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जापानी तकनीक फॉरेस्ट बॉथ से रूबरू हुए स्कूली छात्र-छात्राएं
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कार्यशाला में फॉरेस्ट बॉथ की जानकारी प्राप्त करते विद्यार्थी।
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। वसुंधरा पर्यावरण संरक्षण, जन कल्याण समिति की ओर से पांच दिवसीय स्वास्थ्य शिक्षा कार्यशाला आयोजित की गई। इसके समापन पर छात्र-छात्राओं को जापानी तकनीक फॉरेस्ट बॉथ की जानकारी दी गई।
गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल के वैज्ञानिक डॉ. विक्रम सिंह नेगी ने पादप जैवविविधता के तत्व औषधीय पादप, जंगली खाद्य पादप, पारंपरिक अनाज के बारे में बताया। स्वास्थ्य लाभ में इनकी उपयोगिता की जानकारी दी।
संस्थान से जुड़े डॉ. रवींद्र जोशी ने स्वास्थ्य और विज्ञान साक्षरता के मूलभूत पहलुओं के बारे में बताया। उन्होंने बीमारियों के कारक और उनकी रोकथाम के तरीके बताए। डॉ. महेंद्र सिंह ने कोविड-19 के कारण और उसके रोकथाम के उपाय बताए।
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समिति के हिमांशु जोशी ने ठोस अपशिष्ट पदार्थों के प्रबंधन के तरीके बताए। उन्होंने स्वच्छ जल का उपयोग करने के लिए कहा। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को पर्यावरण संस्थान के सूर्य-कुंज स्थित हर्बल गार्डन का भ्रमण कराया गया।
जहां औषधीय पादपों और उनकी स्वास्थ्य लाभ में उपयोगिता पर जानकारी दी गई। इस दौरान प्रतिभागियों को फॉरेस्ट बॉथ (एक जापानी पद्धति शिन-रिन योकू) जो कि प्रकृति से जुड़कर अपने मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने की तकनीक का अभ्यास कराया।
पर्यावरण संस्थान के शोधार्थी कुलदीप जोशी ने फोटोग्राफी के माध्यम से स्वास्थ्य, विज्ञान प्रसार के तरीकों को साझा किया। पूर्व सीएमओ डॉ. आरएस साही ने पौथोजॉली विज्ञान और तकनीक बताई। वहां विक्रम नेगी, अजय सिंह मेहता, रवि पाठक समेत हवालबाग, उडियारी, ज्योली, पांखुड़ा के छात्र-छात्रा मौजूद थे।
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गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल के वैज्ञानिक डॉ. विक्रम सिंह नेगी ने पादप जैवविविधता के तत्व औषधीय पादप, जंगली खाद्य पादप, पारंपरिक अनाज के बारे में बताया। स्वास्थ्य लाभ में इनकी उपयोगिता की जानकारी दी।
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संस्थान से जुड़े डॉ. रवींद्र जोशी ने स्वास्थ्य और विज्ञान साक्षरता के मूलभूत पहलुओं के बारे में बताया। उन्होंने बीमारियों के कारक और उनकी रोकथाम के तरीके बताए। डॉ. महेंद्र सिंह ने कोविड-19 के कारण और उसके रोकथाम के उपाय बताए।
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समिति के हिमांशु जोशी ने ठोस अपशिष्ट पदार्थों के प्रबंधन के तरीके बताए। उन्होंने स्वच्छ जल का उपयोग करने के लिए कहा। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को पर्यावरण संस्थान के सूर्य-कुंज स्थित हर्बल गार्डन का भ्रमण कराया गया।
जहां औषधीय पादपों और उनकी स्वास्थ्य लाभ में उपयोगिता पर जानकारी दी गई। इस दौरान प्रतिभागियों को फॉरेस्ट बॉथ (एक जापानी पद्धति शिन-रिन योकू) जो कि प्रकृति से जुड़कर अपने मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने की तकनीक का अभ्यास कराया।
पर्यावरण संस्थान के शोधार्थी कुलदीप जोशी ने फोटोग्राफी के माध्यम से स्वास्थ्य, विज्ञान प्रसार के तरीकों को साझा किया। पूर्व सीएमओ डॉ. आरएस साही ने पौथोजॉली विज्ञान और तकनीक बताई। वहां विक्रम नेगी, अजय सिंह मेहता, रवि पाठक समेत हवालबाग, उडियारी, ज्योली, पांखुड़ा के छात्र-छात्रा मौजूद थे।