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केरल की आयुर्वेदिक पद्धति के महत्व के बारे में बताया
Thu, 10 Jan 2019 11:26 PM IST
Almora desk
ब्यूरो/अमर उजाला/अल्मोड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला/अल्मोड़ा
Published by: Almora desk
Updated Thu, 10 Jan 2019 11:26 PM IST
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विकास भवन में आयोजित शिविर में एक कर्मचारी के स्वास्थ्य की जांच करते डा. अनीश विश्वनाधन।
- फोटो : अमर उजाला
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आयुर्वेद कलमठिया क्लीनिक और अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के सहयोग से यहां विकास भवन परिसर में दो दिवसीय निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का समापन हो गया है। शिविर में आयुर्वेद कलमठिया के वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. अनीश विश्वनाधन ने दूसरे दिन भी दर्जनों रोगियों का उपचार करने के साथ ही उन्हें स्वस्थ रहने के लिए कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी दीं।
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शिविर के दूसरे दिन डॉ. अनीश विश्वनाधन ने कर्मचारियों और अधिकारियों के स्वास्थ्य की जांच की और उन्हें केरल की आयुर्वेदिक पद्धति के महत्व के बारे में बताया। बताया कि केरल की आयुर्वेद पद्धति में मुख्य रूप से पंचकर्म थेरेपी के माध्यम से इलाज किया जाता है। उन्होंने इस मौके पर कर्मचारियों को अलग से व्याख्यान के माध्यम से बताया कि केरल की पंचकर्म चिकित्सा पद्धति के अंतर्गत बास्ती, वमन और विरेचनम तीन तरह की थेरेपी के माध्यम से इलाज किया जाता है।
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बास्ती थेरेपी के अंतर्गत स्पाइन, हड्डी, मसल से संबंधित रोगों का निदान किया जाता है। जबकि वमन थेरेपी में अस्थमा, माइग्रेन आदि रोगों और विरेचनम थेरेपी से शुगर, केलस्ट्रोल, त्वचा रोग और रक्त संबंधी विकार आदि रोगों का निदान किया जाता है।
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अंत में डॉ. अनीस के अलावा सीनियर कोआर्डिनेटर पूजा मन्सूर ने शिविर के आयोजन में सहयोग के लिए मुख्य विकास अधिकारी मयूर दीक्षित और अन्य अधिकारियों का आभार जताया। शिविर के आयोजन में उक्त लोगों के अलावा आयुर्वेद कलमठिया क्लीनिक के सुनीता, मनीषा, अमल, अनूप, अंशुल और योगेंद्र आदि ने सहयोग किया।