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हींग, केसर की खेती कर किसान बदल सकते हैं तकदीर : संजय
Wed, 21 Feb 2024 11:08 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Wed, 21 Feb 2024 11:08 PM IST
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अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) के प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र हवालबाग में आयोजित किसान मेले में पर्वतीय कृषि से संबंधित जानकारी दी गई। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों की विभिन्न समस्याओं का त्वरित समाधान किया। मुख्य अतिथि कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल नई दिल्ली के अध्यक्ष डाॅ. संजय कुमार ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र में किसान हींग, केसर एवं जंगली गेंदा की खेती कर आर्थिकी में सुधार कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि संस्थान की श्री अन्न प्रसंस्करण इकाई में मंडुआ, कुट्टु आदि स्थानीय फसलों का उपयोग कर नूडल्स, नमकीन आदि बनाकर इन पौष्टिक अनाजों को स्वास्थ्यवर्धक और पसंदीदा भी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसानों को कृषि कार्य में नई- नई तकनीकों को अपनाना चाहिए। अध्यक्षता करते हुए सांसद अजय टम्टा ने कहा कि संस्थान ने पर्वतीय क्षेत्र में कृषि को आगे बढ़ाने के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया है। विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद निदेशक डाॅ. संजय कुमार ने कहा कि फसल प्रौद्योगिकियों के साथ ही पशुपालन में भी शोध की आवश्यकता है ताकि किसानों की आय वृद्धि के साथ ही मानव के लिए पौष्टिक दूध उपलब्धता एवं भूमि उर्वरता सुनिश्चित की जा सके।
संस्थान के निदेशक डाॅ. लक्ष्मीकांत ने पर्वतीय कृषि के क्षेत्र में संस्थान की ओर से किए गए शोध कार्यों तथा विकसित तकनीकों की जानकारी दी। वहां जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील नौटियाल, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष कैलाश शर्मा ने विचार रखे। डाॅ. निर्मल कुमार हेडाऊ ने आभार जताया। संचालन डाॅ. आशीष कुमार सिंह, डाॅ. कुशाग्रा जोशी ने किया। संवाद
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संस्थान की विभिन्न प्रजातियों का किया लोकार्पण
अल्मोड़ा। किसान मेले में संस्थान की प्रजातियों नामतः मक्का की वीएल वीटा, मडुआ की वीएल मडुआ 408, धान की वीएल बारीक धान का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही संस्थान के प्रकाशनों नामतः पर्वतीय कृषि दर्पण एवं संस्थान की गतिविधियों से संबंधित केलेंडर का विमोचन किया गया। संवाद
पांच प्रगतिशील किसान सम्मानित
अस्मोड़ा। किसान मेले में प्रगतिशील किसान लक्ष्मण सिंह बोरा, किरन टम्टा, नीरज सिंह राणा, श्याम सिंह, राजेंद्र कोरंगा को पुरस्कृत किया गया। साथ ही संस्थान में चल रही जनजातीय उप-योजना के तहत विभिन्न कृषक समूहों, किसानों को पावर वीडर, नैपसेक स्प्रेयर, लघु कृषि यंत्र वितरित किए गए। संवाद
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उन्होंने कहा कि संस्थान की श्री अन्न प्रसंस्करण इकाई में मंडुआ, कुट्टु आदि स्थानीय फसलों का उपयोग कर नूडल्स, नमकीन आदि बनाकर इन पौष्टिक अनाजों को स्वास्थ्यवर्धक और पसंदीदा भी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसानों को कृषि कार्य में नई- नई तकनीकों को अपनाना चाहिए। अध्यक्षता करते हुए सांसद अजय टम्टा ने कहा कि संस्थान ने पर्वतीय क्षेत्र में कृषि को आगे बढ़ाने के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया है। विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद निदेशक डाॅ. संजय कुमार ने कहा कि फसल प्रौद्योगिकियों के साथ ही पशुपालन में भी शोध की आवश्यकता है ताकि किसानों की आय वृद्धि के साथ ही मानव के लिए पौष्टिक दूध उपलब्धता एवं भूमि उर्वरता सुनिश्चित की जा सके।
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संस्थान के निदेशक डाॅ. लक्ष्मीकांत ने पर्वतीय कृषि के क्षेत्र में संस्थान की ओर से किए गए शोध कार्यों तथा विकसित तकनीकों की जानकारी दी। वहां जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील नौटियाल, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष कैलाश शर्मा ने विचार रखे। डाॅ. निर्मल कुमार हेडाऊ ने आभार जताया। संचालन डाॅ. आशीष कुमार सिंह, डाॅ. कुशाग्रा जोशी ने किया। संवाद
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संस्थान की विभिन्न प्रजातियों का किया लोकार्पण
अल्मोड़ा। किसान मेले में संस्थान की प्रजातियों नामतः मक्का की वीएल वीटा, मडुआ की वीएल मडुआ 408, धान की वीएल बारीक धान का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही संस्थान के प्रकाशनों नामतः पर्वतीय कृषि दर्पण एवं संस्थान की गतिविधियों से संबंधित केलेंडर का विमोचन किया गया। संवाद
पांच प्रगतिशील किसान सम्मानित
अस्मोड़ा। किसान मेले में प्रगतिशील किसान लक्ष्मण सिंह बोरा, किरन टम्टा, नीरज सिंह राणा, श्याम सिंह, राजेंद्र कोरंगा को पुरस्कृत किया गया। साथ ही संस्थान में चल रही जनजातीय उप-योजना के तहत विभिन्न कृषक समूहों, किसानों को पावर वीडर, नैपसेक स्प्रेयर, लघु कृषि यंत्र वितरित किए गए। संवाद