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मछली उत्पादन बनेगा महिलाओं के आजीविका का जरिया
Updated Tue, 27 Jun 2017 06:31 PM IST
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मछली उत्पादन बनेगा महिलाओं के आजीविका का जरिया
अल्मोड़ा। मछली उत्पादन अब महिलाओं का भी रोजगार का जरिया बनेगा। मत्स्य विभाग स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिला मंगल दल की सदस्यों को मनरेगा योजना के जरिए मछली उत्पादन से जोड़ेगा। मनरेगा से मछली पालन के लिए तालाब बनाए जाएंगे, जबकि मत्स्य विभाग महिलाओं को मछली बीज उपलब्ध कराएगा।
मत्स्य विभाग स्पेशल कंपोनेंट प्लान, पर्वतीय तालाब निर्माण योजना, नीली क्रांति योजना के तहत ग्रामीणों को अनुदान देकर मत्स्य पालन के लिए जोड़ता है। स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत 60 हजार लागत से 20 मीटर लंबे, पांच मीटर चौड़े और डेढ़ मीटर गहरे जलाशय का निर्माण किया जाता है। इसमें लाभार्थी को 35 हजार रुपये अनुदान दिया जाता है, जबकि 25 हजार रुपये लभार्थी को वहन करने होते हैं। वहीं पर्वतीय तालाब निर्माण योजना में 50 वर्ग फुट के तालाब की कुल लागत 50 हजार रुपये है। इस योजना में भी विभाग लाभार्थी को अनुदान देता है। नीली क्रांति में रनिंग वाटर में 100 वर्ग मीटर तालाब निर्माण की कुल लागत एक लाख रुपये आती है। इस योजना में विभाग 90 फीसदी अनुदान देता है, जबकि 10 फीसदी लाभार्थी को वहन करना होता है। सहायक निदेशक मत्स्य रितेश चंद ने बताया कि नीली क्रांति योजना में विभाग इस वर्ष 12 लोगों को लाभान्वित करेगा।
उन्होंने कहा कि विभाग अब महिला मंगल दलों की महिलाओं को भी मत्स्य उत्पादन से जोड़ेगा। जिससे कि उनकी आजीविका में बढ़ोतरी हो सकेगी। महिला मंगल दलों की सदस्यों को स्वयं सहायता समूह बनाना होगा। समूह की सदस्यों को मत्स्य उत्पादन से जोड़ा जाएगा।
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अल्मोड़ा। मछली उत्पादन अब महिलाओं का भी रोजगार का जरिया बनेगा। मत्स्य विभाग स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिला मंगल दल की सदस्यों को मनरेगा योजना के जरिए मछली उत्पादन से जोड़ेगा। मनरेगा से मछली पालन के लिए तालाब बनाए जाएंगे, जबकि मत्स्य विभाग महिलाओं को मछली बीज उपलब्ध कराएगा।
मत्स्य विभाग स्पेशल कंपोनेंट प्लान, पर्वतीय तालाब निर्माण योजना, नीली क्रांति योजना के तहत ग्रामीणों को अनुदान देकर मत्स्य पालन के लिए जोड़ता है। स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत 60 हजार लागत से 20 मीटर लंबे, पांच मीटर चौड़े और डेढ़ मीटर गहरे जलाशय का निर्माण किया जाता है। इसमें लाभार्थी को 35 हजार रुपये अनुदान दिया जाता है, जबकि 25 हजार रुपये लभार्थी को वहन करने होते हैं। वहीं पर्वतीय तालाब निर्माण योजना में 50 वर्ग फुट के तालाब की कुल लागत 50 हजार रुपये है। इस योजना में भी विभाग लाभार्थी को अनुदान देता है। नीली क्रांति में रनिंग वाटर में 100 वर्ग मीटर तालाब निर्माण की कुल लागत एक लाख रुपये आती है। इस योजना में विभाग 90 फीसदी अनुदान देता है, जबकि 10 फीसदी लाभार्थी को वहन करना होता है। सहायक निदेशक मत्स्य रितेश चंद ने बताया कि नीली क्रांति योजना में विभाग इस वर्ष 12 लोगों को लाभान्वित करेगा।
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उन्होंने कहा कि विभाग अब महिला मंगल दलों की महिलाओं को भी मत्स्य उत्पादन से जोड़ेगा। जिससे कि उनकी आजीविका में बढ़ोतरी हो सकेगी। महिला मंगल दलों की सदस्यों को स्वयं सहायता समूह बनाना होगा। समूह की सदस्यों को मत्स्य उत्पादन से जोड़ा जाएगा।
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