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चितई मंदिर में बलि को लाए दो बकरों को लौटाया
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Sat, 01 Apr 2017 11:10 PM IST
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चितई
- फोटो : अमर उजाला
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हाइकोर्ट के मंदिरों में पशु बलि पर रोक लगाने के बाद भी कुछ लोग मनौती के लिए चोरी छिपे मंदिरों में पशु बलि दे रहे हैं। शनिवार को नवरात्र के पांचवें दिन दो लोग चितई स्थित प्रसिद्ध ग्वल देवता मंदिर में दो बकरों को बलि के लिए लाए थे। गायत्री परिवार के लोगों द्वारा समझाने पर वह बलि को लाए गए दो बकरियों को वापस ले गए। गायत्री परिवार से जुड़े लोगों ने लोगों से मंदिरों में सात्विक पूजा करने का आह्वान किया है।
शनिवार को जिले के तलाड़बाड़ी निवासी पूरन सिंह बिष्ट तथा आरतोला जागेश्वर निवासी प्रताप राम बकरियों को बलि देने के लिए चितई स्थित प्रसिद्ध ग्वल देवता मंदिर में लाए थे। मंदिर में पशु बलि की भनक लगने पर गायत्री परिवार के लोगों ने मौके पर पहुंच कर उन्हें न्यायालय के आदेशों की जानकारी दी और पशु बलि नहीं करने के लिए प्रेरित किया। गायत्री परिवार के समझाने बुझाने पर पूरन सिंह बिष्ट और प्रताप राम अपनी-अपनी बकरियों को लेकर वापस घरों को लौट गए। इधर गायत्री परिवार का चितई स्थित ग्वल देवता मंदिर में पशुबलि रोकने के लिए जनजागरण अभियान जारी है। उन्होंने लोगों से पशु बलि के बजाए मंदिरों में सात्विक पूजा करने का आह्वान किया है। वहां पर योगेश जोशी, माधो बोरा, ध्रुव जोशी, भीम सिंह अधिकारी, सरोज भट्ट, इंद्रा गनघरिया आदि थे।
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