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गर्भवती महिलाओं में बढ़ रहे गंभीर रक्त अल्पता के मामले
Updated Sat, 25 Aug 2018 11:08 PM IST
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अल्मोड़ा। जागरूकता और सही खानपान के अभाव में जिले में गर्भवती महिलाओं में गंभीर रक्त अल्पता के मामले बढ़ रहे हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी महिलाओं की संख्या में इजाफा हो रहा है। पिछले साल 28 गर्भवती महिलाएं गंभीर रक्त अल्पता से ग्रसित मिली थी। इस साल अप्रैल से जुलाई तक चार माह के भीतर दस महिलाएं रक्त अल्पता से ग्रसित मिली हैं।
गंभीर रक्त अल्पता यानी कि सात ग्राम से कम हिमोग्लोबिन वाली गर्भवती महिलाएं।
राष्ट्रीय हेल्थ मिशन की रिपोर्ट में वर्ष 2017-18 में जिले में 11118 गर्भवती महिलाएं पंजीकृत थीं। जिनमें से 28 महिलाएं गंभीर रक्त अल्पता से ग्रसित मिलीं। वहीं 2018-19 में अप्रैल से जुलाई तक चार माह के भीतर पंजीकृत 992 गर्भवती महिलाओं में से 10 महिलाएं रक्त अल्पता से ग्रसित मिली हैं। यह सारी जानकारी सरकारी अस्पतालों में पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं की होने वाली जांच के बाद सामने आई है। रक्त अल्पता वाली अधिकतर महिलाएं ग्रामीण क्षेत्र की हैं। सरकारी अस्पतालों में वैसे गर्भवती महिलाओं को आयरन और फालिक एसिड की गोलियां उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं खानपान को लेकर जागरूक नहीं हैं जिससे रक्त अल्पता के मामले सामने आ रहे हैं। इसके कारण गर्भवती महिलाओं में मृत्यु के मामले भी बढ़ते हैं। रक्त अल्पता के कारण जिले में 2017 में चार और इस साल एक मृत्यु का मामला सामने आया है।
नेशनल हेल्थ मिशन के कार्यक्रम प्रबंधक दीपक भट्ट ने बताया कि इस साल अप्रैल से अब तक 10 गर्भवती महिलाएं गंभीर रक्त अल्पता से ग्रसित मिली हैं। ऐसी महिलाओं का चिन्हीकरण कर उन्हें आयरन और फालिक एसिड की 720 गोलियां दी गई हैं। जबकि सामान्य गर्भवती महिलाओं को केवल 360 गोलियां ही दी जाती हैं। इसके अलावा अस्पताल में होने वाली उनकी चिकित्सकीय जांच पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
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गंभीर रक्त अल्पता यानी कि सात ग्राम से कम हिमोग्लोबिन वाली गर्भवती महिलाएं।
राष्ट्रीय हेल्थ मिशन की रिपोर्ट में वर्ष 2017-18 में जिले में 11118 गर्भवती महिलाएं पंजीकृत थीं। जिनमें से 28 महिलाएं गंभीर रक्त अल्पता से ग्रसित मिलीं। वहीं 2018-19 में अप्रैल से जुलाई तक चार माह के भीतर पंजीकृत 992 गर्भवती महिलाओं में से 10 महिलाएं रक्त अल्पता से ग्रसित मिली हैं। यह सारी जानकारी सरकारी अस्पतालों में पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं की होने वाली जांच के बाद सामने आई है। रक्त अल्पता वाली अधिकतर महिलाएं ग्रामीण क्षेत्र की हैं। सरकारी अस्पतालों में वैसे गर्भवती महिलाओं को आयरन और फालिक एसिड की गोलियां उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं खानपान को लेकर जागरूक नहीं हैं जिससे रक्त अल्पता के मामले सामने आ रहे हैं। इसके कारण गर्भवती महिलाओं में मृत्यु के मामले भी बढ़ते हैं। रक्त अल्पता के कारण जिले में 2017 में चार और इस साल एक मृत्यु का मामला सामने आया है।
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नेशनल हेल्थ मिशन के कार्यक्रम प्रबंधक दीपक भट्ट ने बताया कि इस साल अप्रैल से अब तक 10 गर्भवती महिलाएं गंभीर रक्त अल्पता से ग्रसित मिली हैं। ऐसी महिलाओं का चिन्हीकरण कर उन्हें आयरन और फालिक एसिड की 720 गोलियां दी गई हैं। जबकि सामान्य गर्भवती महिलाओं को केवल 360 गोलियां ही दी जाती हैं। इसके अलावा अस्पताल में होने वाली उनकी चिकित्सकीय जांच पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
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