कि सबसे पहले लकड़ी के दो गोल गुटके बनाकर उनके बीच में रॉड डालकर एक डंबल बनाया। उसके बाद राहुल ने अपने छोटे भाई मोहित कुमार, करन कुमार और पड़ोसी कृष्णा कुमार, अक्षय कुमार को साथ लेकर लकड़ी और घरेलू सामान से जिम में कसरत करने लगे। जरूरत के मुताबिक कुछ अन्य महत्वपूर्ण उपकरण बनाने का काम भी शुरू कर दिया। ये बच्चे सुबह-शाम जिम में व्यायाम करते हैं। बेंच प्रेस के लिए बच्चे कनस्तर के ऊपर लेटते हैं। यहां के क्षेत्र पंचायत सदस्य राजेंद्र प्रसाद टम्टा ने कहा कि इन बच्चों ने यह साबित किया है कि गांव के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। उन्हें अवसर मिले तो वे बहुत आगे बढ़ सकते हैं।
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ताकुला के इसलाखाड़ी गांव के 15 वर्षीय राहुल कुमार को खेलों के साथ जिम का शौक है। उसने यू-ट्यूब पर जिम देखा था। राहुल ने अपने तीन-चार साथियों को भी जिम के बारे में बताया, पर उनके गांव में यह सुविधा मिले भी तो कैसे। राम विद्या मंदिर बसौली में दसवीं में पढ़ने वाले राहुल के दिमाग में गांव में ही जिम बनाने का विचार आया। उसने मोबाइल पर यू-ट्यूब में सर्च करके जिम के उपकरण बनाने की ठान ली। राहुल ने अपने साथियों की मदद से लॉकडाउन के दौरान 29 मार्च से गांव के पास खाली स्थान पर जिम बनाना शुरू किया। पांचों ने स्वयं के प्रयासों से लकड़ी से डंबल, रॉड, चक्के, बेंचप्रेस, बिम और पुली आदि उपकरण बनाए हैं। जिम बनाने वाले सभी बच्चे कम उम्र के हैं। राहुल का छोटा भाई मोहित कुमार शिशु मंदिर ताकुला में आठवीं और करन कुमार प्राथमिक स्कूल इसलाखाड़ी की पांचवीं कक्षा में पढ़ता है, जबकि पड़ोसी अक्षय कुमार और कृष्ण कुमार इंटर कॉलेज गणानाथ में पढ़ रहा है। इन बच्चों के पिता मजदूरी करते हैं। बच्चों ने बताया कि यह जीरो बजट का जिम है। इन बच्चों ने अपना यह हुनर दिखाकर इसलाखाड़ी गांव को खास बना दिया है। गांव के कई लोग इस जिम को देखने भी आ रहे हैं।
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बच्चों ने इस तरह तैयार किए जिम के उपकरण
अल्मोड़ा। पांचों बच्चे दिन में जानवर चराने जंगल जाते हैं। वे जंगल से जिम के उपकरणों के लिए लकड़ी काटकर लाए। राहुल ने बताया कि सबसे पहले लकड़ी के दो गोल गुटके बनाकर उनके बीच में रॉड डालकर एक डंबल बनाया। उसके बाद राहुल ने अपने छोटे भाई मोहित कुमार, करन कुमार और पड़ोसी कृष्णा कुमार, अक्षय कुमार को साथ लेकर लकड़ी और घरेलू सामान से जिम में कसरत करने लगे। जरूरत के मुताबिक कुछ अन्य महत्वपूर्ण उपकरण बनाने का काम भी शुरू कर दिया। ये बच्चे सुबह-शाम जिम में व्यायाम करते हैं। बेंच प्रेस के लिए बच्चे कनस्तर के ऊपर लेटते हैं। यहां के क्षेत्र पंचायत सदस्य राजेंद्र प्रसाद टम्टा ने कहा कि इन बच्चों ने यह साबित किया है कि गांव के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। उन्हें अवसर मिले तो वे बहुत आगे बढ़ सकते हैं।
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