{"_id":"5b71c61542c79211a94b4188","slug":"crop-planted-with-hudkiya-baul","type":"story","status":"publish","title_hn":"हुड़के की थाप पर की पौधों की रोपाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हुड़के की थाप पर की पौधों की रोपाई
ब्यूरो/अमर उजाला, सोमेश्वर (अल्मोड़ा)।
Updated Mon, 13 Aug 2018 11:25 PM IST
विज्ञापन
शिव मंदिर सोमेश्वर परिसर में खेत में हुड़किया बौल के साथ फूल पौधों की रोपाई करती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोमनाथ शिव मंदिर में सावन माह के अंतिम सोमवार को भक्तों ने पूजा अर्चना की। परंपरा के अनुसार क्षेत्र की महिलाओं ने हुड़किया बौल के साथ मंदिर परिसर से लगेे खेतों में पौधों की रोपाई कर खुशहाली और अच्छी उपज होने की कामना की।
शिव मंदिर में सुबह से ही भक्तजन पहुंचने शुरू हो गए थे। श्रद्धालुओं ने भगवान शंकर को जल चढ़ाया। तत्पश्चात मंदिर परिसर से लगे खेतों में हुड़किया बौल के साथ फूल पौधों की रोपाई प्रारंभ हुई। महिलाओं ने गुलाब, गेंदा आदि फूलों के पौध रोपे। भगवान शंकर से सुख समृद्धि, खुशहाली और अच्छी फसल होने की कामना की। प्राचीन समय से ही क्षेत्र में यह परंपरा कायम है।
मान्यता यह भी है कि नवविवाहिताओं के द्वारा फूल पौधे रोपने से उन्हें संतान की प्राप्ति होती है। पौध रोपण में सोमेश्वर, अर्जुनराठ, मल्लाखोली, पल्यूड़ा, हट्यूड़ा, भानाराठ, टाना, सर्प, माला, बैगनियां, रनमन, जाल, धौलाड़, अधूरिया, रैत, भंडारीगांव, जैंचोली, रतुराठ आदि गांव की महिलाओं ने भाग लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
शिव मंदिर में सुबह से ही भक्तजन पहुंचने शुरू हो गए थे। श्रद्धालुओं ने भगवान शंकर को जल चढ़ाया। तत्पश्चात मंदिर परिसर से लगे खेतों में हुड़किया बौल के साथ फूल पौधों की रोपाई प्रारंभ हुई। महिलाओं ने गुलाब, गेंदा आदि फूलों के पौध रोपे। भगवान शंकर से सुख समृद्धि, खुशहाली और अच्छी फसल होने की कामना की। प्राचीन समय से ही क्षेत्र में यह परंपरा कायम है।
विज्ञापन
मान्यता यह भी है कि नवविवाहिताओं के द्वारा फूल पौधे रोपने से उन्हें संतान की प्राप्ति होती है। पौध रोपण में सोमेश्वर, अर्जुनराठ, मल्लाखोली, पल्यूड़ा, हट्यूड़ा, भानाराठ, टाना, सर्प, माला, बैगनियां, रनमन, जाल, धौलाड़, अधूरिया, रैत, भंडारीगांव, जैंचोली, रतुराठ आदि गांव की महिलाओं ने भाग लिया।
विज्ञापन