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कोरोना काल में नौकरी गंवाई, ऐपण के जरिए जिंदगी फिर पटरी पर लौट आई
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बनाए गए ऐपणों के साथ इंद्रा अधिकारी। संवाद
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा(राजेंद्र धानक)। कोरोनाकाल में नौकरी चले जाने पर भी इंद्रा अधिकारी ने हिम्मत नहीं हारी। बेरोजगार इंद्रा ने लोक कला ऐपण को ही रोजगार का जरिया बना लिया। मेहनत रंग लाई और अब उन्हें इससे अच्छी आमदनी हो रही है। उन्होंने कलारंभ आर्ट्स नाम से अपना संगठन बनाकर 30 से अधिक महिलाओं को रोजगार भी दिया है। लोगों को ऐपण कला का प्रशिक्षण भी दे रही हैं। उनके द्वारा बनाए ऐपण उत्तराखंड के साथ ही दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, लखनऊ, मुंबई, पंजाब समेत अन्य शहरों में बिक रहे हैं।
नगर के दुगालखोला निवासी इंद्रा अधिकारी दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करती थीं। कोरोनाकाल में उनकी नौकरी चली गई। बेरोजगार होकर पहाड़ लौटी इंद्रा ने हिम्मत नहीं हारी और ऐपण लोककला को रोजगार का माध्यम बनाया। इंद्रा ने बताया कि बचपन में उन्होंने अपनी दादी मां से ऐपण कला की बारीकियां सीखीं। बेटी की रुचि देखकर पिता गोविंद अधिकारी ने उन्हें ऐपण, चित्रकला को कागज, दीवारों पर उकेरने की सलाह दी। कला के प्रति दीवानगी बढ़ने पर उन्होंने चित्रकला विषय में एमए की पढ़ाई की।
ऐपणों में आधुनिक कला का समावेश कर दे रही नया लुक
अल्मोड़ा। इंद्रा ने बताया कि अब तक उन्होंने सभी प्रकार की ऐपण चौकियां, लक्ष्मी यंत्र, गणेश, सरस्वती, शिव - पीठ, वर-वधू, नामकरण, ज्योतिपट्टा समेत देहलियों के विभिन्न प्रकार के ऐपण बनाए हैं। उन्होंने बताया कि अब तक बनाए गए ऐपणों में पारंपरिक रूप यंत्रों के साथ-साथ आधुनिक कला का समावेश भी किया गया है ताकि बाहरी लोग ज्यादा आकर्षित हो सके। इंद्रा दिल्ली हाट समेत नैनीताल, नोएडा के प्राइवेट संस्थानों में प्रदर्शनी लगा चुकी हैं। बताया कि ऐपणों की कीमतें 500 से पांच हजार तक हैं। (संवाद)
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नगर के दुगालखोला निवासी इंद्रा अधिकारी दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करती थीं। कोरोनाकाल में उनकी नौकरी चली गई। बेरोजगार होकर पहाड़ लौटी इंद्रा ने हिम्मत नहीं हारी और ऐपण लोककला को रोजगार का माध्यम बनाया। इंद्रा ने बताया कि बचपन में उन्होंने अपनी दादी मां से ऐपण कला की बारीकियां सीखीं। बेटी की रुचि देखकर पिता गोविंद अधिकारी ने उन्हें ऐपण, चित्रकला को कागज, दीवारों पर उकेरने की सलाह दी। कला के प्रति दीवानगी बढ़ने पर उन्होंने चित्रकला विषय में एमए की पढ़ाई की।
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ऐपणों में आधुनिक कला का समावेश कर दे रही नया लुक
अल्मोड़ा। इंद्रा ने बताया कि अब तक उन्होंने सभी प्रकार की ऐपण चौकियां, लक्ष्मी यंत्र, गणेश, सरस्वती, शिव - पीठ, वर-वधू, नामकरण, ज्योतिपट्टा समेत देहलियों के विभिन्न प्रकार के ऐपण बनाए हैं। उन्होंने बताया कि अब तक बनाए गए ऐपणों में पारंपरिक रूप यंत्रों के साथ-साथ आधुनिक कला का समावेश भी किया गया है ताकि बाहरी लोग ज्यादा आकर्षित हो सके। इंद्रा दिल्ली हाट समेत नैनीताल, नोएडा के प्राइवेट संस्थानों में प्रदर्शनी लगा चुकी हैं। बताया कि ऐपणों की कीमतें 500 से पांच हजार तक हैं। (संवाद)
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