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Almora News: डिजीटल के युग में ब्लैक एंड व्हाइट अल्ट्रासाउंड से जांच पड़ रही फीकी
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बागेश्वर। जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं पर किए जा रहे तमाम दावों के बीच जिला अस्पताल की एक ऐसी हकीकत सामने आई है जो सीधे-सीधे गरीब मरीजों की जेब और सेहत पर भारी पड़ रही है। आज के हाईटेक और डिजिटल दौर में भी जिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष में ब्लैक एंड व्हाइट मशीन के भरोसे मरीजों और खासकर गर्भवतियों की जांच की जा रही है।
आधुनिक चिकित्सा पद्धति में कई जटिल बीमारियों, ट्यूमर, नसों के ब्लॉकेज, दिल से जुड़ी समस्याओं और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में चिकित्सक अनिवार्य रूप से कलर डॉपलर कराने की सलाह देते हैं। ब्लैक एंड व्हाइट मशीन में रक्त के प्रवाह और बारीक नसों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती। जिला अस्पताल में इस आधुनिक तकनीक की सुविधा न होने के कारण लाचार मरीजों को नगर के निजी डायग्नोस्टिक केंद्रों का रुख करना पड़ता है जहां उन्हें एक जांच के लिए 1500 से लेकर 2500 रुपये तक की भारी-भरकम राशि खर्च करनी पड़ रही है। कई बार पैसों के अभाव में मरीज जांच टाल भी देते हैं।
अस्पताल में कलर डॉपलर अल्ट्रासाउंड मशीन की आवश्यकता को देखते हुए जल्द ही रेडियोलॉजिस्ट से वार्ता कर तकनीकी पहलुओं की जानकारी ली जाएगी। इसके तुरंत बाद मशीन की खरीद का एक औपचारिक प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। शासन से मंजूरी और मशीन मिलते ही इसे जिला अस्पताल में स्थापित कर दिया जाएगा जिससे गरीब मरीजों और गर्भवतियों को जांच के लिए बाहर न भटकना पड़े और उन्हें अस्पताल में सुविधा मिल सके। -डॉ. कुमार आदित्य तिवारी, सीएमओ बागेश्वर
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आधुनिक चिकित्सा पद्धति में कई जटिल बीमारियों, ट्यूमर, नसों के ब्लॉकेज, दिल से जुड़ी समस्याओं और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में चिकित्सक अनिवार्य रूप से कलर डॉपलर कराने की सलाह देते हैं। ब्लैक एंड व्हाइट मशीन में रक्त के प्रवाह और बारीक नसों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती। जिला अस्पताल में इस आधुनिक तकनीक की सुविधा न होने के कारण लाचार मरीजों को नगर के निजी डायग्नोस्टिक केंद्रों का रुख करना पड़ता है जहां उन्हें एक जांच के लिए 1500 से लेकर 2500 रुपये तक की भारी-भरकम राशि खर्च करनी पड़ रही है। कई बार पैसों के अभाव में मरीज जांच टाल भी देते हैं।
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अस्पताल में कलर डॉपलर अल्ट्रासाउंड मशीन की आवश्यकता को देखते हुए जल्द ही रेडियोलॉजिस्ट से वार्ता कर तकनीकी पहलुओं की जानकारी ली जाएगी। इसके तुरंत बाद मशीन की खरीद का एक औपचारिक प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। शासन से मंजूरी और मशीन मिलते ही इसे जिला अस्पताल में स्थापित कर दिया जाएगा जिससे गरीब मरीजों और गर्भवतियों को जांच के लिए बाहर न भटकना पड़े और उन्हें अस्पताल में सुविधा मिल सके। -डॉ. कुमार आदित्य तिवारी, सीएमओ बागेश्वर
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