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वीएल स्याही हल उत्पादन को वीपीकेएस, दूनागिरी सहकारिता के बीच हुआ करार
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कंपनी के सचिव गंगा दत्त को प्रमाण पत्र सौपते वीपीकेएएस के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत।
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) का केजीएन फर्नीचर के पास स्थित दूनागिरि स्वायत्त सहकारिता नरसिंहबाड़ी ऑफिसर्स कॉलोनी के साथ वीएल स्याही हल (लौह हल) के उत्पादन के लिए लिखित समझौता हुआ।
वीएल स्याही हल के उत्पादन और विक्रय के लिए उक्त कंपनी के सात हुए समझौते में संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत, वैज्ञानिक डॉ. श्याम नाथ, कंपनी के सचिव गंगा दत्त ने हस्ताक्षर किए। इस फर्म के अलावा मैसर्स हिमालयन हाईटेक नर्सरीज, 85 सुभाषनगर, भोटिया पड़ाव हल्द्वानी (नैनीताल) और नवसृजन बहुउद्देश्यीय स्वायत्त सहकारिता शीतलाखेत हवालबाग के साथ भी वीएल स्याही हल के निर्माण, विपणन के लिए समझौता किया जा चुका है। हजारों हल देश के विभिन्न भागों में पहुंच चके हैं। पर्वतीय क्षेत्र के अधिकतर किसान कृषि कार्यों के लिए लकड़ी से बने हल का ही प्रयोग करते हैं। लकड़ी के हल बनाने के लिए कई पेड़ काटे गए हैं। वैश्विक ताप वृद्धि, जलवायु परिवर्तन के इस दौर में जब पृथ्वी पर मानव जीवन के अनुकूल परिस्थितियां धीरे-धीरे खत्म होती जा रहीं हैं। हल के निर्माण के लिए बांज जैसे बहुपयोगी वृक्षों का कटान करना चिंताजनक है। इस बात को ध्यान में रखकर वीपीकेएएस के कृषि वैज्ञानिकों ने एक ऐसे हल का निर्माण किया है, जिसमें सिर्फ लोहे का ही प्रयोग किया गया है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने इस हल को वीएल स्याही हल नाम दिया है। इस हल के सभी भाग लोहे के बने होने के कारण इसकी मरम्मत का कार्य भी बहुत ही कम समय में किया जा सकता है।
हल की मुठिया से खेत में लगा सकते हैं पाटा
अल्मोड़ा। वीएल स्याही हल के कई फायदे हैं। इस हल की मुठिया की बनावट इस प्रकार की है कि इसका प्रयोग खेत में पाटा लगाने के काम में भी लिया जा सकता है। कम वजन के कारण इसे पर्वतीय क्षेत्रों में एक स्थान से दूसरे स्थान या एक खेत से दूसरे खेत में असानी से ले जाया जा सकता है। इस हल के निर्माण के साथ ही पर्वतीय क्षेत्र की खेती में लकड़ी से बने हल पर निर्भरता कम हो रही है। संस्थान के वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में जब वैश्विक ताप वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों से पृथ्वी पर जीवन को बचाने की लड़ाई में वृक्ष अपनी निर्णायक भूमिका निभाएंगे, तब संस्थान की इस खोज से बचाए गए बांज, उतीश आदि के वृक्षों की भी अहम भूमिका रहेगी। संस्थान की यह खोज पर्यावरण, पेयजल, जैवविविधता के संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगी।
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वीएल स्याही हल के उत्पादन और विक्रय के लिए उक्त कंपनी के सात हुए समझौते में संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत, वैज्ञानिक डॉ. श्याम नाथ, कंपनी के सचिव गंगा दत्त ने हस्ताक्षर किए। इस फर्म के अलावा मैसर्स हिमालयन हाईटेक नर्सरीज, 85 सुभाषनगर, भोटिया पड़ाव हल्द्वानी (नैनीताल) और नवसृजन बहुउद्देश्यीय स्वायत्त सहकारिता शीतलाखेत हवालबाग के साथ भी वीएल स्याही हल के निर्माण, विपणन के लिए समझौता किया जा चुका है। हजारों हल देश के विभिन्न भागों में पहुंच चके हैं। पर्वतीय क्षेत्र के अधिकतर किसान कृषि कार्यों के लिए लकड़ी से बने हल का ही प्रयोग करते हैं। लकड़ी के हल बनाने के लिए कई पेड़ काटे गए हैं। वैश्विक ताप वृद्धि, जलवायु परिवर्तन के इस दौर में जब पृथ्वी पर मानव जीवन के अनुकूल परिस्थितियां धीरे-धीरे खत्म होती जा रहीं हैं। हल के निर्माण के लिए बांज जैसे बहुपयोगी वृक्षों का कटान करना चिंताजनक है। इस बात को ध्यान में रखकर वीपीकेएएस के कृषि वैज्ञानिकों ने एक ऐसे हल का निर्माण किया है, जिसमें सिर्फ लोहे का ही प्रयोग किया गया है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने इस हल को वीएल स्याही हल नाम दिया है। इस हल के सभी भाग लोहे के बने होने के कारण इसकी मरम्मत का कार्य भी बहुत ही कम समय में किया जा सकता है।
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हल की मुठिया से खेत में लगा सकते हैं पाटा
अल्मोड़ा। वीएल स्याही हल के कई फायदे हैं। इस हल की मुठिया की बनावट इस प्रकार की है कि इसका प्रयोग खेत में पाटा लगाने के काम में भी लिया जा सकता है। कम वजन के कारण इसे पर्वतीय क्षेत्रों में एक स्थान से दूसरे स्थान या एक खेत से दूसरे खेत में असानी से ले जाया जा सकता है। इस हल के निर्माण के साथ ही पर्वतीय क्षेत्र की खेती में लकड़ी से बने हल पर निर्भरता कम हो रही है। संस्थान के वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में जब वैश्विक ताप वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों से पृथ्वी पर जीवन को बचाने की लड़ाई में वृक्ष अपनी निर्णायक भूमिका निभाएंगे, तब संस्थान की इस खोज से बचाए गए बांज, उतीश आदि के वृक्षों की भी अहम भूमिका रहेगी। संस्थान की यह खोज पर्यावरण, पेयजल, जैवविविधता के संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगी।
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