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मानव जनित क्लाइमेट चेंज से पिघल रहे हैं ग्लेशियर
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अल्मोड़ा के माल रोड के समीप रानी नौले में पड़ी गंदगी। संवाद
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। हिमालय के ग्लेशियर पिघलने का कारण मानव जनित जलवायु परिवर्तन है। इससे जहां समुद्र में पानी बढ़ रहा है वहीं इंसानों के इस्तेमाल में आने वाला पानी कम होता जा रहा है। आने वाले समय में करोड़ों लोगों को पानी, खाना और ऊर्जा की कमी हो सकती है। यदि हिमालय को लेकर हम अब भी नहीं चेते तो भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। जैव विविधता पर मंडराता खतरा मानव अस्तित्व के लिए भी जोखिम पैदा कर रहा है। अमर उजाला के हिमालय बचाओ अभियान के तहत जीजीआईसी अल्मोड़ा में हुई गोष्ठी में वक्ताओं ने यह बात कही।
मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के आज दुष्परिणाम देखने को मिल रहे हैं। ग्लेशियर पिघल रहे हैं। मिट्टी का क्षरण हो रहा है। उत्पादन शक्ति घट रही है। हिमालय हमारा घर है। यदि हिमालय बचेगा तो हमारा गांव, प्रदेश देश बेचेगा। हिमालय को बचाने के लिए सभी को काम करना होगा। हमारी जिम्मेदारी इसलिए भी ज्यादा है कि हम हिमालय में रहते हैं। गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियां भी यहीं से निकलती हैं। हिमालय को हम कैसे बचाएं ये सबको समझना होगा। हिमालय में तीन लाख टन प्लास्टिक कूड़ा पड़ना चिंताजनक है। प्लास्टिक का प्रयोग न करने का संकल्प लेना होगा। हिमालय की हवा को शुद्ध रखने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने होंगे।
मुख्य वक्ता सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के वानिकी विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार यादव ने कहा कि पिछले 15 सालों में दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग के भयंकर दुष्परिणाम देखने को मिल रहे हैं। कार्बन डाईआक्साइड से हिमालय का पर्यावरण दूषित हो रहा है। यदि जंगल ही नहीं होंगे तो मिट्टी का कटाव होगा। जंगल बेहद जरूरी हैं। अवैज्ञानिक तरीके से जंगल काटे जा रहे हैं जो गंभीर चिंता का विषय है। यदि हम एक छोटा भी पत्ता तोड़ दें तो पर्यावरण को नुकसान पहुंचता पर लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। सतत विकास हो लेकिन पर्यावरण को भी खतरा नहीं पहुंचना चाहिए। हमको यह संकल्प लेना चाहिए कि हम पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। हिमालय और जंगल को बचाने के लिए एक पौध लगाने का संकल्प लेना होगा। हिमालय को बचाने में विद्यार्थी भी अपना योगदान दे सकते हैं।
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ग्रीन हिल्स संस्था की सचिव डॉ. वसुधा पंत ने कहा कि हिमालय सदियों से हमारी रक्षा करता आ रहा है पर आज हिमालय के हालात भी अच्छे नहीं हैं। यदि जंगल ही नहीं बचेंगे तो फिर हिमालय का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा। हिमालय से कई नदियां निकलती हैं। हिमालय हमें शुद्ध हवा देने के साथ ही मिट्टी आदि की सुरक्षा करता है। सभी का कर्तव्य है कि हिमालय की सुरक्षा में अपना योगदान दे। उन्होंने कहा कि बच्चे अपने जन्मदिन पर एक पौध लगाकर हिमालय की सुरक्षा में योगदान दे सकते हैं।
अध्यक्षता करते हुए विद्यालय की प्रधानाचार्या सावित्री टम्टा ने कहा कि पारिस्थितिक तंत्र खराब होने से कौवे, गौरेया आदि प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं। एक पेड़ काटने से पर्यावरण को कितना नुकसान होता है इस पर मंथन करना होगा। उन्होंने कहा कि हिमालय को बचाने के लिए हर छात्रा अपने घर में संचेतना फैला सकती है। घर से यह समाज में फैलेगी तो लोग खुद ब खुद जागरूक होंगे। संचालन पत्रकार रमेश जोशी ने किया।
बच्चों ने भी लिया हिमालय बचाने का संकल्प
अमर उजाला के हिमालय बचाओ अभियान से प्रेरित होकर हम भी अपने स्तर पर इसे बचाने में योगदान देंगे। हम खुद प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करेंगे साथ ही दूसरों को भी इसका प्रयोग नहीं करने के लिए प्रेरित करेंगे। प्लास्टिक का उपयोग को लेकर सभी को चिंतित होने की जरूरत है।
कोमल जोशी, कक्षा 11 जीजीआईसी अल्मोड़ा
हिमालय को बचाने के लिए हम अपने घरों के आसपास पौधे रोपेंगे। साथ ही अन्य लोगों को भी पौधरोपण करने के लिए प्रेरित करेंगे। हिमालय बचाओ अभियान में काफी जानकारियां मिलीं, इन पर हम अमल करेंगे। हिमालय रहेगा तो तभी हमारा अस्तित्व भी बचा रहेगा।
मीनाक्षी भोजक, कक्षा 11 जीजीआईसी अल्मोड़ा
संकल्प लेती हूं कि अपने जन्मदिन पर एक पौधा रोपकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दूंगी। यदि हिमालय ही खतरे में पड़ जाएगा तो फिर स्थिति भयावह हो सकती है। हिमालय बचाने के लिए हम अपने छोटे-छोटे प्रयास करेंगे।
संस्कृति बिष्ट, कक्षा 11 जीजीआईसी अल्मोड़ा
हिमालय को बचाने के लिए सभी को आगे आना होगा। हिमालय बचेगा तो तभी जीवन भी बचा रहेगा। हिमालय को बचाने के लिए हम लोगों को जागरूक करेंगे। साथ ही अपने छोटे-छोटे प्रयास भी जारी रखेंगे। जंगलों का अंधाधुंध कटान रोकना होगा।
खीला आर्या, कक्षा 12 जीजीआईसी अल्मोड़ा
गोष्ठी में जो भी हमें बताया गया है कि उस पर पूरा अमल करेंगे। छोटे-छोटे प्रयासों से हम भी हिमालय को बचाने में अपना योगदान देंगे। अपने परिवार, गांव, मोहल्ला के लोगों को भी इसके लिए जागरूक करेंगे। हिमालय को बनाने के लिए एक ठोस कार्ययोजना बनाने की जरूरत है।
हिमालय संकल्प
रानी नौले का किया जाएगा संरक्षण
अल्मोड़ा। अमर उजाला हिमालय बचाओ अभियान के तहत जीजीआईसी अल्मोड़ा में हुए कार्यक्रम में माल रोड के समीप रानी नौले के संरक्षण का संकल्प लिया गया। बारिश के चलते रानी नौला मलबा से पटा है। आसपास बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने कहा कि रानी नौला की सफाई की जाएगी। नौले का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। बरसात में नौले के पास बह कर आई गंदगी, मलबे की सफाई की जाएगी। इसके आसपास उड़ी झाड़ियों का भी कटान कराया जाएगा। पालिका शहर के अन्य नौलों का भी संरक्षण कर रही है।
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मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के आज दुष्परिणाम देखने को मिल रहे हैं। ग्लेशियर पिघल रहे हैं। मिट्टी का क्षरण हो रहा है। उत्पादन शक्ति घट रही है। हिमालय हमारा घर है। यदि हिमालय बचेगा तो हमारा गांव, प्रदेश देश बेचेगा। हिमालय को बचाने के लिए सभी को काम करना होगा। हमारी जिम्मेदारी इसलिए भी ज्यादा है कि हम हिमालय में रहते हैं। गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियां भी यहीं से निकलती हैं। हिमालय को हम कैसे बचाएं ये सबको समझना होगा। हिमालय में तीन लाख टन प्लास्टिक कूड़ा पड़ना चिंताजनक है। प्लास्टिक का प्रयोग न करने का संकल्प लेना होगा। हिमालय की हवा को शुद्ध रखने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने होंगे।
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मुख्य वक्ता सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के वानिकी विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार यादव ने कहा कि पिछले 15 सालों में दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग के भयंकर दुष्परिणाम देखने को मिल रहे हैं। कार्बन डाईआक्साइड से हिमालय का पर्यावरण दूषित हो रहा है। यदि जंगल ही नहीं होंगे तो मिट्टी का कटाव होगा। जंगल बेहद जरूरी हैं। अवैज्ञानिक तरीके से जंगल काटे जा रहे हैं जो गंभीर चिंता का विषय है। यदि हम एक छोटा भी पत्ता तोड़ दें तो पर्यावरण को नुकसान पहुंचता पर लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। सतत विकास हो लेकिन पर्यावरण को भी खतरा नहीं पहुंचना चाहिए। हमको यह संकल्प लेना चाहिए कि हम पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। हिमालय और जंगल को बचाने के लिए एक पौध लगाने का संकल्प लेना होगा। हिमालय को बचाने में विद्यार्थी भी अपना योगदान दे सकते हैं।
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ग्रीन हिल्स संस्था की सचिव डॉ. वसुधा पंत ने कहा कि हिमालय सदियों से हमारी रक्षा करता आ रहा है पर आज हिमालय के हालात भी अच्छे नहीं हैं। यदि जंगल ही नहीं बचेंगे तो फिर हिमालय का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा। हिमालय से कई नदियां निकलती हैं। हिमालय हमें शुद्ध हवा देने के साथ ही मिट्टी आदि की सुरक्षा करता है। सभी का कर्तव्य है कि हिमालय की सुरक्षा में अपना योगदान दे। उन्होंने कहा कि बच्चे अपने जन्मदिन पर एक पौध लगाकर हिमालय की सुरक्षा में योगदान दे सकते हैं।
अध्यक्षता करते हुए विद्यालय की प्रधानाचार्या सावित्री टम्टा ने कहा कि पारिस्थितिक तंत्र खराब होने से कौवे, गौरेया आदि प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं। एक पेड़ काटने से पर्यावरण को कितना नुकसान होता है इस पर मंथन करना होगा। उन्होंने कहा कि हिमालय को बचाने के लिए हर छात्रा अपने घर में संचेतना फैला सकती है। घर से यह समाज में फैलेगी तो लोग खुद ब खुद जागरूक होंगे। संचालन पत्रकार रमेश जोशी ने किया।
बच्चों ने भी लिया हिमालय बचाने का संकल्प
अमर उजाला के हिमालय बचाओ अभियान से प्रेरित होकर हम भी अपने स्तर पर इसे बचाने में योगदान देंगे। हम खुद प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करेंगे साथ ही दूसरों को भी इसका प्रयोग नहीं करने के लिए प्रेरित करेंगे। प्लास्टिक का उपयोग को लेकर सभी को चिंतित होने की जरूरत है।
कोमल जोशी, कक्षा 11 जीजीआईसी अल्मोड़ा
हिमालय को बचाने के लिए हम अपने घरों के आसपास पौधे रोपेंगे। साथ ही अन्य लोगों को भी पौधरोपण करने के लिए प्रेरित करेंगे। हिमालय बचाओ अभियान में काफी जानकारियां मिलीं, इन पर हम अमल करेंगे। हिमालय रहेगा तो तभी हमारा अस्तित्व भी बचा रहेगा।
मीनाक्षी भोजक, कक्षा 11 जीजीआईसी अल्मोड़ा
संकल्प लेती हूं कि अपने जन्मदिन पर एक पौधा रोपकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दूंगी। यदि हिमालय ही खतरे में पड़ जाएगा तो फिर स्थिति भयावह हो सकती है। हिमालय बचाने के लिए हम अपने छोटे-छोटे प्रयास करेंगे।
संस्कृति बिष्ट, कक्षा 11 जीजीआईसी अल्मोड़ा
हिमालय को बचाने के लिए सभी को आगे आना होगा। हिमालय बचेगा तो तभी जीवन भी बचा रहेगा। हिमालय को बचाने के लिए हम लोगों को जागरूक करेंगे। साथ ही अपने छोटे-छोटे प्रयास भी जारी रखेंगे। जंगलों का अंधाधुंध कटान रोकना होगा।
खीला आर्या, कक्षा 12 जीजीआईसी अल्मोड़ा
गोष्ठी में जो भी हमें बताया गया है कि उस पर पूरा अमल करेंगे। छोटे-छोटे प्रयासों से हम भी हिमालय को बचाने में अपना योगदान देंगे। अपने परिवार, गांव, मोहल्ला के लोगों को भी इसके लिए जागरूक करेंगे। हिमालय को बनाने के लिए एक ठोस कार्ययोजना बनाने की जरूरत है।
हिमालय संकल्प
रानी नौले का किया जाएगा संरक्षण
अल्मोड़ा। अमर उजाला हिमालय बचाओ अभियान के तहत जीजीआईसी अल्मोड़ा में हुए कार्यक्रम में माल रोड के समीप रानी नौले के संरक्षण का संकल्प लिया गया। बारिश के चलते रानी नौला मलबा से पटा है। आसपास बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने कहा कि रानी नौला की सफाई की जाएगी। नौले का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। बरसात में नौले के पास बह कर आई गंदगी, मलबे की सफाई की जाएगी। इसके आसपास उड़ी झाड़ियों का भी कटान कराया जाएगा। पालिका शहर के अन्य नौलों का भी संरक्षण कर रही है।

अल्मोड़ा में हिमालय बचाओ अभियान के तहत हुई गोष्ठी में मौजूद जीजीआईसी की छात्राएं। संवाद- फोटो : ALMORA

अल्मोड़ा में हिमालय बचाओ अभियान गोष्ठी में अपने विचार रखते पालिका अध्यक्ष पीसी जोशी। संवाद- फोटो : ALMORA