{"_id":"49b7324707dba5e4f49f919edbf22da6","slug":"dharana-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुस्साए आंदोलनकारियों ने दिया धरना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुस्साए आंदोलनकारियों ने दिया धरना
ब्यूरो/अमर उजाला, अल्मोड़ा
Updated Thu, 02 Jul 2015 11:18 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संगठन ने कलक्ट्रेट प्रांगण में धरना दिया और राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाए। इस मौके पर हुई सभा में राज्य सरकार पर वास्तविक राज्य आंदोलनकारियों की उपेक्षा का आरोप लगाया गया
संगठन के संयोजक महेश परिहार ने कहा कि 20 वर्षों तक संघर्ष करने, जेल में बंद रहने, अनेक सालों तक मुकदमे झेलने वाले वास्तविक राज्य आंदोलनकारियों की वर्तमान सरकार घोर उपेक्षा कर रही है। आरोप लगाया कि अल्मोड़ा समेत कई जिलों में फर्जी लोगों को आंदोलनकारी घोषित कर उन्हें पेशन और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। ऐसे मामलों की जांच कर वास्तविक आंदोलनकारियों को शासनादेश के अनुरुप सुविधाएं दी जानी चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि राज्य की जनता बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुवधिाओं से जूझ रही है। पर सरकार के मंत्री और अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। राज्य की स्थाई राजधानी चंद्रनगर गैरसैँण घोषित की जाए।
विज्ञापन
मांग की कि यदि सरकार वास्तविक राज्य आंदोलनकारियों की मांगों पर कार्रवाई नहीं करती है तो उसे राज्य आंदोलकनारी कल्याण परिषद को शीघ्र भंग कर देना चाहिए। धरने में एलडी शर्मा, बसंत जोशी, किशोरी लाल वर्मा, दौलत सिंह, गोविंद राम, कैलाश राम, लछम राम, बहादुर राम आगरी, पान सिंह, देव सिंह, कुंदन सिंह दिनेश शर्मा आदि ने भाग लिया।
विज्ञापन
संगठन के संयोजक महेश परिहार ने कहा कि 20 वर्षों तक संघर्ष करने, जेल में बंद रहने, अनेक सालों तक मुकदमे झेलने वाले वास्तविक राज्य आंदोलनकारियों की वर्तमान सरकार घोर उपेक्षा कर रही है। आरोप लगाया कि अल्मोड़ा समेत कई जिलों में फर्जी लोगों को आंदोलनकारी घोषित कर उन्हें पेशन और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। ऐसे मामलों की जांच कर वास्तविक आंदोलनकारियों को शासनादेश के अनुरुप सुविधाएं दी जानी चाहिए।
विज्ञापन
वक्ताओं ने कहा कि राज्य की जनता बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुवधिाओं से जूझ रही है। पर सरकार के मंत्री और अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। राज्य की स्थाई राजधानी चंद्रनगर गैरसैँण घोषित की जाए।
विज्ञापन
मांग की कि यदि सरकार वास्तविक राज्य आंदोलनकारियों की मांगों पर कार्रवाई नहीं करती है तो उसे राज्य आंदोलकनारी कल्याण परिषद को शीघ्र भंग कर देना चाहिए। धरने में एलडी शर्मा, बसंत जोशी, किशोरी लाल वर्मा, दौलत सिंह, गोविंद राम, कैलाश राम, लछम राम, बहादुर राम आगरी, पान सिंह, देव सिंह, कुंदन सिंह दिनेश शर्मा आदि ने भाग लिया।