बेसिक शिक्षा परीक्षा प्रणाली बनी मजाक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षा परीक्षा प्रणाली मजाक बनकर रह गई है। शिक्षा विभाग के पास प्रश्न पत्र छपवाने के लिए तक बजट तक नहीं है। संकुल संसाधन केंद्रों (सीआरसी) द्वारा शिक्षकों को प्रत्येक विषय के प्रश्न पत्रों की एक-एक प्रति पकड़ा दी गई। शिक्षकों ने इन प्रश्न पत्रों की फोटो कॉपी करवाकर छात्रों को प्रश्न पत्र बांटे। इससे प्रश्न पत्रों की गोपनीयता पूरी तरह से भंग हुई है। बेसिक शिक्षा के गिरते स्तर के लिए राजकीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान (डायट) और विभाग को जिम्मेदार ठहराया है।
जिले में कक्षा एक से आठवीं तक की परीक्षा शुरू हो गई है। पहले दिन स्थिति यह रही कि छात्र-छात्राओं को देने के लिए पर्याप्त प्रश्न पत्र तक उपलब्ध नहीं थे। बताया गया है कि सीआरसी द्वारा जिले के सभी स्कूलों को प्रत्येक विषय के प्रश्न पत्रों की एक-एक प्रति पकड़ा दी। शिक्षकों ने प्रश्न पत्रों की फोटो कॉपी कराई और छात्रों को वितरित की। फोटो स्टेट की दुकानों में प्रश्न पत्रों की फोटो काफी कराने के लिए शिक्षकों की भीड़ लग गई। एक स्कूल में प्रश्न पत्रों के फोटो स्टेट करने में ही ढाई से तीन हजार रुपए तक खर्च हो गए। इधर जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिला मंत्री संजय बिष्ट ने आरोप लगाया कि प्रश्न पत्रों के लिए विद्यालयों को कोई भी बजट उपलब्ध नहीं कराया गया। फोटो स्टेट कराने से प्रश्न पत्रों की गोपनीयता भंग हुई है।
उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा की परीक्षा प्रणाली में हर साल नए प्रयोग और बदलाव किए जा रहे हैं। शिक्षकों को मूल्यांकन के लिए कोई प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है। इस कारण शिक्षक असमंजस में हैं कि किस प्रकार का प्रगति पत्र बनाएं। उन्होंने बेसिक शिक्षा के गिरते स्तर के लिए डायट और विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। डायट और विभाग द्वारा जारी की गई परीक्षा प्रणाली से शिक्षकों में काफी रोष व्याप्त है। शिक्षक संघ ने कहा कि ऐसी स्थिति में परीक्षा के संचालन और मूल्यांकन में शिक्षक द्वारा कोई गलती होती है तो इसका जिम्मेदार डायट और विभाग रहेंगे।