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पलायन के कारण ढुंगा गांव में ढूंढे नहीं मिल रहे युवा
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
Updated Thu, 29 Sep 2016 11:47 PM IST
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पलायन से खाली हुआ घर
- फोटो : अमर उजाला
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। कारगिल युद्ध में देश की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले शहीद मेजर राजेश अधिकारी का ढुंगा गांव भी पलायन का दंश झेल रहा है। सड़क और स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में ग्रामीण गांव छोड़ रहे हैं। गांव में सिर्फ बुजुर्ग ही रह गए हैं। युवाओं का यहां दिखना असंभव हो गया है। बच्चों के अभाव में गांव के एकमात्र प्राइमरी विद्यालय में ताले लग चुके हैं।
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शहीद के नाम पर स्वीकृत सड़क आज तक अस्तित्व में नहीं आई। परिणामस्वरूप ग्रामीण चार किमी पैदल चलने का विवश हैं। रानीखेत उपमंडल क्षेत्र के कई गांवों में स्वास्थ्य, सड़क, शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में लोग गांव छोड़ अन्यत्र बस रहे हैं। इसी कड़ी में शामिल है शहीद मेजर राजेश अधिकारी को ढुंगा गांव। मेजर ने देश रक्षा के लिए कारगिल युद्ध में प्राण न्यौछावर कर दिए।
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2000 में शहीद के नाम पर विनायक से ढुंगा तीन किमी सड़क स्वीकृत हुई, लेकिन आज तक सड़क नहीं बन पाई। स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने के कारण ग्रामीणों को चार किमी दूर विनायक जाना पड़ता है। बच्चों के अभाव में गांव के एकमात्र प्राइमरी विद्यालय में पांच साल पहले ताले लग चुके हैं। गांव के अधिकांश भवन बंजर हो गए हैं।
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पलायन रोको, नशा हटाओ अभियान के संयोजक डा. प्रमोद नैनवाल ने बताया कि रैली लेकर जब वह गांव गए तो पता चला कि गांव में यदि कोई बुजुर्ग बीमार पड़ जाए तो उसे अस्पताल ले जाने के लिए भी युवा नहीं हैं। सरकार को पलायन रोकने के लिए ठोक प्रयास करने चाहिए।
गांव के प्रधान बहादुर सिंह ने बताया कि 10 साल पहले तक यहां 45 परिवार निवास करते थे, अब सिर्फ 22 परिवार रह गए हैं। खेती बाड़ी जंगली जानवरों ने चौपट कर दी है। गांव में आसपास खाद्यान्न की दुकानें तक नहीं हैं। हर कार्य के लिए चार किमी दूर विनायक (भिकियासैंण) जाना पड़ता है। गांव में 60 से ऊपर के बुजुर्ग ही रह गए हैं।