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जागेश्वर रेंज की दस ग्राम पंचायतों का होगा सुदृढ़ीकरण
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Mon, 18 Jan 2016 10:50 PM IST
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उत्तराखंड वन संसाधन प्रबंधन परियोजना से जिले के जागेश्वर रेंज में दस वन पंचायतों का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। परियोजना के तहत चयनित वन पंचायतों में जल, मृदा संरक्षण, पौधरोपण, आपदा प्रबंधन, ग्रामीणों की आजीविका सुधार के काम होंगे। आठ साल की इस परियोजना में एक करोड़ रुपये खर्च होंगे।
परियोजना के अंतर्गत सिविल सोयम वन प्रभाग अल्मोड़ा के अंतर्गत जिले में जागेश्वर रेंज की दस वन पंचायतें चयनित की गई हैं। इनमें भगरतोला, मैचून, चामी, बाराकूना, नया सिरकोट, नौगांव, पपोली, भैसाड़ी, पोखरी, तड़कोट वन पंचायतें शामिल हैं। जायका से वित्त पोषित इस परियोजना के माध्यम से वन पंचायतों में जल स्रोतों, नालों, खालों का पुनरुद्धार, मृदा संरक्षण, वन संवर्धन, पौधरोपण, सामुदायिक आधारित पौधलय बनाने आदि के कार्य किए जाएंगे। ग्रामीणों की आजीविका बढ़ाने को शहद, रेशा, प्राकृतिक रंग, तेजपात, औषधीय, सगंध पादप, डेरी, मुर्गीपालन, मसाले, बेमौसमी सब्जी उत्पादन से ग्रामीणों को जोड़ा जाएगा। ताकि ग्रामीणों के लिए रोजगार का सृजन हो और उनकी आय बढ़ सके। इसके अलावा वन पंचायतों में आपदा से बचाव के लिए कार्य किए जाएंगे।
इन गांवों में स्वयं सहायता समूह गठित कर ग्रामीणों की सहभागिता से कार्य होंगे। सिविल सोयम वन प्रभाग ने चयनित वन पंचायतों में स्वयं सहायता समूहों का गठन कर रिपोर्ट शासन को भेज दी है। प्रभागीय वनाधिकारी आरसी शर्मा ने बताया कि पांच साल की परियोजना में इन वन पंचायतों में एक करोड़ के बजट से कार्य किए जाएंगे। अगले वित्तीय वर्ष में कोसी और गणानाथ रेंज का भी परियोजना में चयन हुआ है। इन रेंजों की दस-दस वन पंचायतों में जायका परियोजना के तहत यह कार्य किए जाएंगे।
परियोजना के अंतर्गत सिविल सोयम वन प्रभाग अल्मोड़ा के अंतर्गत जिले में जागेश्वर रेंज की दस वन पंचायतें चयनित की गई हैं। इनमें भगरतोला, मैचून, चामी, बाराकूना, नया सिरकोट, नौगांव, पपोली, भैसाड़ी, पोखरी, तड़कोट वन पंचायतें शामिल हैं। जायका से वित्त पोषित इस परियोजना के माध्यम से वन पंचायतों में जल स्रोतों, नालों, खालों का पुनरुद्धार, मृदा संरक्षण, वन संवर्धन, पौधरोपण, सामुदायिक आधारित पौधलय बनाने आदि के कार्य किए जाएंगे। ग्रामीणों की आजीविका बढ़ाने को शहद, रेशा, प्राकृतिक रंग, तेजपात, औषधीय, सगंध पादप, डेरी, मुर्गीपालन, मसाले, बेमौसमी सब्जी उत्पादन से ग्रामीणों को जोड़ा जाएगा। ताकि ग्रामीणों के लिए रोजगार का सृजन हो और उनकी आय बढ़ सके। इसके अलावा वन पंचायतों में आपदा से बचाव के लिए कार्य किए जाएंगे।
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इन गांवों में स्वयं सहायता समूह गठित कर ग्रामीणों की सहभागिता से कार्य होंगे। सिविल सोयम वन प्रभाग ने चयनित वन पंचायतों में स्वयं सहायता समूहों का गठन कर रिपोर्ट शासन को भेज दी है। प्रभागीय वनाधिकारी आरसी शर्मा ने बताया कि पांच साल की परियोजना में इन वन पंचायतों में एक करोड़ के बजट से कार्य किए जाएंगे। अगले वित्तीय वर्ष में कोसी और गणानाथ रेंज का भी परियोजना में चयन हुआ है। इन रेंजों की दस-दस वन पंचायतों में जायका परियोजना के तहत यह कार्य किए जाएंगे।
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