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कोसी बैराज की खामियों का अध्ययन करेगी विशेषज्ञों की टीम

Mon, 09 May 2016 10:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा। Updated Mon, 09 May 2016 10:47 PM IST
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The team of experts will study the shortcomings of the Kosi barrage
जेसीबी - फोटो : अमर उजाला
बारिश का सीजन शुरू होने से पहले ही जिस तरह कोसी बैराज में भारी मात्रा में मलबा और गाद आदि जमा हो गई है, उससे प्रशासन के अधिकारी भी चिंतित हैं। इससे बैराज की उपयोगिता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि सिंचाई विभाग के अधिकारी सब कुछ सामान्य बता रहे हैं, लेकिन पता चला है कि बैराज में आ रही खामियों का अध्ययन करने के लिए रुड़की से विशेषज्ञों की टीम को बुलाया गया है। यह टीम शीघ्र अल्मोड़ा पहुंचकर बैराज का निरीक्षण करेगी। 
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अल्मोड़ा और आसपास के क्षेत्रों में पानी की कमी को स्थायी तौर पर दूर करने के लिए कोसी में बैराज का निर्माण किया गया था। यह माना जा रहा था कि बैराज बन जाने से अल्मोड़ा और आसपास के क्षेत्रों में पानी की कोई कमी नहीं रहेगी, लेकिन तीन दिन पहले कोसी से ऊपर हुई तेज बारिश से जिस तरह से बैराज के बड़े हिस्से में काफी मलबा, झाड़ियां और गाद आदि जमा हो गईं, उससे इस बैराज की उपयोगिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 
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हालांकि सिंचाई विभाग के अधिकारी बैराज को पूरी तरह से फिट बता रहे हैं, लेकिन सूत्रों के मुताबिक बैराज के गेटों को खोलने और बंद करने में कुछ दिक्कत आ रही है। ऐसे में इमरजेंसी होने पर गेट तुरंत नहीं खुल पाए तो खतरे की स्थिति भी आ सकती है। बताया गया है कि इन आशंकाओं को देखते हुए ही प्रशासन ने रुड़की से इंजीनियरों की टीम को अल्मोड़ा बुलाया है। एसडीएम विवेक राय ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम रुड़की से रवाना हो चुकी है। टीम बैराज का मुआयना करके अपने सुझाव देगी और उसके मुताबिक आगे काम किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी तरह की दिक्कत नहीं आए। 
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झील के अस्तित्व को लेकर भी उठ रहे सवाल 
अल्मोड़ा। सिंचाई विभाग ने कोसी में झील के अस्तित्व में आने के बाद पर्यटकों के लिए नौकायन की सुविधा की भी योजना बनाई है, लेकिन बैराज में जिस तरह की दिक्कतें आ रही हैं, उससे झील के अस्तित्व को लेकर भी संशय होने लगा है। वैसे भी बारिश के मौसम में नदी में इतना तेज बहाव रहता है कि उन दिनों झील में नौकायन संभव नहीं हो सकता है। क्योंकि बारिश के मौसम में सभी गेटों को खोलकर ही रखना पड़ेगा। उसके बाद गर्मियों और जाड़े के मौसम में भी नौकायन तभी संभव हो पाएगा, जब जल संस्थान के पंप हाउस को ऊपर की तरफ शिफ्ट करके बैराज का जलस्तर बढ़ाया जाए। जलस्तर बढ़े बगैर यह नदी झील का रूप नहीं ले पाएगी। 
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