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घरेलू गैस के व्यवसायिक उपयोग पर नहीं लग रहा अंकुश
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/अल्मोड़ा।
Updated Fri, 04 Sep 2015 12:52 AM IST
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घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग पर प्रशासन अंकुश नहीं लगा पा रहा है। इससे दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर गैस की आपूर्ति नहीं हो पाती है।
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जिले में हजारों की संख्या में रेस्टोरेंट, दुकान, होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान है पर कामर्शियल गैस कनेक्शनधारियों की संख्या मात्र 997 है।
जिले के नगरीय इलाकों के अलावा 11 ब्लाकों में घरेलू रसोई गैस के 1,00,350 कनेक्शनधारी हैं। ग्रामीण इलाकों में सालभर रसोई गैस की किल्लत बनी रहती है।
सोमेश्वर, ताकुला, दन्यां, लमगड़ा, जैंती आदि क्षेत्रों में डेढ़ से दो माह में बमुश्किल एक बार रसोई गैस सिलेंडर का वाहन पहुंचता है। पर्याप्त कैरोसिन भी नहीं मिलता है।
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गैस आपूर्ति नहीं होने पर लोग जंगलों से लकड़ी लाकर खाना बनाते हैं। शहरी क्षेत्रों में गैस की किल्लत होने पर लोगों को अधिक परेशानी होती है। खासकर जाड़े के मौमस और बारातों के सीजन में लोगों को रसोई गैस संकट से अधिक जूझना पड़ता है।
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अल्मोड़ा, रानीखेत के अलावा द्वाराहाट, चौखुटिया, भिकियासैंण, दन्यां, लमगड़ा, जैंती, सल्ट, स्याल्दे, मौलेखाल, भतरौंजखान, सोमेश्वर आदि कस्बों में हजारों की संख्या में रेस्टोरेंट, चाय की दुकानें, भोजनालय, होटल, छात्रावास आदि हैं, लेकिन गिनती के दुकानदारों के पास ही कामर्शियल गैस कनेक्शन हैं।
जिले में कामर्शियल गैस कनेक्शनधारिकों की संख्या मात्र 997 है। ऐसे में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बेरोकटोक घरेलू गैस सिलेडरों का उपयोग हो रहा है।
इससे सरकार को भी राजस्व की हानि होती है, लेकिन शासन-प्रशासन घरेलू गैस का दुरुपयोग रोकने में नाकाम साबित हो रहा है।
इधर जिला पूर्ति अधिकारी टीएन उपाध्याय का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यवसायिक उपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।