बर्खास्तगी के बाद भी 11 साल तक रहे हिल्ट्रान के जीएम
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हिल्ट्रान के महाप्रबंधक भरत सिन्हा ने सेवा से बर्खास्तगी के आदेश के करीब 11 साल बाद तक अपने पद पर काम करते रहे। सेवा से बर्खास्तगी के खिलाफ हाईकोर्ट में उनकी याचिका वर्ष 2004 में खारिज हो गई थी। वर्ष 2011 में फिर तत्कालीन प्रबंध निदेशक ने उन्हें सेवा से बर्खास्त किया, लेकिन कुछ ही दिनों में दोबारा स्टे मिल गया। मार्च 2012 में हाईकोर्ट नैनीताल से स्टे खारिज हो जाने के बावजूद महाप्रबंधक भरत सिन्हा 2015 तक महाप्रबंधक पद पर कार्य करते रहे। अब राज्य सूचना आयुक्त सुरेंद्र सिंह रावत ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग उत्तराखंड शासन को दोषियों के खिलाफ कार्यवाही कर जानकारी देने का आदेश दिया है।
सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के मुताबिक हिल्ट्रान के महाप्रबंधक भरत सिन्हा 1990-91 के दौरान लंबे समय तक सेवा से गैरहाजिर रहे और सेवा में लापरवाही की जांच के बाद तत्कालीन अधिशासी निदेशक ने उन्हें 11 मई 1991 को सेवा से पदच्युत (बर्खास्त) किया। अधिशासी निदेशक के इस आदेश के विरुद्ध भरत सिन्हा को 1992 में इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्टे मिल गया, लेकिन 2004 में हाईकोर्ट ने भरत सिन्हा की याचिका खारिज कर दी। याचिका खारिज हो जाने के बावजूद भरत सिन्हा 2011 तक अपने पद पर कार्य करते रहे। उसके बाद जून 2011 में तत्कालीन प्रबंध निदेशक विजय कुमार ढौंडियाल ने हाईकोर्ट के छह जून 2004 के आदेश का संज्ञान लेते हुए 10 जून 2011 को महाप्रबंधक भरत सिन्हा को सेवा से बर्खास्त कर दिया। उन्होंने गैर वैधानिक तरीके से लंबे समय तक पद पर बने रहने पर वसूली की कार्रवाई के भी आदेश दिए।
भरत सिन्हा को 23 अगस्त 2011 को प्रबंध निदेशक के बर्खास्तगी के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट इलाहाबाद से स्थगनादेश मिल गया और उन्हें हिल्ट्रान में ज्वाइन करा दिया गया। 14 नवंबर 2011 को यह मामला इलाहाबाद से हाईकोर्ट नैनीताल स्थानांतरित कर दिया गया। इस बीच 26 मार्च 2012 को हाईकोर्ट नैनीताल ने भरत सिन्हा की याचिका खारिज कर दी और उनकी बर्खास्तगी का आदेश फिर से प्रभावी हो गया। इसके बाद भी भरत सिन्हा अपने पद पर बने रहे। अल्मोड़ा के आरटीआई कार्यकर्ता डा. रमेश लोहुमी ने इस प्रकरण के बारे में उत्तराखंड सूचना आयोग से जानकारी मांगी। द्वितीय अपील के बाद राज्य सूचना आयुक्त सुरेंद्र सिंह रावत द्वारा सूचना उपलब्ध कराई गई। राज्य सूचना आयुक्त ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग उत्तराखंड शासन को इस मामले में छानबीन करके इसके लिए उत्तरदायी व्यक्ति के खिलाफ तीन माह के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर जानकारी देने के आदेश दिए हैं।
-भरत सिन्हा की रिट याचिका 2012 में खारिज हो जाने के बाद उनके टर्मिनेशन का आदेश स्वत: प्रभावी हो जाता है, किंतु हिल्ट्रान प्रबंधन ने इसका कोई संज्ञान नहीं लिया और भरत सिन्हा अपने पद पर बने रहे। 2015 में अत्यधिक विलंब से भरत सिन्हा रिट याचिका दायर करते हैं और हिल्ट्रान प्रबंधन द्वारा इसका कोई विरोध नहीं किया जाता, जिससे वह एक बार फिर स्थगनादेश प्राप्त कर लेते हैं।
-सुरेंद्र सिंह रावत, राज्य सूचना आयुक्त