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Uttarakhand News: महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा सर्वाइकल कैंसर, 2023 में 2768 महिलाएं मिलीं इस बीमारी से पीड़ित

Thu, 19 Sep 2024 01:07 PM IST
हीरा मेहरा हेमंत बिष्ट, संवाद
हेमंत बिष्ट, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Thu, 19 Sep 2024 01:07 PM IST
सार

स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार राज्य में 2023 में 2768 महिलाएं इस कैंसर ग्रसित पाई गईं। इनमें से आधे से ज्यादा कुमाऊं क्षेत्र की बताई गईं हैं।

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Cervical cancer is increasing rapidly in women in almora
सांकेतिक तस्वीर।

विस्तार

 

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उत्तराखंड की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। सामान्य भाषा में इसे बच्चेदानी के मुंह के संक्रमण से होने वाली बीमारी कहा जाता है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार राज्य में 2023 में 2768 महिलाएं इस कैंसर ग्रसित पाई गईं। इनमें से आधे से ज्यादा कुमाऊं क्षेत्र की बताई गईं हैं।

पर्वतीय क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण इस बीमारी से जूझ रही मरीजों को हल्द्वानी, दिल्ली समेत अन्य नगरों की दौड़ लगानी पड़ रही है। गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं के कैंसर के नाम से जानी जाने वाली इस बीमारी को एचपीवी संक्रमण से जोड़ा जाता है। सही समय पर इलाज न मिलने से कई बार मरीज की मौत भी हो जाती हैं।

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महिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमा रावत ने बताया कि एचपीवी परीक्षण के माध्यम से सर्वाइकल कैंसर का पता प्रारंभिक (प्री-कैंसर) अवस्था में लगाया जा सकता है। इससे बचाव संभव है। बताया कि 9-14 और 15-45 की उम्र में एचपीवी का टीकाकरण करवाकर सर्वाइकल कैंसर को रोका जा सकता है। इसमें कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, सर्जरी से इलाज होता हैं। 

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लक्षण
पेट के निचले हिस्से में दर्द, असामान्य रूप से भारी माहवारी, पीठ के निचले हिस्से में दर्द और पैरों में सूजन, पेशाब में परेशानी आदि।

 

एचपीवी टीकाकरण की सुविधा नहीं
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, एचपीवी का टीकाकरण वर्तमान में सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं है लेकिन सरकार इस पर काम कर रही है। यह कुछ निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स में उपलब्ध है, जिसकी कीमत करीब 10,000 रुपये है। किशोरियों को दो और वयस्क महिलाओं को तीन डोज दी जाती हैं।

 

जिलों में सामने आए मामले प्रति वर्ष

अल्मोड़ा: 40-50

बागेश्वर : 30-40

 

पिथौरागढ़ : 35-45

 

चंपावत : 20 - 25


मेडिकल कॉलेज के अधीन बेस अस्पताल में थेरेपी की जाती है। इस साल अब तक एक सर्वाइकल कैंसर का मामला आया है जिसकी थेरेपी कराई जा रही हैं। बेहतर इलाज की सुविधाएं दी जा रही हैं।
-प्रो. सीपी भैंसोड़ा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा।

जिले में महिलाओं के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता के साथ जांच भी निशुल्क की जाती हैं। स्वास्थ्य के प्रति सभी को अपना ख्याल रखना जरूरी हैं।
- डॉ. आरसी पंत सीएमओ अल्मोड़ा

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