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दुष्कर्म की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगानी होगी : डा. शर्मा
Updated Tue, 28 Aug 2018 10:56 PM IST
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अल्मोड़ा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से राजकीय बालिका इंटर कालेज अल्मोड़ा में आयोजित विधिक जागरूकता शिविर में जिला न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने बच्चों के साथ हो रहे जघन्य अपराधों पर चिंता जताई। उन्होंने दुष्कर्म की बढ़ रही घटनाओं को रोकने पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि पॉक्सो एक्ट अधिनियम के अंतर्गत नाबालिग बच्चों के साथ दुष्कर्म, यौन शोषण और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई का प्रावधान है। इसमें बच्चों के यौन शोषण आदि अपराधों से सुरक्षा प्रदान होती है। नाबालिग बालक-बालिकाओं के साथ किसी भी प्रकार का दुष्कर्म पॉक्सो के दायरे में आता है। इस अधिनियम की धारा चार के तहत वह मामले शामिल किए गए हैं जिसमें बच्चों के साथ दुष्कर्म या कुकर्म किया जाता है। एक्ट के तहत यदि बच्चे की आयु 12 साल से कम है तो दस साल से लेकर मृत्यु दंड तक की सजा का प्रावधान है। साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
अपर जिला जज राहुल गर्ग ने बताया कि पॅाक्सो एक्ट के तहत सभी अपराधों की कार्रवाई एक विशेष न्यायालय द्वारा कैमरे के सामने बच्चे के माता-पिता या जिनमें भरोसा होता है उनके समाने पूरी की जाती है। पीड़ित बच्चा यदि विकलांग है तो अदालत उसकी गवाही या किसी अन्य उद्देश्य के लिए अनुवादक, दुभाषिया या विशेष शिक्षक की सहायता ले सकती है। संचालन करते हुए प्राधिकरण के सचिव शेष चंद्र ने कहा कि पॉक्सो से संबंधित अपराध होने पर संबंधित लोगों को तुरंत एफआईआर कराने के साथ ही प्राधिकरण को सूचना देनी चाहिए। इस मौके पर न्यायिक मजिस्ट्रेट करिश्मा डंगवाल, मुख्य शिक्षाधिकारी जगमोहन सोनी, निर्भया प्रकोष्ठ की अधिवक्ता अभिलाषा तिवारी आदि मौजूद थे। शिविर में शिक्षकों को सरल कानूनी ज्ञान माला पुस्तकों का वितरण किया गया।
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उन्होंने बताया कि पॉक्सो एक्ट अधिनियम के अंतर्गत नाबालिग बच्चों के साथ दुष्कर्म, यौन शोषण और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई का प्रावधान है। इसमें बच्चों के यौन शोषण आदि अपराधों से सुरक्षा प्रदान होती है। नाबालिग बालक-बालिकाओं के साथ किसी भी प्रकार का दुष्कर्म पॉक्सो के दायरे में आता है। इस अधिनियम की धारा चार के तहत वह मामले शामिल किए गए हैं जिसमें बच्चों के साथ दुष्कर्म या कुकर्म किया जाता है। एक्ट के तहत यदि बच्चे की आयु 12 साल से कम है तो दस साल से लेकर मृत्यु दंड तक की सजा का प्रावधान है। साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
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अपर जिला जज राहुल गर्ग ने बताया कि पॅाक्सो एक्ट के तहत सभी अपराधों की कार्रवाई एक विशेष न्यायालय द्वारा कैमरे के सामने बच्चे के माता-पिता या जिनमें भरोसा होता है उनके समाने पूरी की जाती है। पीड़ित बच्चा यदि विकलांग है तो अदालत उसकी गवाही या किसी अन्य उद्देश्य के लिए अनुवादक, दुभाषिया या विशेष शिक्षक की सहायता ले सकती है। संचालन करते हुए प्राधिकरण के सचिव शेष चंद्र ने कहा कि पॉक्सो से संबंधित अपराध होने पर संबंधित लोगों को तुरंत एफआईआर कराने के साथ ही प्राधिकरण को सूचना देनी चाहिए। इस मौके पर न्यायिक मजिस्ट्रेट करिश्मा डंगवाल, मुख्य शिक्षाधिकारी जगमोहन सोनी, निर्भया प्रकोष्ठ की अधिवक्ता अभिलाषा तिवारी आदि मौजूद थे। शिविर में शिक्षकों को सरल कानूनी ज्ञान माला पुस्तकों का वितरण किया गया।
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