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विधायक जीना के बयान के विरोध में कर्मचारियों ने धरना दिया, नारेबाजी की
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अल्मोड़ा। सल्ट के विधायक महेश जीना के कार्मिक विरोधी बयान के विरोध में उत्तरांचल फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन के बैनर तले कार्मिकों ने नगर के गांधी पार्क में धरना देकर प्रदर्शन किया। उन्होंने तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
धरना स्थल पर हुई सभा में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि विधायक जीना ने देघाट और रामनगर में कार्मिकों के प्रति गैर जिम्मेदाराना, अमर्यादित बयान दिए हैं। इससे शिक्षकों और कार्मिकों में रोष है। उन्होंने कहा कि भविष्य में कार्मिकों के खिलाफ बिना साक्ष्य के कोई टिप्पणी की जाती है तो वह किसी भी दशा में स्वीकार नहीं की जाएगी। इस तरह के बयानों से ईमानदारी से काम कर रहे कार्मिकों के मनोबल पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। वह अपमानित महसूस कर रहे हैं। बिना साक्ष्य के सार्वजनिक मंच से कर्मचारियों के खिलाफ अनर्गल टिप्पणी करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर गैर मर्यादित बयान जारी करने वाले जनप्रतिनिधियों को कर्मचारियों के साथ सही व्यवहार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण देने के निर्देश जारी किए जाए। इसके बाद भी जनप्रतिनिधियों ने बिना साक्ष्यों के बयानबाजी की तो ऐसी स्थिति में एक नोटिस देकर संपूर्ण कार्यालयों में सरकारी कार्य ठप कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्मिकों ने उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए 94 दिन हड़ताल की थी, आज भी उसी राज्य में जनप्रतिनिधि कार्मिकों को धमकाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रदर्शन करने वालों में संघ के जिलाध्यक्ष पुष्कर सिंह भैसोड़ा, जिला महामंत्री अमरनाथ सिंह रजवार, मंडलीय अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार पाठक, शिक्षा समन्वय समिति के अध्यक्ष डॉ. मनोज जोशी आदि शामिल हैं।
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कर्मचारियों की ड्यूटी है जनता का काम करना। जो काम नहीं करेंगे उन्हें बिल्कुल निलंबित किया जाएगा। मैंने कोई गलत बात नहीं की है। मैं अपनी बात पर कायम हूं। - महेश जीना, सल्ट विधायक।
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धरना स्थल पर हुई सभा में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि विधायक जीना ने देघाट और रामनगर में कार्मिकों के प्रति गैर जिम्मेदाराना, अमर्यादित बयान दिए हैं। इससे शिक्षकों और कार्मिकों में रोष है। उन्होंने कहा कि भविष्य में कार्मिकों के खिलाफ बिना साक्ष्य के कोई टिप्पणी की जाती है तो वह किसी भी दशा में स्वीकार नहीं की जाएगी। इस तरह के बयानों से ईमानदारी से काम कर रहे कार्मिकों के मनोबल पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। वह अपमानित महसूस कर रहे हैं। बिना साक्ष्य के सार्वजनिक मंच से कर्मचारियों के खिलाफ अनर्गल टिप्पणी करना उचित नहीं है।
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उन्होंने कहा कि भविष्य में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर गैर मर्यादित बयान जारी करने वाले जनप्रतिनिधियों को कर्मचारियों के साथ सही व्यवहार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण देने के निर्देश जारी किए जाए। इसके बाद भी जनप्रतिनिधियों ने बिना साक्ष्यों के बयानबाजी की तो ऐसी स्थिति में एक नोटिस देकर संपूर्ण कार्यालयों में सरकारी कार्य ठप कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्मिकों ने उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए 94 दिन हड़ताल की थी, आज भी उसी राज्य में जनप्रतिनिधि कार्मिकों को धमकाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रदर्शन करने वालों में संघ के जिलाध्यक्ष पुष्कर सिंह भैसोड़ा, जिला महामंत्री अमरनाथ सिंह रजवार, मंडलीय अध्यक्ष धीरेंद्र कुमार पाठक, शिक्षा समन्वय समिति के अध्यक्ष डॉ. मनोज जोशी आदि शामिल हैं।
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कर्मचारियों की ड्यूटी है जनता का काम करना। जो काम नहीं करेंगे उन्हें बिल्कुल निलंबित किया जाएगा। मैंने कोई गलत बात नहीं की है। मैं अपनी बात पर कायम हूं। - महेश जीना, सल्ट विधायक।