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जिले के किसानों को अब 80 फीसदी अनुदान पर मिलेंगे कृषि यंत्र
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अल्मोड़ा। किसानों और प्रवासियों के लिए अच्छी खबर है। कृषि विभाग की ओर से किसानों को विक्रय किए जाने वाले कृषि उपकरणों में 50 फीसदी के बजाए अब 80 फीसदी छूट मिलेगी।
कृषि विभाग किसानों को अब तक पचास फीसदी अनुदान पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराता था। जिनमें पावर वीडर, पावर टिलर, पावर स्पेयर, जल पंप, लौह स्याही हल, गेंती, फावड़ा, कुदाल, ब्रश कटर आदि कृषि उपकरण शामिल हैं। घाटी वाले क्षेत्रों और सुविधाजनक स्थानों पर किसान आधुनिक कृषि यंत्रों से खेती करते हैं। कोरोना काल में मैदानी इलाकों में रोजगार करने वाले लोग काफी संख्या में घरों को लौटे हैं। जिला प्रशासन की पहल पर कृषि विभाग अब ग्रामीणों और प्रवासियों को अस्सी फीसदी छूट पर कृषि उपकरण उपलब्ध कराने जा रहा है।
मुख्य कृषि अधिकारी प्रियंका सिंह ने बताया कि डीएम नितिन सिंह भदौरिया के निर्देश पर जिला योजना के माध्यम से किसानों को अब पचास फीसदी के बजाए अस्सी फीसदी छूट पर कृषि यंत्र विभाग उपलब्ध कराएगा। किसानों को कृषि यंत्र खरीदने के लिए कुल लागत का बीस फीसदी ही खर्च करना होगा।
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कृषि यंत्रों की बिक्री बीस प्रतिशत तक बढ़ी
अल्मोड़ा। कोरोना काल में घर लौटे प्रवासियों की ओर से गांवों में खेती की जा रही है। इससे कृषि यंत्रों की मांग में भी बीस फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मुख्य कृषि अधिकारी प्रियंका सिंह ने बताया कि कोरोना काल में घर लौटे कई प्रवासी खेती कर रहे हैं, जिससे कृषि यंत्रों की खरीद बढ़ी है।
दो से तीन लोग एक खेत से दूसरे खेत में पहुंचाते हैं कृषि उपकरण
धौलछीना। पर्वतीय क्षेत्र में सीढ़ीदार खेतों में किसान खेती करते हैं। हालांकि अब काफी संख्या में किसान आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करने लगे हैं। आर्थिक रूप से सक्षम किसान पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए बनाए गए ट्रैक्टर से खेतों की जुताई करते हैं। करीब एक क्विंटल वजन के इन कृषि यंत्रों को दो लोगों की मदद से दूसरे खेत तक पहुंचाते हैं। पल्यू ग्राम पंचायत के काश्तकार प्रेम राम का कहना है कि सीढ़ीदार खेत अलग-अलग लोगों के होते हैं। एक खेत से दूर दूसरे खेत तक इन कृषि यंत्रों को पहुंचाने में अन्य लोगों की फसल और घास को भी नुकसान पहुंचता है। दियारी गांव के काश्तकार जीवन सिंह कहते हैं कि कम वजनी कृषि यंत्र बनाए जाएं तो यह किसानों के लिए और अधिक लाभकारी हो सकते हैं।
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कृषि विभाग किसानों को अब तक पचास फीसदी अनुदान पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराता था। जिनमें पावर वीडर, पावर टिलर, पावर स्पेयर, जल पंप, लौह स्याही हल, गेंती, फावड़ा, कुदाल, ब्रश कटर आदि कृषि उपकरण शामिल हैं। घाटी वाले क्षेत्रों और सुविधाजनक स्थानों पर किसान आधुनिक कृषि यंत्रों से खेती करते हैं। कोरोना काल में मैदानी इलाकों में रोजगार करने वाले लोग काफी संख्या में घरों को लौटे हैं। जिला प्रशासन की पहल पर कृषि विभाग अब ग्रामीणों और प्रवासियों को अस्सी फीसदी छूट पर कृषि उपकरण उपलब्ध कराने जा रहा है।
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मुख्य कृषि अधिकारी प्रियंका सिंह ने बताया कि डीएम नितिन सिंह भदौरिया के निर्देश पर जिला योजना के माध्यम से किसानों को अब पचास फीसदी के बजाए अस्सी फीसदी छूट पर कृषि यंत्र विभाग उपलब्ध कराएगा। किसानों को कृषि यंत्र खरीदने के लिए कुल लागत का बीस फीसदी ही खर्च करना होगा।
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कृषि यंत्रों की बिक्री बीस प्रतिशत तक बढ़ी
अल्मोड़ा। कोरोना काल में घर लौटे प्रवासियों की ओर से गांवों में खेती की जा रही है। इससे कृषि यंत्रों की मांग में भी बीस फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मुख्य कृषि अधिकारी प्रियंका सिंह ने बताया कि कोरोना काल में घर लौटे कई प्रवासी खेती कर रहे हैं, जिससे कृषि यंत्रों की खरीद बढ़ी है।
दो से तीन लोग एक खेत से दूसरे खेत में पहुंचाते हैं कृषि उपकरण
धौलछीना। पर्वतीय क्षेत्र में सीढ़ीदार खेतों में किसान खेती करते हैं। हालांकि अब काफी संख्या में किसान आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करने लगे हैं। आर्थिक रूप से सक्षम किसान पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए बनाए गए ट्रैक्टर से खेतों की जुताई करते हैं। करीब एक क्विंटल वजन के इन कृषि यंत्रों को दो लोगों की मदद से दूसरे खेत तक पहुंचाते हैं। पल्यू ग्राम पंचायत के काश्तकार प्रेम राम का कहना है कि सीढ़ीदार खेत अलग-अलग लोगों के होते हैं। एक खेत से दूर दूसरे खेत तक इन कृषि यंत्रों को पहुंचाने में अन्य लोगों की फसल और घास को भी नुकसान पहुंचता है। दियारी गांव के काश्तकार जीवन सिंह कहते हैं कि कम वजनी कृषि यंत्र बनाए जाएं तो यह किसानों के लिए और अधिक लाभकारी हो सकते हैं।