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दो साल से मुआवजे के इंतजाम में काश्तकार
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Thu, 24 Nov 2016 10:53 PM IST
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हवालबाग विकासखंड के पटवारी क्षेत्र खत्याड़ी के 19 गांवों के किसानों को वर्ष 2014 में ओलावृष्टि से फसल को पहुंची क्षति का मुआवजा नहीं मिला है। इससे ग्रामीणों में रोष बढ़ रहा है। जबकि आसपास की अन्य ग्राम पंचायतों के प्रभावित काश्तकारों को मुआवजा मिल चुका है। गत दिनों अल्मोड़ा पहुंचे मुख्यमंत्री के सम्मुख भी ग्रामीणों ने यह मुद्दा उठाया था। इसके बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
वर्ष 2014 में ओलावृष्टि से क्षेत्र में फसलों को काफी नुकसान पहुंचा था। सरकार ने प्रभावित काश्तकारों को मुआवजा देने की घोषणा की थी, लेकिन पटवारी क्षेत्र खत्याड़ी के अथरबाड़ी, कुनेतागूंठ, खत्याड़ी, गरगूंठ, तलाड़, तलाड़बाड़ी, घड़सीमी, नैनीकुंस्याल, भनारगूंठ, भालड़, रैलापाली, सैनार, स्याहटांडा, सरकार की आली, बजनियामाफी समेत 19 गांवों के किसान अब तक फसल क्षति के मुआवजा से वंचित हैं।
उल्लेखनीय है कि गत 15 नवंबर को अल्मोड़ा पहुंचे मुख्यमंत्री हरीश रावत के सामने भी क्षेत्र पंचायत सदस्य आनंद सिंह कनवाल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने यह मुद्दा उठाया था। ग्रामीणों ने सीएम को बताया कि मुआवजे से वंचित गांवों के आसपास की ग्राम पंचायतों के प्रभावित काश्तकारों को मुआवजा मिल गया है, लेकिन खत्याड़ी क्षेत्र के काश्तकार ही मुआवजे से वंचित चल रहे हैं। मुख्यमंत्री को बताने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर क्षेत्र के काश्तकारों में शासन प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है।
वर्ष 2014 में ओलावृष्टि से क्षेत्र में फसलों को काफी नुकसान पहुंचा था। सरकार ने प्रभावित काश्तकारों को मुआवजा देने की घोषणा की थी, लेकिन पटवारी क्षेत्र खत्याड़ी के अथरबाड़ी, कुनेतागूंठ, खत्याड़ी, गरगूंठ, तलाड़, तलाड़बाड़ी, घड़सीमी, नैनीकुंस्याल, भनारगूंठ, भालड़, रैलापाली, सैनार, स्याहटांडा, सरकार की आली, बजनियामाफी समेत 19 गांवों के किसान अब तक फसल क्षति के मुआवजा से वंचित हैं।
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उल्लेखनीय है कि गत 15 नवंबर को अल्मोड़ा पहुंचे मुख्यमंत्री हरीश रावत के सामने भी क्षेत्र पंचायत सदस्य आनंद सिंह कनवाल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने यह मुद्दा उठाया था। ग्रामीणों ने सीएम को बताया कि मुआवजे से वंचित गांवों के आसपास की ग्राम पंचायतों के प्रभावित काश्तकारों को मुआवजा मिल गया है, लेकिन खत्याड़ी क्षेत्र के काश्तकार ही मुआवजे से वंचित चल रहे हैं। मुख्यमंत्री को बताने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर क्षेत्र के काश्तकारों में शासन प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है।
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