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प्राइवेट अस्पताल बंद होने से सरकारी अस्पतालों में बढ़ रही ओपीडी
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अल्मोड़ा। क्लिनिकल इस्टेबिलशमेंट एक्ट लागू करने, अटल आयुष्मान और आयुष्मान भारत योजना को लागू करने के लिए दबाव नहीं डालने, अस्पतालों में हिंसा रोकने के लिए प्रभावी कानून बनाने की मांग को लेकर जिले के सभी प्राइवेट अस्पताल चौथे दिन भी बंद रहे। प्राइवेट अस्पतालों के बंद होने से इनमें उपचार के लिए आने वाले मरीजों को सरकारी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बढ़ रही है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर शुक्रवार से जिले के प्राइवेट अस्पताल अनिश्चितकाल के लिए बंद हैं। वर्तमान में जिले में छह प्राइवेट अस्पताल और करीब दस क्लिनिक हैं। प्रत्येक अस्पताल में हर रोज 50 से 60 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन हड़ताल के कारण इन मरीजों को सरकारी अस्पतालों की ओर जाना पड़ा। सोमवार को सरकारी अस्पतालों में ओपीडी में रोज की अपेक्षा करीब 150 मरीज ज्यादा पहुंचे। हड़ताल के कारण जिले के सभी प्राइवेट क्लीनिक भी बंद रहे।
इधर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जिला सचिव डॉ. एनएस चौहान ने बताया कि डाक्टरों की मांग पर सरकार की तरफ से कोई भी विचार नहीं हो रहा है। जिससे डाक्टरों में असंतोष व्याप्त है। उन्होंने बताया कि संगठन के आह्वान पर फिलहाल जिले के सभी अस्पतालों को अनिश्चितकाल के लिए बंद करना पड़ रहा है। इससे एक ओर जहां मरीजों को दिक्कतें हो रही है वहीं प्राइवेट अस्पताल और क्लीनिकों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर शुक्रवार से जिले के प्राइवेट अस्पताल अनिश्चितकाल के लिए बंद हैं। वर्तमान में जिले में छह प्राइवेट अस्पताल और करीब दस क्लिनिक हैं। प्रत्येक अस्पताल में हर रोज 50 से 60 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन हड़ताल के कारण इन मरीजों को सरकारी अस्पतालों की ओर जाना पड़ा। सोमवार को सरकारी अस्पतालों में ओपीडी में रोज की अपेक्षा करीब 150 मरीज ज्यादा पहुंचे। हड़ताल के कारण जिले के सभी प्राइवेट क्लीनिक भी बंद रहे।
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इधर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जिला सचिव डॉ. एनएस चौहान ने बताया कि डाक्टरों की मांग पर सरकार की तरफ से कोई भी विचार नहीं हो रहा है। जिससे डाक्टरों में असंतोष व्याप्त है। उन्होंने बताया कि संगठन के आह्वान पर फिलहाल जिले के सभी अस्पतालों को अनिश्चितकाल के लिए बंद करना पड़ रहा है। इससे एक ओर जहां मरीजों को दिक्कतें हो रही है वहीं प्राइवेट अस्पताल और क्लीनिकों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
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