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स्टेटस सिंबल बन गया शस्त्र रखना
ब्यूूराे, अमर उजाला, अल्मोड़ा।
Updated Sat, 05 Sep 2015 01:29 AM IST
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पर्वतीय समाज में भी दिखावे का प्रचलन तेजी से बढ़ते जा रहा है। पिछले कुछ सालों में महंगी गाड़ी, फोन के साथ ही लाइसेंसी शस्त्र रखना भी स्टेटस सिंबल माना जाने लगा है। लोग आत्मरक्षा का कारण बताकर शस्त्र लाइसेंस प्राप्त कर महंगे हथियार खरीद रहे हैं। जिले में 2378 लोगों को शस्त्र लाइसेंस मिले हैं।
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150 लोगों के शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन जिला प्रशासन के पास लंबित हैं। इस वर्ष अब तक प्रशासन ने मृत्यु होने पर विरासती, वृद्धों के परिजनों के नाम लाइसेंस ट्रांसफर समेत कुल 60 बंदूक के लाइसेंस जारी किए हैं। बंदूक का लाइसेंस लेने वालों में एक महिला भी शामिल है।
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हालांकि पर्वतीय क्षेत्र में विशेष खतरा नहीं है और शांत क्षेत्र है। पिछले कुछ वर्षों में नवधनाड्य वर्ग में पिस्टल और रिवाल्वर रखना रसूक बन गया है। अधिकांश लोग आत्मरक्षा का कारण बताकर शस्त्र लाइसेंस प्राप्त कर महंगे हथियार खरीद रहे हैं, जबकि आमतौर पर पर्वतीय क्षेत्र शांत है। पहाड़ी क्षेत्र में लूटपाट, गैंगवार, रंजिश की घटनाएं काफी कम हैं।
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जिले में कुल 2378 लोगों के पास बंदूक के लाइसेंस हैं। इनमें कारतूसी बंदूक (सिंगल नाल) के 1082, कारतूसी बंदूक (डबल नाल) 508, एक नाली भरवां बंदूक 254, दो नाली भरवा बंदूक 120 लोगों के पास है। जबकि रिवाल्वर, पिस्टल के 307 और राइफल के 77 लाइसेंस धारी हैं।
आम तौर पर लोग निजी सुरक्षा कारणों का हवाला देकर बंदूकों के लाइसेंस के लिए आवेदन कर रहे हैं। आवेदन करने वाले लोग अधिकांश लोग रिवाल्वर और पिस्टल की चाहत रखते हैं।
सभी ने खुद को कोई न कोई खतरा बताकर आत्मरक्षा का कारण बताते हुए लाइसेंस हासिल किए हैं। प्रभारी डीएम आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बताया मानकों की पूरी जांच के बाद ही साइसेंस जारी किए जा रहे हैं।