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अंग्रेजों ने संवारा, अपनों ने किया किनारा
ब्यूरो, अमर उजाला ब्यूरो/ रानीखेत (अल्मोड़ा)
Updated Wed, 22 Apr 2015 11:16 PM IST
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प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण, सुंदर वादियों की वजह से रानीखेत को अंग्रेजों ने पर्यटन नगरी का दर्जा दिया था, लेकिन हमारे हाकिमों ने यहां की सुंदरता को निखारने के बजाए, इसकी उपेक्षा कर रसातल में धकेल दिया है। राज्य बनने के बाद पर्यटन विकास में बढ़ोत्तरी की उम्मीद थी, लेकिन यातायात अव्यवस्था, मनोरंजन के साधनों, पार्किंग स्थलों का अभाव और मूलभूत सुविधाओं की कमी उम्मीद पर भारी पड़ गई। परिणाम पिछले चार-पांच साल से क्षेत्र में पर्यटकों की आमद उतार-चढ़ाव भरी रही है।
पर्यटन कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 2008 में 76261 स्वदेशी, 873 विदेशी, 2009 में यहां 88506 स्वदेशी, 573 विदेशी, 2010 में 83211 स्वदेशी, 398 विदेशी, 2011 में 89983 स्वदेशी, 398 विदेशी, 2012 में 22188 स्वदेशी, 213 विदेशी सैलानी, 2013 में 21130 स्वदेशी और 210 विदेशी पहुंचे है। 2014 के आंकड़े उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। इस बार अभी पर्यटकों की संख्या में खास इजाफा नहीं हुआ है।
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कहते हैं होटल व्यवसाय से जुड़े लोग:-
1- हमारे जनप्रतिनिधियों में विकास की सोच नहीं है। कुदरत ने रानीखेत को असीम सौंदर्य बख्शा है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं नही ंहैं। सड़कों की दशा खराब है। अल्मोड़ा, नैनीताल की तर्ज पर यहां भी वॉल्वो बसें चलनी चाहिए। पर्यटन विभाग रूचि नहीं लेता। चौबटिया का सेब गार्डन बर्बाद हो गया है। तमाम अभावों के कारण पांच साल से सैलानियों की आवाजाही कम हो गई है। पर्यटन विभाग तो स्थानीय कार्यालय की ही मरम्मत नहीं करा पा रहा।
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-हिमांशु उपाध्याय, अध्यक्ष, होटल एसोसिएसन, रानीखेत
2- पर्यटन नगरी में पर्यटकों के मनोरंजन के साधन तक उपलब्ध नहीं हैं। बाहर से सैलानी नाम सुनकर आते हैं और एक ही दिन में बोर होकर वापस लौट जाते हैं। नगर की यातायात व्यवस्था राम भरोसे है। आए दिन अव्यवस्था के चलते जाम लगता है और पर्यटक कड़वे अनुभव लेकर लौटते हैं। सड़कें खराब हालत में हैं। चार धाम वाले पर्यटक रानीखेत होकर गुजरे सरकार को इसके लिए प्रयास करने चाहिए। नए पर्यटन स्थलों का विकास, पुराने पर्यटन स्थलों का सौंदर्यीकरण करना भी जरूरी है। दलमोटी में मृग विहार निर्माण के लिए पर्यटन विभाग को प्रयास करने चाहिए।
-जगदीश अग्रवाल, होटल व्यवसायी, रानीखेत
3-पर्यटकों के आकर्षण के लिए शासन प्रशासन की तरफ से कुछ भी नहीं हो रहा। 20-25 वर्ष पूर्व तक मैदानी क्षेत्र से पहाड़ को जोड़ने वाली सड़कों के पैराफिट, दीवारों और पोलों में रंगरोंगन का कार्य होता था, वह अब ठप हैं। नगर की सड़कें बदहाल हैं। इससे गलत संदेश जाता है। लोनिवि के माध्यम से यह कार्य कराए जाने चाहिए। साथ ही सैलानी यहां आकर ठहरे इसके लिए मनोरंजन के साधन विकसित किए जाने चाहिए। पार्कों के माध्यम से भी पर्यटकों को आमंत्रित किया जा सकता है।
-सुबोध शाह, होटल व्यवसायी, मालरोड रानीखेत