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शराब के खिलाफ गांव गांव में अलख ज लाएंगी क्षेत्र की महिलाएं
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
Updated Sun, 27 Nov 2016 11:26 PM IST
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वलना गांव में शराब उन्मूलन की शपथ लेती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
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नशा हटाओ, पलायन रोको, पहाड़ बचाओ पद यात्रा वलना सहित आस पास के ग्रामीण इलाकों में भव्य स्वागत हुआ। भारी संख्या में पहुंची महिलाओं ने नशे के खिलाफ संघर्ष करने का संकल्प लिया। कहा कि शराब के खिलाफ महिलाएं गांव गांव में अलख जलाएंगी। इस मौके पर पलायन रोकने के लिए ठोस नीति बनाने की मांग उठाई गई।
यात्रा के संयोजक डा. प्रमोद नैनवाल ने कहा कि सरकारों की उपेक्षा के चलते पहाड़ खाली हो गए हैं। नशे के कारण पहाड़ के बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। वलना में हुई सभा में पहाड़ की तमाम समस्याओं पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि जिन उम्मीदों के साथ उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में आया था, वह अभी तक पूरी नहीं हुई।
सरकारों ने पहाड़ की भारी उपेक्षा कर दी है। उन्होंने कहा कि पलायन रोकने और शराब पर अंकुश लगाने के लिए अभी तक ठोस नीतियां नहीं बनाई गई हैं। खेती किसानी चौपट है। जंगली जानवरों के आतंक को रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं। सरकारों ने गांवों को बसाने की बातें तो की, लेकिन धरातल पर अमल नहीं किया है। इस मौके पर ग्रामीण महिलाओं में शराब के बढ़ते प्रचलन पर भारी आक्रोश देखा गया। कहा कि नशे के खिलाफ संघर्ष के लिए महिलाएं अलख जलाएंगी। शंकर ठाकुर, विनोद कुवार्बी सहित तमाम लोगों ने विचार रखे।
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यात्रा के संयोजक डा. प्रमोद नैनवाल ने कहा कि सरकारों की उपेक्षा के चलते पहाड़ खाली हो गए हैं। नशे के कारण पहाड़ के बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। वलना में हुई सभा में पहाड़ की तमाम समस्याओं पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि जिन उम्मीदों के साथ उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में आया था, वह अभी तक पूरी नहीं हुई।
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सरकारों ने पहाड़ की भारी उपेक्षा कर दी है। उन्होंने कहा कि पलायन रोकने और शराब पर अंकुश लगाने के लिए अभी तक ठोस नीतियां नहीं बनाई गई हैं। खेती किसानी चौपट है। जंगली जानवरों के आतंक को रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं। सरकारों ने गांवों को बसाने की बातें तो की, लेकिन धरातल पर अमल नहीं किया है। इस मौके पर ग्रामीण महिलाओं में शराब के बढ़ते प्रचलन पर भारी आक्रोश देखा गया। कहा कि नशे के खिलाफ संघर्ष के लिए महिलाएं अलख जलाएंगी। शंकर ठाकुर, विनोद कुवार्बी सहित तमाम लोगों ने विचार रखे।
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