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छप्पन बच्चों को पढ़ाने के लिए एक शिक्षिका
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा
Updated Thu, 14 Jul 2016 12:10 AM IST
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बैगनियां
- फोटो : अमर उजाला
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जिले के सोमेश्वर तहसील के अंतर्गत प्राथमिक स्कूल बैगनियां में पांच कक्षाओं में 56 बच्चे अध्ययनरत हैं। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए मात्र एक शिक्षिका तैनात है। स्कूल में दो कक्ष हैं।
प्रत्येक कक्ष में दो कक्षा चलती हैं, जबकि पहली कक्षा के बच्चों को बरामद में बैठककर अध्ययन करना पड़ता है।सरकार बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने के दावे कर रही है। करोड़ों की कई योजनाएं संचालित हो रही हैं।
जनप्रतिनिधि और अधिकारी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की तैनाती की बात जरूर करते हैं, लेकिन स्कूलों के हॉल खस्ताहाल हैं। प्राथमिक स्कूल बैगनियां में पांच कक्षाओं के 56 बच्चों को पढ़ाने के लिए मात्र एक शिक्षिका तैनात है।
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शिक्षिका एक कक्षा के बच्चों को पढ़ाती हैं तो अन्य कक्षाओं के बच्चे छूट जाते हैं। एक मात्र शिक्षिका को शिक्षण के अलावा विभागीय कागजातों की खानापूर्ति और अन्य जानकारियां भी उच्चाधिकारियों को भेजनी होती हैं। एकल शिक्षक होने से शिक्षिका के अवकाश पर जाने पर विभाग दूसरे स्थान से शिक्षक को भेजता है।
गत दिनों हुई बारिश के बाद स्कूल की पेयजल लाइन टूटी हुई है। बच्चों के पीने और मध्याह्न भोजन बनाने के लिए भोजन माता करीब दो सौ मीटर दूर स्थित गांव से पानी लाती है। बारिश से स्कूल प्रांगण में मलबा आ गया है जिसे अब तक नहीं हटाया गया है। स्कूल भवन के समीप ही टूटा भवन है।
जिसके मलबे के निस्तारण के लिए पिछले साल निविदा करा ली गई थी। पर जीर्ण-शीर्ण भवन के मलबे का निस्तारण अब तक नहीं हुआ है। इस भवन से छोटे-छोटे बच्चों को खतरा बना है। स्कूल की चहारदीवारी भी नहीं बनी है। स्कूल बंद होने पर अराजक तत्व पहुंच जाते हैं। वे दीवारें क्षतिग्रस्त करने के साथ ही बीड़ी सिगरेट के अवशेष छोड़ जाते हैं।
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प्रत्येक कक्ष में दो कक्षा चलती हैं, जबकि पहली कक्षा के बच्चों को बरामद में बैठककर अध्ययन करना पड़ता है।सरकार बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने के दावे कर रही है। करोड़ों की कई योजनाएं संचालित हो रही हैं।
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जनप्रतिनिधि और अधिकारी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की तैनाती की बात जरूर करते हैं, लेकिन स्कूलों के हॉल खस्ताहाल हैं। प्राथमिक स्कूल बैगनियां में पांच कक्षाओं के 56 बच्चों को पढ़ाने के लिए मात्र एक शिक्षिका तैनात है।
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शिक्षिका एक कक्षा के बच्चों को पढ़ाती हैं तो अन्य कक्षाओं के बच्चे छूट जाते हैं। एक मात्र शिक्षिका को शिक्षण के अलावा विभागीय कागजातों की खानापूर्ति और अन्य जानकारियां भी उच्चाधिकारियों को भेजनी होती हैं। एकल शिक्षक होने से शिक्षिका के अवकाश पर जाने पर विभाग दूसरे स्थान से शिक्षक को भेजता है।
गत दिनों हुई बारिश के बाद स्कूल की पेयजल लाइन टूटी हुई है। बच्चों के पीने और मध्याह्न भोजन बनाने के लिए भोजन माता करीब दो सौ मीटर दूर स्थित गांव से पानी लाती है। बारिश से स्कूल प्रांगण में मलबा आ गया है जिसे अब तक नहीं हटाया गया है। स्कूल भवन के समीप ही टूटा भवन है।
जिसके मलबे के निस्तारण के लिए पिछले साल निविदा करा ली गई थी। पर जीर्ण-शीर्ण भवन के मलबे का निस्तारण अब तक नहीं हुआ है। इस भवन से छोटे-छोटे बच्चों को खतरा बना है। स्कूल की चहारदीवारी भी नहीं बनी है। स्कूल बंद होने पर अराजक तत्व पहुंच जाते हैं। वे दीवारें क्षतिग्रस्त करने के साथ ही बीड़ी सिगरेट के अवशेष छोड़ जाते हैं।