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खेत हो रहे बंजर, गांव हो रहे बंजर
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Mon, 17 Oct 2016 11:16 PM IST
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गांव बचाव यात्रा में शामिल लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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हिमालय यूनिटी मिशन (हम) की गांव बचाओ यात्रा का फल्दाकोट पट्टी के मंडलकोट धूराफाट क्षेत्र में भव्य स्वागत हुआ। यात्रा में क्षेत्र से भारी संख्या में ग्रामीणों ने शिरकत की। पद्मश्री डा. अनिल जोशी ने कहा राजनीतिक दलों की उपेक्षा के चलते जहां 86 सौ गांव खाली हो गए हैं, वहीं लोगों को क्षेत्र और जाति के आधार पर बांटा जा रहा है। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में सभी गांव आबाद हैं, लेकिन उत्तराखंड के गांवों की खेती बंजर होने की कगार पर है।
गांव बचाओ यात्रा ताड़ीखेत ब्लॉक के सुदूरवर्ती मंडलकोट पहुंची। यहां धूराफाट, चौगांव पट्टी और कंडारखुवा के सैकड़ों ग्रामीणों ने यात्रा का स्वागत किया। यात्रा को संबोधित करते हुए डा. अनिल जोशी ने कहा कि सरकारों को गांवों की याद सिर्फ चुनाव के वक्त आती है। अब चुनाव आने वाले हैं, ग्रामीणों को पहले जनप्रतिनिधियों से पिछले पांच सालों के विकास का हिसाब पूछना चाहिए। राज्य बनाने के पीछे समानांतर विकास की अवधारणा थी, लेकिन 16 सालों में प्रदेश के पहाड़ खाली हो चुके हैं। अब तक 86 सौ से अधिक गांव खाली हो गए हैं। ग्रामीण फल, सब्जी उत्पादन कर अच्छी आजीविका चला रहे हैं।
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उत्तराखंड में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की समस्याएं मुंह बाएं खड़ी हैं। पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं, इसका सबसे अधिक असर महिलाओं पर पड़ा है। जंगली जानवरों के आतंक के कारण सोना उगलने वाले खेत बंजर होने की कगार पर हैं, लेकिन सरकारों का ध्यान शराब, खनन के माध्यम से राजस्व जुटाने का है। होप संस्था के सचिव प्रकाश जोशी, प्रकाश करायत आदि ने कहा कि जल, जंगल, जमीन के लिए राज्य की लड़ाई लड़ी, लेकिन आज पट्टे के अधिकार तक नहीं है। यात्रा में क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे। कई ग्रामीणों ने अपने अपने गांवों की वर्तमान हालत बयां की।
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