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Almora News: गर्मी बढ़ने के साथ ही भड़कने लगी जंगलों में आग
Mon, 15 May 2023 11:16 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Mon, 15 May 2023 11:16 PM IST
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सल्ट के पैसिया में इस तरह उठ रहीं हैं जंगल से आग की पलटें। संवाद
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बागेश्वर। गर्मी बढ़ने के साथ ही जंगलों में आग भड़कने लगी है। बागेश्वर-चौकोड़ी सड़क से सटे छातीगांव में आबादी के पास तक पहुंची आग पर दमकल विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद काबू पाया। जंगलों में आग लगने से वातावरण में धुंध छाई हुई है।
रविवार की शाम कोे जंगल की आग छातीगांव में कृषि भूमि तक पहुंच गई। आग ने खेतों के पास सेमल के सूखे पेड़ को चपेट में ले लिया। पेड़ के पास ही गांव के लोगों के घास के लुट्टे (ढेर) थे जिनके भी आग की चपेट में आने का खतरा पैदा हो गया। इधर सूचना पर प्रभारी अग्निशमन अधिकारी गोपाल सिंह रावत ने टीम को मौके पर भेजा। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। मौके पर पुलिस की 112 की टीम भी मौजूद थी। आग पर काबू पाने वालों में लाइट फायर मैन दिनेश चंद्र पाठक, चालक चंद्राप्रकाश, फायरमैन रमेश जोशी, केदार सिंह, सुखदेव सिंह शामिल रहे।
कपकोट में ऐठाण के जंगल में धधकी आग
इस सीजन में वनाग्नि की 11 घटनाएं हुईं दर्ज, 29 हजार से अधिक के नुकसान का अनुमान
संवाद न्यूज एजेंसी
बागेश्वर। इस फायर सीजन में बारिश के चलते वन विभाग को काफी राहत मिली थी लेकिन एक बार फिर से जंगल सुलगने लगे हैं। कपकोट के ऐठाण के जंगल में रविवार की रात और सोमवार को दिन के समय आग लग गई। आग लगने की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर जाकर आग को काबू किया। हालांकि इस दौरान वन संपदा को काफी नुकसान हुआ। जिले के अधिकांश जंगलों में पिरूल गिरा हुआ है। तापमान बढ़ने के साथ ही पिरूल आग भड़काने में सहायक हो रहा है।
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इस साल फायर सीजन में वनाग्नि की 11 घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। इस दौरान 9.90 हेक्टेयर वन संपदा जलकर नष्ट हो गई और 29,700 रुपये का नुकसान हो चुका है। हालांकि यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में काफी कम है। पिछले साल इस अवधि तक वनाग्नि की करीब 150 घटनाएं हो चुकीं थी। इधर डीएफओ हिमांशु बागरी ने बताया कि वनाग्नि से वनों को बचाने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। कर्मचारी और फायर वॉचर मुस्तैद हैं। आग बुझाने के लिए फायर ब्लोअर का उपयोग हो रहा है। ग्रामीणों को जंगल बचाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। संवाद
अल्मोड़ा में आठ से अधिक जंगल धधके, लाखों की वन संपदा जली
मौलेखाल (अल्मोड़ा)। जिले में बारिश थमते ही फिर से जंगल धधकने लगे हैं। सल्ट और दन्या में आठ से अधिक जंगलों में दो दिनों से आग लगी है जिस कारण लाखों की वन संपदा जलकर नष्ट हो गई है। वहीं वन्य जीवों के अस्तित्व पर भी संकट के बादल गहरा गए हैं।
अल्मोड़ा में बारिश थमते ही जंगलों को आग से सुरक्षित बचाने के सभी दावे हवाई साबित हो रहे हैं। बीते दिनों हुई बारिश से जंगलों में आग लगने की घटनाएं थमी थीं लेकिन तपिश बढ़ते ही फिर से जंगल सुलगने लगे हैं। जिले के सल्ट विकासखंड में पैसिया, रगड़गाड़, नैलरणा, क्वैराला, डाड़मी, पिपना, तड़ी और भैसियाछाना विकासखंड के दन्या में बीते दो दिनों से जंगल धधक रहे हैं। जंगलों में आग लगने से वन संपदा को काफी नुकसान पहुंचा है। 15 हेक्टेयर से अधिक के दायरे में फैली आग से चीड़ के कई पेड़ गिर गए हैं। बावजूद इसके वन विभाग आग पर काबू पाने में नाकाम साबित है।
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35 हेक्टेयर से अधिक जंगल हुए नष्ट
मौलेखाल। जिले में जंगलों को आग से सुरक्षित बचाने के दावे कर 155 क्रू सेंटर स्थापित किए गए हैं लेकिन यह दावे जंगलों में लगी आग के धुएं में गुम हो गए हैं। अब तक इस फायर सीजन जिले भर में 35 हेक्टेयर से अधिक जंगल दावानल की भेंट चढ़ चुके हैं। संवाद
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जंगलों से उठने वाले धुएं से सेहत पर पड़ रहा है बुरा असर
मौलेखाल। सल्ट क्षेत्र में सात से अधिक जंगल दो दिनों से धधक रहे हैं। इन जंगलों से उठने वाला धुआं आबादी में फैल गया है जिसकी वजह से बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। पैसिया के राम सिंह, रमेश, हरीश ने बताया कि धुएं से बच्चों और बुजुर्गों को सांस की दिक्कत के साथ ही आंखों में जलन हो रही है। जल्द ही जंगलों की आग नहीं बुझी तो इसके घातक परिणाम सामने आ सकते हैं।
कोट
चीड़ के जंगलों में आग लगी है जिसे बुझाने के लिए टीम भेजी गई है। आग पर जल्द से जल्द काबू पाने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। - महेश चंद्र सती, रेंजर, सल्ट।
घिंघारीखाल के आरक्षित वन क्षेत्र में लगी आग
रानीखेत (अल्मोड़ा)। तपिश बढ़ने के साथ ही जंगलों में आग लगने का सिलसिला थम नहीं रहा है। कुछ दिन पूर्व भी घिंघारीखाल के आरक्षित वन क्षेत्र में आग लगी थी। साेमवार को दोपहर करीब ढाई बजे एक बार फिर उसी पडोली के जंगल में आग लग गई। आग इतनी प्रचंड थी कि फायर ब्रिगेड को मौके पर बुलाना पड़ा। एक घंटे की मशक्कत के बाद बमुश्किल आग पर काबू पाया गया। इस दौरान 0.5 हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर नष्ट हो गया। वन क्षेत्राधिकारी तापस मिश्रा ने बताया कि पिछली बार निचले ग्रामीण इलाकों से आग ऊपर पहुंची थी लेकिन इस बार वन पंचायत का इलाका काफी नीचे है। किसी शरारती तत्व के जानबूझकर जंगल में आग लगाने का अंदेशा है।
आग की खबर का जोड़-अनर्सा में घास के लुट्टे जले
बागेश्वर। बागेश्वर के अनर्सा गांव में दोपहर बाद अचानक घास के लुट्टों (ढेर) में आग लग गई। गांव के लोगों ने आग पर काबू प पाने की कोशिश की लेकिन आग जबरदस्त ढंग से फैल रही थी। लोगों के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे थे। लोगों ने इसकी सूचना दमकल विभाग को दी। दमकल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई, लेकिन तब तक घास के छह लुट्टे जल चुके थे। संवाद
नौगांव में आग से चार घास के लुट्टे जले
गरुड़ (बागेश्वर)। क्षेत्र में सोमवार को आई आंधी के दौरान विकास खंड के नौगांव में शॉर्टसर्किट से आनंद सिंह परिहार के घास के चार लुट्टे जलकर नष्ट हो गए। प्रभावित परिवार ने तहसील प्रशासन से शीघ्र आर्थिक सहायता देने की मांग की है। संवाद
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रविवार की शाम कोे जंगल की आग छातीगांव में कृषि भूमि तक पहुंच गई। आग ने खेतों के पास सेमल के सूखे पेड़ को चपेट में ले लिया। पेड़ के पास ही गांव के लोगों के घास के लुट्टे (ढेर) थे जिनके भी आग की चपेट में आने का खतरा पैदा हो गया। इधर सूचना पर प्रभारी अग्निशमन अधिकारी गोपाल सिंह रावत ने टीम को मौके पर भेजा। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। मौके पर पुलिस की 112 की टीम भी मौजूद थी। आग पर काबू पाने वालों में लाइट फायर मैन दिनेश चंद्र पाठक, चालक चंद्राप्रकाश, फायरमैन रमेश जोशी, केदार सिंह, सुखदेव सिंह शामिल रहे।
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कपकोट में ऐठाण के जंगल में धधकी आग
इस सीजन में वनाग्नि की 11 घटनाएं हुईं दर्ज, 29 हजार से अधिक के नुकसान का अनुमान
संवाद न्यूज एजेंसी
बागेश्वर। इस फायर सीजन में बारिश के चलते वन विभाग को काफी राहत मिली थी लेकिन एक बार फिर से जंगल सुलगने लगे हैं। कपकोट के ऐठाण के जंगल में रविवार की रात और सोमवार को दिन के समय आग लग गई। आग लगने की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर जाकर आग को काबू किया। हालांकि इस दौरान वन संपदा को काफी नुकसान हुआ। जिले के अधिकांश जंगलों में पिरूल गिरा हुआ है। तापमान बढ़ने के साथ ही पिरूल आग भड़काने में सहायक हो रहा है।
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इस साल फायर सीजन में वनाग्नि की 11 घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। इस दौरान 9.90 हेक्टेयर वन संपदा जलकर नष्ट हो गई और 29,700 रुपये का नुकसान हो चुका है। हालांकि यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में काफी कम है। पिछले साल इस अवधि तक वनाग्नि की करीब 150 घटनाएं हो चुकीं थी। इधर डीएफओ हिमांशु बागरी ने बताया कि वनाग्नि से वनों को बचाने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। कर्मचारी और फायर वॉचर मुस्तैद हैं। आग बुझाने के लिए फायर ब्लोअर का उपयोग हो रहा है। ग्रामीणों को जंगल बचाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। संवाद
अल्मोड़ा में आठ से अधिक जंगल धधके, लाखों की वन संपदा जली
मौलेखाल (अल्मोड़ा)। जिले में बारिश थमते ही फिर से जंगल धधकने लगे हैं। सल्ट और दन्या में आठ से अधिक जंगलों में दो दिनों से आग लगी है जिस कारण लाखों की वन संपदा जलकर नष्ट हो गई है। वहीं वन्य जीवों के अस्तित्व पर भी संकट के बादल गहरा गए हैं।
अल्मोड़ा में बारिश थमते ही जंगलों को आग से सुरक्षित बचाने के सभी दावे हवाई साबित हो रहे हैं। बीते दिनों हुई बारिश से जंगलों में आग लगने की घटनाएं थमी थीं लेकिन तपिश बढ़ते ही फिर से जंगल सुलगने लगे हैं। जिले के सल्ट विकासखंड में पैसिया, रगड़गाड़, नैलरणा, क्वैराला, डाड़मी, पिपना, तड़ी और भैसियाछाना विकासखंड के दन्या में बीते दो दिनों से जंगल धधक रहे हैं। जंगलों में आग लगने से वन संपदा को काफी नुकसान पहुंचा है। 15 हेक्टेयर से अधिक के दायरे में फैली आग से चीड़ के कई पेड़ गिर गए हैं। बावजूद इसके वन विभाग आग पर काबू पाने में नाकाम साबित है।
35 हेक्टेयर से अधिक जंगल हुए नष्ट
मौलेखाल। जिले में जंगलों को आग से सुरक्षित बचाने के दावे कर 155 क्रू सेंटर स्थापित किए गए हैं लेकिन यह दावे जंगलों में लगी आग के धुएं में गुम हो गए हैं। अब तक इस फायर सीजन जिले भर में 35 हेक्टेयर से अधिक जंगल दावानल की भेंट चढ़ चुके हैं। संवाद
जंगलों से उठने वाले धुएं से सेहत पर पड़ रहा है बुरा असर
मौलेखाल। सल्ट क्षेत्र में सात से अधिक जंगल दो दिनों से धधक रहे हैं। इन जंगलों से उठने वाला धुआं आबादी में फैल गया है जिसकी वजह से बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। पैसिया के राम सिंह, रमेश, हरीश ने बताया कि धुएं से बच्चों और बुजुर्गों को सांस की दिक्कत के साथ ही आंखों में जलन हो रही है। जल्द ही जंगलों की आग नहीं बुझी तो इसके घातक परिणाम सामने आ सकते हैं।
कोट
चीड़ के जंगलों में आग लगी है जिसे बुझाने के लिए टीम भेजी गई है। आग पर जल्द से जल्द काबू पाने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। - महेश चंद्र सती, रेंजर, सल्ट।
घिंघारीखाल के आरक्षित वन क्षेत्र में लगी आग
रानीखेत (अल्मोड़ा)। तपिश बढ़ने के साथ ही जंगलों में आग लगने का सिलसिला थम नहीं रहा है। कुछ दिन पूर्व भी घिंघारीखाल के आरक्षित वन क्षेत्र में आग लगी थी। साेमवार को दोपहर करीब ढाई बजे एक बार फिर उसी पडोली के जंगल में आग लग गई। आग इतनी प्रचंड थी कि फायर ब्रिगेड को मौके पर बुलाना पड़ा। एक घंटे की मशक्कत के बाद बमुश्किल आग पर काबू पाया गया। इस दौरान 0.5 हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर नष्ट हो गया। वन क्षेत्राधिकारी तापस मिश्रा ने बताया कि पिछली बार निचले ग्रामीण इलाकों से आग ऊपर पहुंची थी लेकिन इस बार वन पंचायत का इलाका काफी नीचे है। किसी शरारती तत्व के जानबूझकर जंगल में आग लगाने का अंदेशा है।
आग की खबर का जोड़-अनर्सा में घास के लुट्टे जले
बागेश्वर। बागेश्वर के अनर्सा गांव में दोपहर बाद अचानक घास के लुट्टों (ढेर) में आग लग गई। गांव के लोगों ने आग पर काबू प पाने की कोशिश की लेकिन आग जबरदस्त ढंग से फैल रही थी। लोगों के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे थे। लोगों ने इसकी सूचना दमकल विभाग को दी। दमकल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई, लेकिन तब तक घास के छह लुट्टे जल चुके थे। संवाद
नौगांव में आग से चार घास के लुट्टे जले
गरुड़ (बागेश्वर)। क्षेत्र में सोमवार को आई आंधी के दौरान विकास खंड के नौगांव में शॉर्टसर्किट से आनंद सिंह परिहार के घास के चार लुट्टे जलकर नष्ट हो गए। प्रभावित परिवार ने तहसील प्रशासन से शीघ्र आर्थिक सहायता देने की मांग की है। संवाद