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मौत के मुहाने पर इंदिरा बस्ती, विस्थापन की प्रक्रिया तक शुरू नहीं
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इंदिरा बस्ती में आपदा से मकानों को इस तरह हुआ है खतरा। संवाद
- फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। आपदा प्रभावित इंदिरा बस्ती के लोगों के विस्थापन की कार्रवाई आज तक शुरू नहीं हो पाई है। बस्ती के लोग यहां 50 सालों से निवास करते हैं। ढलान वाली जमीन पर कच्चे मकानों में रहने वाले 50 से 60 परिवार खतरे के मुहाने पर हैं। बीते रविवार को आई आपदा ने यहां खासा नुकसान हुआ। भारी भूस्खलन के लिए कई मकान खतरे की जद में हैं। तीन से चार मकान भूस्खलन के कारण जमींदोज हो गए। रास्ते और संपर्क मार्ग ध्वस्त हैं। 2010 में आई आपदा से भी यहां खासा नुकसान हुआ था, लेकिन विस्थापन संबंधी फाइल आगे नहीं बढ़ सकी। डेंजर जोन वाले कई परिवार यहां से अब विस्थापित होने के लिए भी तैयार हैं।
इंदिरा बस्ती में लगभग 90 से 100 गरीब परिवार निवास करते हैं। मेहनत मजदूरी कर गुजर चलाने वाले परिवार कच्चे मकान बनाकर रहते हैं। ढलान वाली जमीन होने के कारण अब यह बस्ती बुरी तरह से भूस्खलन की चपेट में हैं। इस बार आई आपदा के कारण के कई परिवार खतरे की जद में आ चुके हैं। बस्ती में रहने वाली वृद्धा भगवती देवी का मकान 18 अक्तूबर की रात भूस्खलन के कारण जमींदोज हो गया। गोविंद, दीपा आदि के मकान के पीछे भूस्खलन हो चुका है। इससे किसी भी समय खतरा बना हुआ है। पास ही रहने वाले हरी राम के आंखों से आंसू निकल आए।
उन्होंने कहा कि कच्चा मकान है जमीन खिसक रही है। जिसके चलते मकान में दरारें आ चुकी हैं। उनके आगे भूस्खलन के चलते खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश होते ही दहशत फैल जा रही है। विनोद कुमार के टिन के मकान के ऊपर का मलबा आ जाने से उन्हें खासा नुकसान झेलना पड़ा है। कैंट बोर्ड के सीईओ नागेश कुमार पांडेय ने बताया कि बस्ती वालों के विस्थापन के लिए प्रयास चल रहे हैं।
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पानी का स्रोत भी भूस्खलन की भेंट चढ़ा, पेयजल की दिक्कत
रानीखेत। इंदिरा बस्ती निवासी विमला ने बताया कि अब यह बस्ती रहने लायक नहीं है। बारिश के कारण भय बना रहता है। प्रशासन कहीं विस्थापित कर दे तो चले जाएंगे। भूस्खलन के चलते बस्ती वालों के समक्ष अब पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। पूरी बस्ती पास ही के स्रोत से पानी पीती है, लेकिन आपदा की चपेट में आने से रास्ता ध्वस्त है और पानी के स्रोत को भी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को आकर यहां हालातों का जायजा लेना चाहिए।
-इंदिरा बस्ती का निरीक्षण कर लिया है। अलर्ट होते ही प्रशासन ने वहां से कई परिवारों को शिफ्ट कराया था। विस्थापन के लिए भूगर्भीय सर्वेक्षण कराया जाएगा। सुरक्षित जगह भी चिह्नित करनी पड़ेगी।
-जय किशन, संयुक्त मजिस्ट्रेट, रानीखेत।
-आपदा से इंदिरा बस्ती में खासा नुकसान हुआ है, गरीब लोग वहां 50 सालों से निवास कर रहे हैं। अब प्रभावित परिवारों को अटल आवास योजना के तहत आवास आवंटित करने चाहिए। यह लोग गरीब होने के साथ भूमिहीन भी हैं। छावनी में अटल आवास योजना को लागू कर केंद्र सरकार की योजना से लाभान्वित किया जाना चाहिए।
-मोहन नेगी, पूर्व उपाध्यक्ष छावनी परिषद रानीखेत।
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इंदिरा बस्ती में लगभग 90 से 100 गरीब परिवार निवास करते हैं। मेहनत मजदूरी कर गुजर चलाने वाले परिवार कच्चे मकान बनाकर रहते हैं। ढलान वाली जमीन होने के कारण अब यह बस्ती बुरी तरह से भूस्खलन की चपेट में हैं। इस बार आई आपदा के कारण के कई परिवार खतरे की जद में आ चुके हैं। बस्ती में रहने वाली वृद्धा भगवती देवी का मकान 18 अक्तूबर की रात भूस्खलन के कारण जमींदोज हो गया। गोविंद, दीपा आदि के मकान के पीछे भूस्खलन हो चुका है। इससे किसी भी समय खतरा बना हुआ है। पास ही रहने वाले हरी राम के आंखों से आंसू निकल आए।
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उन्होंने कहा कि कच्चा मकान है जमीन खिसक रही है। जिसके चलते मकान में दरारें आ चुकी हैं। उनके आगे भूस्खलन के चलते खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश होते ही दहशत फैल जा रही है। विनोद कुमार के टिन के मकान के ऊपर का मलबा आ जाने से उन्हें खासा नुकसान झेलना पड़ा है। कैंट बोर्ड के सीईओ नागेश कुमार पांडेय ने बताया कि बस्ती वालों के विस्थापन के लिए प्रयास चल रहे हैं।
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पानी का स्रोत भी भूस्खलन की भेंट चढ़ा, पेयजल की दिक्कत
रानीखेत। इंदिरा बस्ती निवासी विमला ने बताया कि अब यह बस्ती रहने लायक नहीं है। बारिश के कारण भय बना रहता है। प्रशासन कहीं विस्थापित कर दे तो चले जाएंगे। भूस्खलन के चलते बस्ती वालों के समक्ष अब पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। पूरी बस्ती पास ही के स्रोत से पानी पीती है, लेकिन आपदा की चपेट में आने से रास्ता ध्वस्त है और पानी के स्रोत को भी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को आकर यहां हालातों का जायजा लेना चाहिए।
-इंदिरा बस्ती का निरीक्षण कर लिया है। अलर्ट होते ही प्रशासन ने वहां से कई परिवारों को शिफ्ट कराया था। विस्थापन के लिए भूगर्भीय सर्वेक्षण कराया जाएगा। सुरक्षित जगह भी चिह्नित करनी पड़ेगी।
-जय किशन, संयुक्त मजिस्ट्रेट, रानीखेत।
-आपदा से इंदिरा बस्ती में खासा नुकसान हुआ है, गरीब लोग वहां 50 सालों से निवास कर रहे हैं। अब प्रभावित परिवारों को अटल आवास योजना के तहत आवास आवंटित करने चाहिए। यह लोग गरीब होने के साथ भूमिहीन भी हैं। छावनी में अटल आवास योजना को लागू कर केंद्र सरकार की योजना से लाभान्वित किया जाना चाहिए।
-मोहन नेगी, पूर्व उपाध्यक्ष छावनी परिषद रानीखेत।