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केदारनाथ में भटकी महिला को परिजनों का इंतजार
दीप जोशी/अमर उजाला, अल्मोड़ा
Updated Mon, 16 Nov 2015 12:22 AM IST
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केदारनाथ की आपदा के दौरान बिछड़ी महाराष्ट्र निवासी एक 45 वर्षीय महिला सात माह बाद भी अपने घर नहीं पहुंच सकी है। यह महिला अप्रैल में सोमेश्वर के निकट बदहवास हालत में मिली थी।
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इसका सही पता ठिकाना नहीं मिलने से प्रशासन ने इसे तब अल्मोड़ा के नारी निकेतन भेज दिया था लेकिन आज तक यह महिला अपने घर नहीं पहुंच सकी है।
वह नारी निकेतन में नहीं रहना चाहती और अपने घर भेजने का आग्रह कर रही है लेकिन महाराष्ट्र से कोई सूचना नहीं मिलने के कारण उसे आज तक नहीं भेजा जा सका है।
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मालूम हो कि करीब सात माह पहले एक अप्रैल को ेमहिला सोमेश्वर से पांच किमी दूर धौनीगाड़ पहुंची। चार दिन तक यह महिला सड़क किनारे रही। बाद में धौलीगाड़ गांव निवासी संतोष कुमार जोशी ने उसे अपने यहां एक कमरे में शरण दी। यह महिला बदहवास अवस्था में थी।
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बाद में उसने अपना नाम शीला बताया और कहा कि वह पिछले साल केदारनाथ में पूजा अर्चना के लिए आई थी। पूजा के दौरान ही आई आपदा में उसके आंखों के सामने 13 वर्षीय पुत्र राजू सैलाब में बह गया, जबकि पति विलास और तीन साल की बेटी रीता का कोई पता नहीं है।
उसने अपना पता महाराष्ट्र के जिला घूले के अंतर्गत धूड़ीपाड़ा मकान नंबर14 बताया था। उसका कहना था कि परिजनों को ढूंढते और भटकते हुए वह सोमेश्वर तक पहुंच गई थी। बाद में पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने इस महिला से पूछताछ के बाद उसे अल्मोड़ा के नारी निकेतन भेज दिया था।
पूछताछ के बाद यह माना जा रहा था कि कुछ समय तक इस महिला की याददाश्त खोई रही और बाद में उसे सब कुछ याद आ गया। प्रशासन के अधिकारियों ने उसके बारे में महाराष्ट्र पुलिस को सूचना भेजी लेकिन वहां से कुछ जवाब नहीं मिला।
इस कारण उसे नारी निकेतन में ही रखा गया है। नारी निकेतन आने वाले लोगों से वह घर भेजने का आग्रह करती है। नारी निकेतन के कर्मचारियों ने बताया कि महिला की भाषा भी स्पष्ट समझ में नहीं आती।